देशभर में न्यायिक रिक्तियां भरने से ज़्यादा ज़रूरी कुछ नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की 5,000 से अधिक पदों पर रिक्तियों पर पिछले साल 22 अक्टूबर को अपने आप संज्ञान लिया था और हाईकोर्ट, राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों से सूचना मांगी थी.

भाषा
Updated: July 30, 2019, 11:27 PM IST
देशभर में न्यायिक रिक्तियां भरने से ज़्यादा ज़रूरी कुछ नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की 5,000 से अधिक पदों पर रिक्तियों पर पिछले साल 22 अक्टूबर को अपने आप संज्ञान लिया था और हाईकोर्ट, राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों से सूचना मांगी थी.
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Updated: July 30, 2019, 11:27 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश भर में निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की भारी रिक्तियों को भरने से ज्यादा ज़रूरी कुछ भी नहीं हो सकता. सुप्रीम कोर्ट ने 24 हाईकोर्ट और 36 राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों द्वारा इस सिलसिले में की गई प्रगति की निगरानी करते हुए यह टिप्पणी की.

पीठ ने इस तथ्य पर हैरानी जताई कि हरियाणा में 14,000 लॉ ग्रेजुएट में से सिर्फ नौ लोगों को जूनियर सिविल जज के पद के लिए चुना गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘‘किसी न किसी विश्वविद्यालय ने अवश्य ही उन्हें लॉ की डिग्री दी होगी. आपने सिविल जज के 14,000 पदों में सिर्फ नौ के लिए उन्हें उपयुक्त पाया.’’

5 हज़ार से अधिक खाली पदों पर लिया था संज्ञान
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की 5,000 से अधिक पदों पर रिक्तियों पर पिछले साल 22 अक्टूबर को अपने आप संज्ञान लिया था और हाईकोर्ट, राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों से सूचना मांगी थी.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले अदालत कक्ष में मंगलवार को 29 राज्यों एवं सात केंद्र शासित क्षेत्रों के विधि सचिव सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन में उपस्थित हुए.

न्यायिक अधिकारियों की रिक्तियों को भरे जाने के लिए 30 जून तक उनके द्वारा की गई प्रक्रियाओं की ताजा स्थिति से न्यायालय को उन्हें अवगत कराने को कहा गया था. पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस भी शामिल हैं.

ज़रूरत पड़ने पर पूरे दिन होगी मामले की सुनवाई
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पीठ ने कहा, ‘‘इससे(न्यायिक रिक्तियों) से अधिक महत्वपूर्ण कुछ नहीं हो सकता. यदि जरूरत पड़ी तो हम इस मामले को पूरे दिन सुनेंगे.’’ इस विषय की बुधवार को भी सुनवाई होगी.

शीर्ष न्यायालय ने विधि सचिवों और उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को तलब करते हुए उन्हें निर्देश दिया था कि प्रत्येक कैडर की कुल क्षमता बताई जाए. उन्होंने यह बताने को कहा कि विभिन्न कैडरों में वास्तव में भरे गये पदों की संख्या कितनी है, प्रत्येक कैडर में खाली पड़े पदों की संख्या क्या है, अभी चल रहे चयन के संदर्भ में पदों की संख्या और चयन किस स्तर तक पहुंचा है, विभिन्न कैडरों में ऐसे पदों की संख्या कितनी है जिनके लिए चयन की प्रक्रिया अभी शुरू की जानी बाकी है. चीफ जस्टिस ने कुछ राज्यों को न्यायिक अधिकारियों की नियुक्तियां निर्धारित समय से पहले करने को कहा.

अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (उच्चतर न्यायिक सेवाएं) के पदों को भरने की स्थिति पर वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि ऐसे 329 अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया है और अधिसूचना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया है.

दीवान न्यायमित्र के तौर इस विषय में न्यायालय की सहायता कर रहे हैं. पीठ ने पूछा, ‘‘आप उन्हें नियुक्त कब करने जा रहे हैं.’’ राज्य सरकार ने कहा, ‘‘हमें पुलिस सत्यापन कराना होगा. कृपया तीन महीने का वक्त दिया जाए.’’

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘इसे 15 दिनों में करिये. हम 15 दिनों में ये नियुक्तियां चाहते हैं. अपने राज्य सरकार से कहिये कि सुप्रीम कोर्ट यह चाहता है.’’

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First published: July 30, 2019, 11:24 PM IST
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