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Analysis: बिहार में 'बिग ब्रदर' बनने के साथ BJP ने बढ़ा दिया बंगाल विजय के लिए पहला कदम

ममता बनर्जी को हराने की रणनीति तैयार कर रही है बीजेपी.
ममता बनर्जी को हराने की रणनीति तैयार कर रही है बीजेपी.

बिहार चुनाव (Bihar election 2020) जीतने के बाद बीजेपी (BJP) जोरदार तरीके से पश्चिम बंगाल में प्रवेश करना चाहती है और इसीलिए तारकिशोर प्रसाद को उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 18, 2020, 6:52 PM IST
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अशोक मिश्रा


नई दिल्‍ली. बिहार चुनाव (Bihar Elections Results 2020) के बाद पटना के राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राजेंद्र सभागार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) की अगुआई में पिछड़ी जाति के तारकिशोर प्रसाद और अति पिछड़ी जाति (EBC) की रेणु देवी बैठीं. इसका संदेश स्पष्ट था- बीजेपी (BJP) ने बिहार में 'बिग ब्रदर' की भूमिका निभाई है. सभागार की आगे की लाइन में गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी ने ही बिहार में एनडीए (NDA) की राजनीति के एक नए युग की शुरुआत कर दी. बीजेपी, जो एनडीए के चार सहयोगियों के बीच इकलौती सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, विजयी मूड में थी और इस पूरे कार्यक्रम को लगभग हाईजैक करती दिख रही थी.

दो उप-मुख्यमंत्रियों के साथ बीजेपी को इस बार राज्य विधानसभा के अध्यक्ष का पद भी मिलना तय है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नंदकिशोर यादव पार्टी की बिहार रणनीति में मूलभूत परिवर्तन का संकेत देते हुए पद संभालने के लिए पूरी तरह तैयार बताए जा रहे हैं. बीजेपी ने कैबिनेट गठन में भी सही जाति कार्ड खेला क्योंकि बिहार कैबिनेट के पहले सेट का जाति समीकरण सामाजिक रणनीति में बदलाव को दर्शाता है. पिछड़ी जातियों और ईबीसी को प्रमुखता से एक बनिया तारकिशोर प्रसाद और ईबीसी श्रेणी की नोनिया रेणु देवी को उप-मुख्यमंत्री के रूप में प्रमुखता दी गई है.




15 साल तक बीजेपी के पास केवल सुशील कुमार मोदी ही उप मुख्यमंत्री थे. इस बार सुशील मोदी को बिहार की राजनीति से बाहर रखा गया है, खासकर चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद. उन्हें केंद्रीय मंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में बुलंद किए जाने की संभावना है. बीजेपी ने राम सूरत राय और उत्तर बिहार के एक एससी सदस्य रामप्रीत पासवान को मंत्रि परिषद में शामिल किया गया. कैबिनेट में उच्च जातियों में मंगल पांडे (ब्राह्मण), जिवेश मिश्रा (भूमिहार) और अमरेन्द्र प्रताप सिंह (राजपूत) शामिल हैं.

नीतीश कुमार की अगुआई वाली जदयू, जो शक्तिशाली कुर्मी जाति के हैं, ने उच्च जातियों में एक भूमिहार (विजय कुमार चौधरी), एक यादव (विजेंद्र प्रसाद यादव) और एक कुशवाहा (मेवालाल चौधरी) को प्रतिनिधित्व दिया है. ईबीसी (शिला मंडल) और अनुसूचित जाति (अशोक चौधरी) भी हैं. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) का प्रतिनिधित्व मुसहर जाति से आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने किया है. ईबीसी के बीच संख्यात्मक रूप से बड़ी जाति मल्लाह (मछुआरों) समुदाय से ताल्लुक रखने वाले विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी को चुनाव हारने के बावजूद मंत्री बनाया गया है.

यहां कैबिनेट के जातिगत पैटर्न में बदलाव होना लाजिमी है, क्योंकि नई बिहार विधानसभा में अत्यधिक पिछड़ी जातियों, वैश्यों और महिला विधायकों की संख्या में वृद्धि के साथ ही सत्ताधारी गठबंधन में यादवों की संख्या जहां बेहद कम, वहीं मुस्लिम विधायक तो पूरी तरह नदारद हैं.

कैबिनेट गठन की सबसे बड़ी खासियत है मंत्रिपरिषद में किसी भी मुस्लिम चेहरे का न होना. एनडीए के पास कोई मुस्लिम चेहरा नहीं है, क्योंकि जदयू द्वारा मैदान में उतारे गए सभी 11 उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं. वहीं बीजेपी ने बिहार में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट ही नहीं दिया था. हालांकि जदयू के नेता कहते हैं कि पार्टी के पास विधान परिषद में दो मुस्लिम सदस्य हैं जिन्हें बाद में कैबिनेट में जगह दी जा सकती है.

2020 के चुनावों में बिहार में मुस्लिम विधायकों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई. 2015 में 24 मुस्लिम विधायकों की तुलना में इस बार 19 मुस्लिम विधायक जीते. राजद के सात मुस्लिम विधायक, कांग्रेस के चार, भाकपा-माले के दो, एआईएमआईएम के पांच और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक विधायक हैं.

बिहार चुनाव जीतने के बाद बीजेपी जोरदार तरीके से पश्चिम बंगाल में प्रवेश करना चाहती है और इसीलिए तारकिशोर प्रसाद को उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया. प्रसाद कटिहार से ताल्लुक रखते हैं, जिनकी आबादी बांग्‍ला भाषी पश्चिम बंगाल में है. भगवा संगठन ने 294 सदस्यीय बंगाल विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. बिहार के साथ और धूल फांकने के साथ, बीजेपी अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे रही है और अगले साल अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए बिहार, त्रिपुरा और असम की सीमा से लगे सीमा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है.

ममता बनर्जी सरकार पर अपना अंतिम हमला शुरू करने से पहले बीजेपी बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों का इंतजार कर रही थी. राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर जीत हासिल कर बीजेपी ने पहले ही बंगाल में अपनी पकड़ बना ली है. (लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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