चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर आगे भी अजित डोभाल के हाथों में रहेगी बागडोर!

चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर आगे भी अजित डोभाल के हाथों में रहेगी बागडोर!
भारत के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर अजित डोवाल आगे भी चीनी विदेश मंत्री से बातचीत जारी रखेंगे. (फाइल फोटो)

सैन्य अधिकारी स्तर और राजनयिक स्तर की बातचीत के अलावा भी अजित डोभाल (Ajit Davial) और चीनी विदेश मंत्री एक-दूसरे से संपर्क में बने रहेंगे. ऐसा फैसला इसलिए किया गया है कि भविष्य में भी सीमा पर किसी भी तरह के बड़े विवाद की स्थिति को टाला जा सके. ये दोनों निगाह बनाकर रखेंगे कि सीमा पर दोनों पक्षों की तरफ से द्विपक्षीय प्रोटोकॉल का पालन किया जाए.

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नई दिल्ली. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Adviser) अजित डोभाल (Ajit Doval) और चीनी विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) की बातचीत के बाद सीमा विवाद हल्का पड़ता दिख रहा है. बीते करीब दो महीने से जारी सीमा विवाद, गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद गहरा गया था. सैन्य अधिकारी स्तर की तीन राउंड की बातचीत में कोई हल निकलता नहीं दिख रहा था. 5 जुलाई को भारत की तरफ से सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किए गए अजित डोभाल की चीनी विदेश मंत्री से हुई बातचीत के बाद अब स्थितियां सामान्य होती दिख रही हैं. चीनी विदेश मंत्री वांग यी को भी चीन ने विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है.

डोभाल का बड़ा रोल
भारत सरकार द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति के मुताबिक सीमा विवाद को लेकर दोनों विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा विवाद पर खुलकर गहराई के साथ बातचीत हुई. बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि भारत चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों ही पक्ष अपनी सेनाएं पीछे लेंगे. सीमा पर शांति बनाए रखने को सबसे बड़ी प्राथमिकता माना गया. सीमा से सेनाएं पीछे करने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान किया जाएगा. और भविष्य में भी इस तरह की स्थितियां उत्पन्न न होने दी जाएं जिससे शांति को खतरा हो. साथ ही यह भी सहमति बनी कि दोनों देशों में सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी रहनी चाहिए.


बातचीत करते रहेंगे दोनों विशेष प्रतिनिधि


सबसे विशेष बात ये रही कि अब दोनों ही विशेष प्रतिनिधि सीमा के मसले पर एक-दूसरे से भविष्य में बातचीत जारी रखेंगे. ये बातचीत अन्य सभी स्तर की बातचीत के साथ चलती रहेगी. यानी सैन्य अधिकारी स्तर और राजनयिक स्तर की बातचीत के अलावा भी अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री एक-दूसरे से संपर्क में बने रहेंगे. ऐसा फैसला इसलिए किया गया है कि भविष्य में भी सीमा पर किसी भी तरह के बड़े विवाद की स्थिति को टाला जा सके. ये दोनों निगाह बनाकर रखेंगे कि सीमा पर दोनों पक्षों की तरफ से द्विपक्षीय प्रोटोकॉल का पालन किया जाए.

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गलवान घाटी के बाद बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि चीन के साथ सीमा विवाद की शुरुआत मई के पहले सप्ताह में ही हो गई थी लेकिन 15 जून को गलवान घाटी की हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद भारत की तरफ से कड़ा रुख अख्तियार किया गया. भारत की तरफ से एक के बाद एक कई कदम उठाए गए जिससे चीन को सख्त संदेश दिया जा सके. पूरे विवाद के दौरान भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वो अपनी अखंडता और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा.
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