SC में अपने सुझावों को लेकर आलोचनाओं का शिकार हुए NRC कोऑर्डिनेटर

शीर्ष अदालत ने 5 सितंबर को एनआरसी के लिए दावे और आपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया को शुरू करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी. इस सुझाव पर केंद्र का जवाब मांगा गया था कि पहचान साबित करने के लिए दावाकर्ताओं द्वारा 10 में से कोई भी एक दस्तावेज इस्तेमाल किया जा सकता है.

News18Hindi
Updated: September 9, 2018, 11:30 PM IST
SC में अपने सुझावों को लेकर आलोचनाओं का शिकार हुए NRC कोऑर्डिनेटर
असम में 30 जुलाई 2018 को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम ड्रॉफ्ट जारी कर दिया गया.
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Updated: September 9, 2018, 11:30 PM IST
असम में सत्तारूढ और विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के प्रदेश समन्वयक प्रतीक हाजेला द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दिए गए इस सुझाव को लेकर उनकी आलोचना की है. उन्होंने दावा और आपत्ति प्रक्रिया को लेकर मांग की है कि असमिया पहचान साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेजों की संख्या में कटौती की जाए.

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शीर्ष अदालत ने 5 सितंबर को एनआरसी के लिए दावे और आपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया को शुरू करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी. इस सुझाव पर केंद्र का जवाब मांगा गया था कि पहचान साबित करने के लिए दावाकर्ताओं द्वारा 10 में से कोई भी एक दस्तावेज इस्तेमाल किया जा सकता है.

असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत साइकिया ने शीर्ष अदालत को दावों और आपत्तियों के संबंध में 1951 एनआरसी और 1971 से पहले की मतदाता सूची में छूट के सुझाव पर हाजेला को पद से हटाने की मांग भी की है.

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उधर, सत्ताधारी बीजेपी की प्रदेश इकाई के महासचिव दिलीप साइकिया ने एनआरसी प्रदेश समन्वयक के सुझाव की आलोचना करते हुए दावा किया कि इसने ऐसे समय स्थिति को जटिल बना दिया है. जब लाखों भारतीय गोरखा, बंगाली, हिंदी भाषी और कई अन्य समुदायों के लोगों के नाम एनआरसी मसौदे में शामिल नहीं हैं.

बता दें कि असम में 30 जुलाई 2018 को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम ड्रॉफ्ट जारी कर दिया गया. इसमें शामिल होने के लिए असम में 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें से 40.07 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली. असम एनआरसी का पहला ड्राफ्ट 31 दिसंबर 2017 को जारी हुआ था. (एजेंसी इनपुट)
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