NRC जारी होने से पहले RSS ने कहा - अगर एक भी वाजिब आदमी छूट गया तो पूरी प्रक्रिया गलत

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Updated: August 30, 2019, 4:29 PM IST
NRC जारी होने से पहले RSS ने कहा - अगर एक भी वाजिब आदमी छूट गया तो पूरी प्रक्रिया गलत
असम में प्रचार के आरएसएस (RSS) प्रभारी शंकर दास ने कहा, NRC, IMDT अधिनियम की तुलना में बहुत अधिक खतरनाक है. सरकार ने इस राक्षस को बनाया.

असम में प्रचार के आरएसएस (RSS) प्रभारी शंकर दास ने कहा, 'NRC, IMDT अधिनियम की तुलना में बहुत अधिक खतरनाक है. सरकार ने इस राक्षस को बनाया. '

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  • Last Updated: August 30, 2019, 4:29 PM IST
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आदित्य शर्मा

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NRC) के जारी किए जाने की पूर्व संध्या पर असम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा कि अगर एक भी वाजिब शख्स छूट गया तो यह पूरी प्रक्रिया 'त्रुटिपूर्ण' और यहां तक ​​कि अवैध प्रवासी (ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारण) अधिनियम, 1983 से भी ज्यादा खतरनाक होगा.

राज्य में बंगाली भाषी हिन्दू आबादी के एक वर्ग द्वारा अपनी नागरिकता के बारे में बढ़ती आशंकाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भीतर ये चिंताएं हैं.

जब असम NRC की पहली सूची को पिछले साल जारी किया गया था, उसमें 41 लाख से अधिक लोगों के नाम नहीं आए थे और उनमें से एक बड़ा वर्ग माना जाता है कि वे हिन्दू थे.

असम में प्रचार के आरएसएस प्रभारी शंकर दास ने कहा, 'NRC, IMDT अधिनियम की तुलना में बहुत अधिक खतरनाक है. सरकार ने इस राक्षस को बनाया. कई विदेशियों को शामिल किया गया है और कई वास्तविक नागरिकों को सूची में गलत तरीके से निकाल दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप. एक स्वतंत्र और निष्पक्ष एनआरसी वही है जो हम चाहते हैं. अगर एक वास्तविक नागरिक को छोड़ दिया जाए, तो इस प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण माना जाता है.'

तब किया था NRC का समर्थन

जब News18 ने पिछले साल जुलाई में दास से पहले बात की थी, आरएसएस नेता ने प्रक्रिया का समर्थन किया था और अखिल भारतीय NRC के लिए वकालत की थी. उन्होंने कहा था कि 'हम चाहते हैं कि हमारे जैसे आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी राष्ट्र के लिए NRC पूरे भारत में हो. यह जानना चाहिए कि हमारे वास्तविक नागरिक कौन हैं. हमारी समस्या इतनी बड़ी है कि जनगणना जैसी कवायद पर्याप्त नहीं है. मुझे खुशी है कि इस तरह की कवायद असम से शुरू हुई.'
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आरएसएस की स्थिति के बारे में विस्तार से पूछे जाने पर दास ने कहा, 'देश में हिंदू हितों की रक्षा के लिए कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. भारत में एक हिंदू विदेशी नहीं हो सकता. वह देश के लिए स्वदेशी है, जबकि मुसलमान विदेशी हैं.' उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि 'हिंदू' से उनका तात्पर्य 'किसी ऐसे व्यक्ति से है जो' हिंदू संस्कृति 'में विश्वास करता है.

हालांकि, दास ने सभी आरोपों से इनकार किया कि एनआरसी मुसलमानों के खिलाफ है. उन्होंने कहा, 'यह मुस्लिम विरोधी कहानी हम पर पश्चिम से थोपा गया है. यह अभ्यास भारतीय नागरिकों की पहचान करने के लिए है और यह विचार कि मुसलमान पीड़ित हैं, एक बनावटी कहानी है.'

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First published: August 30, 2019, 4:27 PM IST
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