'जिन्होंने बनाई सरकार, उनसे छिनेगा वोट का अधिकार'

नासिर हुसैन
Updated: August 8, 2018, 8:23 PM IST
'जिन्होंने बनाई सरकार, उनसे छिनेगा वोट का अधिकार'
फाइल फोटो.

उन्हीं के वोट से 2014 लोकसभा और 2016 के विधानसभा चुनावों में सरकार बनी हैं. इसलिए सबसे पहले इस ओर विचार करना चाहिए. ये कहना है कोलकाता के एक कॉलेज में प्रोफेसर मेदुल इस्लाम का.

  • Last Updated: August 8, 2018, 8:23 PM IST
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नेशनल सिटिजन रजिस्टर (एनआरसी) मामले पर राजनीति गर्म है. एनआरसी से जुड़े कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब कोई नहीं दे रहा है. आज जिन्हें घुसपैठिया बताकर उनके वोट देने के अधिकार को खत्म करने की बात की जा रही है, उन्हीं के वोट से 2014 लोकसभा और 2016 के विधानसभा चुनावों में सरकार बनी हैं. इसलिए सबसे पहले इस ओर विचार करना चाहिए. ये कहना है कोलकाता के एक कॉलेज में प्रोफेसर मेदुल इस्लाम का.

न्यूज18 इंडिया के मंगलवार को हुए खास कार्यक्रम बैठक में भी आए मेहमानों ने असम के एनआरसी मामले पर चर्चा की. बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि जिनका नाम एनआरसी में नहीं है उनसे वोट देने का अधिकार ले लेना चाहिए. ये घुसपैठिए हैं. लेकिन जब तक एनआरसी ड्राफ्ट का काम पूरा नहीं हो जाता सभी को एक मौका दिया जाएगा. ऐसे लोग अपनी नागरिकता का सबूत पेश कर सकते हैं.

वहीं इस बारे में भाजपा नेता राममाधव का कहना है कि इसे चुनावी या सियासी मुद्दा नहीं बनाना चाहिए. सभी 40 लाख लोग घुसपैठिए नहीं हैं. लेकिन बावजूद इसके ऐसे लोगों से वोट देने का अधिकार वापस ले लेना चाहिए. दूसरी ओर सांसद और भाजपा नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने भी कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि जिनके नाम एनआरसी में नहीं हैं उन सभी से वोट देने का अधिकार छीन लेना चाहिए.

फोटो- अमित शाह.


असम में एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट जारी होने के बाद चुनावों पर इसके असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम फाइनल ड्राफ्ट में नहीं हैं, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. वे मतदान प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं, बस उनका नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए.

फोटो-असदुद्दीन ओवैसी.


मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि एनआरसी की लिस्ट से बाहर होने पर भी एक आम आदमी राज्य की मतदाता सूची में बना रह सकता है, लेकिन इसके लिए उसे चुनाव पंजीकरण अधिकारी के सामने दस्तावेज के जरिए साबित करना होगा कि वह भारत का नागरिक है, वह जनवरी 2019 तक 18 साल का है और जहां से मतदान करना चाहता है, उस विधानसभा का निवासी हो. उन्होंने कहा कि इसके लिए चुनाव आयोग एनआरसी की अंतिम सूची का इंतजार किए बगैर जनवरी में एक सूची प्रकाशित करेगा.
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फोटो-सुब्रमण्यम स्वामी.


सांसद असदउद्दीन औवेसी ने भी चुनाव आयोग के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनके पास अधूरे दस्तावेज हैं लेकिन वो रहने वाले असम के ही हैं. इसलिए उनके वोट देने का अधिकार नहीं छीना जाए.

इस बारे में मेदुल इस्लाम कहते हैं कि चुनावी कसरत असम की सभी लोकसभा सीट जीतने के लिए की जा रही है. बंगाल में एनआरसी वाला दांव नहीं चल पा रहा है तो उसकी भरपाई असम से करने के लिए ये खेल रचा गया है.

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First published: August 8, 2018, 4:13 PM IST
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