अपना शहर चुनें

States

हेमंत बिश्व सरमा बोले- असम में NRC-CAA अब कोई मुद्दा नहीं, BJP की तरफ हैं असमिया मुसलमान

बहुमुखी राजनीतिज्ञ के तौर पर हेमंत बिश्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) उत्तर पूर्व में बीजेपी के प्रमुख संकटमोचक हैं.
बहुमुखी राजनीतिज्ञ के तौर पर हेमंत बिश्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) उत्तर पूर्व में बीजेपी के प्रमुख संकटमोचक हैं.

हेमंत बिश्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) कहते हैं, 'बिहार चुनाव के परिणाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा जीत की निरंतरता है. हालांकि, एक राज्य के चुनाव का दूसरे पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन पीएम मोदी के लोगों के विश्वास का असम (Assam Assembly Election 2021) और बंगाल के चुनावों में व्यापक प्रभाव पड़ेगा.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2020, 10:11 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. असम में अगले साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा के चुनाव (Assam Assembly Election 2021) होने हैं. बहुमुखी राजनीतिज्ञ के तौर पर हेमंत बिश्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) उत्तर पूर्व में बीजेपी के प्रमुख संकटमोचक हैं. अगले साल होने वाले चुनाव में बीजेपी को सत्ता में बनाए रखने के लिए सरमा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है. असम में पिछले दो साल से राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) एक मुख्य मुद्दा रहा है. हालांकि, सरमा इसे आगामी चुनाव में मुद्दा नहीं मानते. हेमंत बिश्व सरमा कहते हैं, 'बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली जीत का सकारात्मक प्रभाव हमें पश्चिम बंगाल और असम के आगामी चुनाव में देखने को मिलेगा. असम में अब राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) मुद्दा नहीं रह गया है. उनका तर्क है कि समस्या असमिया मुसलमान नहीं है, लेकिन असमिया संस्कृति को 'खतरा' जरूर है. बीजेपी को नगा शांति वार्ता से बड़ी उम्मीद है.

हेमंत बिश्व सरमा ने 'इंडियन एक्सप्रेस'  से खास बातचीत में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी की रणनीति समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. क्या बिहार चुनाव के नतीजे अगले साल असम में होने वाले विधानसभा चुनाव पर कोई असर डालेंगे? इस सवाल के जवाब में सरमा ने कहा, 'हमें बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम को अलग करके नहीं देखना चाहिए. इसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और मणिपुर में उपचुनावों के साथ देखा जाना चाहिए. अगर आप देश के नक्शे को देखते हैं, तो पूर्व से पश्चिम और दक्षिण से उत्तर तक, लोगों ने एक बार फिर से लोकसभा चुनाव में दिए गए फैसले को दोहराया है.'

हेमंत बिश्व सरमा कहते हैं, 'बिहार चुनाव के परिणाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा जीत की निरंतरता है. हालांकि, एक राज्य के चुनाव का दूसरे पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन पीएम मोदी के लोगों के विश्वास का असम और बंगाल के चुनावों में व्यापक प्रभाव पड़ेगा. बिहार चुनाव के परिणाम से बंगाल और असम दोनों राज्यों में सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है.'





असम में एनआरसी और सीएए अब मुद्दा नहीं है

आगे पढ़ें
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज