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nothing more than friendship latvia gifted a statue of rs 67 lakh to bareilly medical college

डॉक्टर्स के सम्मान में 20 फीट की मूर्ति! लातविया से बरेली पहुंची मूर्ति, कोविड में हेल्थ वर्कर्स के काम को सम्मान

लातविया ने 'मेडिक्स टू द वर्ल्ड' प्रतिमा बरेली के मेडिकल कॉलेज को उपहार में दी (twitter/@DrJawahars)

लातविया ने 'मेडिक्स टू द वर्ल्ड' प्रतिमा बरेली के मेडिकल कॉलेज को उपहार में दी (twitter/@DrJawahars)

एगर्स बिकसे की 'मेडिक्स टू द वर्ल्ड' प्रतिमा को पहली बार लातविया की राजधानी रीगा में प्रदर्शित किया गया था. इस 20 फुट की मूर्ति में अपनी बाहों को फैलाए हुए एक चिकित्साकर्मी को दिखाया गया है. ये प्रतिमा अब बरेली के एक मेडिकल कॉलेज को भेंट की गई है.

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वबरेली. लातविया की सरकार ने कोविड महामारी से निपटने में स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान के सम्मान में बनाई गई ‘मेडिक्स टू द वर्ल्ड’ नामक 20 फुट की एक प्रतिमा बरेली के एक मेडिकल कॉलेज को दोस्ती के उपहार के रूप में देने का फैसला किया है. इस मूर्ति में अपनी बाहों को फैलाए हुए एक डॉक्टर को बनाया गया है. इसे लातविया के मूर्तिकार एगर्स बिकसे ने जून 2020 में बनाया था. पहली बार इसे लातविया की राजधानी रीगा में रखा गया था. यूरोप के एक निजी संग्रहालय ने इस मूर्ति के लिए करीब 67 लाख रुपये (80,000 यूरो) देने की पेशकश की थी. इसके बावजूद लातविया ने इसे भारतीय संस्थान को उपहार में दिया है.

गुरुवार को लातविया के राजदूत आर्टिस बर्टुलिस ने इस मूर्ति को बरेली के बाहरी इलाके में स्थित दीपमाला संस्थान को उपहार के तौर पर सौंप दिया. मुख्य अतिथि बिकसे की मौजूदगी में इसका अनावरण किया गया. लातविया के अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं.

लातविया की भाषा की कुछ जड़ें संस्कृत भाषा से भी जुड़ी हुई हैं. इस समय बरेली में मौजूद चित्रकार बिकसे ने अपनी अगली मूर्ति बनाने की प्रेरणा हासिल करने के लिए एक संस्कृत कॉलेज जाने का भी समय निकाला. दीपमाला संस्थान के प्रमुख डॉ. सोमेश मेहरोत्रा ने मीडिया को बताया कि ‘हम भविष्य में महामारी जैसी स्थिति से निपटने के लिए बरेली में एक लेवल-4 प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. इस तरह की प्रयोगशाला के निर्माण पर यूरोप में कुछ बुनियादी शोध करते हुए हमने लातविया में इस मूर्ति को देखा. मैंने भारत में इसकी एक नकल बनाने की इच्छा जाहिर की. लातविया से जब इसके लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वे हमें मूल मूर्ति ही देंगे.’

जबकि बिकसे ने कहा कि ‘इस मूर्ति को आने वाली पीढ़ियों के लिए उस कठिन समय और समस्याओं को याद करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका हमने सामना किया. इससे वे डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की अनूठी भूमिका को समझना शुरू कर देंगे. मूर्ति बनाते समय मैंने कल्पना की है कि एक डॉक्टर एक कोविड अस्पताल से निकल रहा है. समाज की सेवा करने के लिए खुद को फिर से तैयार होने के लिए वह अपने हाथ को हवा में फैलाकर अपनी ऊर्जा और ध्यान को जुटा रहा है. मैं लातविया और भारत के बीच 5,000 किलोमीटर लंबे पुल के निर्माण की आशा कर रहा हूं.’

Tags: Bareilly Big News, Bareilly city news, Bareilly covid hospital, Inspiring story

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