पराली जलाने पर रोक के लिये याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केन्द्र और राज्यों को नोटिस

याचिका में दलील दी गयी कि दिल्ली के प्रदूषण में लगभग 40 फीसदी योगदान पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का रहता है (फाइल फोटो)
याचिका में दलील दी गयी कि दिल्ली के प्रदूषण में लगभग 40 फीसदी योगदान पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का रहता है (फाइल फोटो)

चीफ जस्टिस एस ए बोबडे (Chief Justice SA Bobde), जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमणियन की पीठ ने इस मामले की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुये पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के साथ ही पंजाब (Punjab), हरियाणा (Haryana) और दिल्ली (Delhi) को नोटिस जारी करने का निर्देश (Instructions) दिया. इन नोटिस का जवाब 16 अक्टूबर तक देना है.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पराली जलाने (Burn the Stubble) पर पाबंदी के लिये दायर याचिका पर मंगलवार को केन्द्र और पंजाब (Punjab), हरियाणा (Haryana) तथा दिल्ली (Delhi) राज्यों को नोटिस जारी किये. पराली जलाने से सर्दी (Winter) के मौसम में राजधानी में जबर्दस्त वायु प्रदूषण हो जाता है. चीफ जस्टिस एस ए बोबडे (Chief Justice SA Bobde), जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमणियन की पीठ ने इस मामले की वीडियो कांफ्रेंस (Video Conference) के माध्यम से सुनवाई करते हुये पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (Ministry of Environment and Forests) के साथ ही पंजाब (Punjab), हरियाणा (Haryana) और दिल्ली (Delhi) को नोटिस जारी करने का निर्देश (Instructions) दिया. इन नोटिस का जवाब 16 अक्टूबर तक देना है.

कोर्ट 12वीं कक्षा की छात्रा (Student) आदित्य दुबे और कानून के छात्र अमन बांका की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था. इस याचिका में छोटे और मझोले किसानों (Small and medium farmers) को पराली हटाने वाली मशीन नि:शुल्क (free) उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है ताकि भारी कण हवा (air) में नहीं पहुंच सकें. याचिका में दलील दी गयी कि दिल्ली के प्रदूषण (Pollution of Delhi) में लगभग 40 फीसदी योगदान पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का रहता है.

मामूली कोविड-19 को गंभीर संक्रमण के स्तर पर ले जा सकता है वायु प्रदूषण
याचिका में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन का उल्लेख किया गया है कि मामूली कोविड-19 को गंभीर संक्रमण के स्तर पर ले जाने में वायु प्रदूषण की मूख्य भूमिका हो सकती है.
याचिका में कहा गया है, ‘‘अत: दिल्ली-एनसीआर में तेजी से नियंत्रण बाहर हो रहे कोविड के दौर में इस साल वायु प्रदूषण के स्तर में वृद्धि कोविड-19 के कारण नागिरकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिक और बच्चों, में सांस लेने में होने वाली समस्या की वजह से मृत्यु की दर मे तेजी से वृद्धि हो सकती है.’’



पराली जलाने की अनुमति देना कोविड-19 महामारी के दौर में विनाशकारी हो सकता है
याचिका में दलील दी गयी है कि ऐसी स्थिति में पराली जलाने की अनुमति देने का परिणाम कोविड-19 महामारी के दौर में विनाशकारी हो सकता है.

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याचिका में राज्य सरकारों को सितंबर से जनवरी, 2021 के दौरान पराली जलाने से रोकने के उपाय करने और पराली निकालने वाली मशीनों के किराये की अधिकतम सीमा निर्धारित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.
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