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NRI दूल्‍हों की शिकार चार भारतीय लड़कियों की कहानी....

NRI दूल्‍हों की शिकार चार भारतीय लड़कियों की कहानी....

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक एनआरआई दूल्‍हों की शिकार महिलाओं के 3768 मामले मिले हैं. जबकि अकेले पंजाब में ही 30 हजार से ज्‍यादा मामले एनआरआई दूल्‍हों द्वारा भारतीय लड़कियों को धोखा देने के हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक एनआरआई दूल्‍हों की शिकार महिलाओं के 3768 मामले मिले हैं. जबकि अकेले पंजाब में ही 30 हजार से ज्‍यादा मामले एनआरआई दूल्‍हों द्वारा भारतीय लड़कियों को धोखा देने के हैं.

विदेश्‍ा में रह रहे (NRI) दूल्‍हों से ब्‍याही गईं ये लड़कियां आज न्‍याय के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. अब ये लड़कियां इतना भर कह रही हैं कि जो इनपर गुजरी वो किसी और पर न गुजरे. बस इसीलिए सरकारों से गुहार लगा रहे हैं.

'फूलों से सजी डोली, घोड़े पे सवार सपनों का राजकुमार, घर जैसी ससुराल, मां-बाप जैसे सास-ससुर और खूब सारा प्‍यार ! भारतीय समाज में पली-बढ़ी लड़कियों का शायद ही इससे बड़ा कोई सपना हो. यही वजह रही कि कमर तोड़ मेहनत करते आप जिंदगी भर की जमा पूंजी लगाकर अपनी बेटी को विदेश में बढ़‍िया कमाई कर रहे दूल्‍हों के हाथों में सौंप आए. लेकिन मेहंदी का रंग जब नसों से खून लेकर रिसने लगा, सपने लहूलुहान हो गए, ससुराल नर्क में और प्‍यार चीखों में बदल गया तो हकीकत का एहसास हुआ.'

ये कोई दंतकथा नहीं बल्कि भारत में रहने वाली म‍िडिल क्‍लास लड़कियों की दर्दभरी कहानी है. विदेश्‍ा में रह रहे (NRI) दूल्‍हों से ब्‍याही गईं ये लड़कियां आज न्‍याय के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. अब ये लड़कियां इतना भर कह रही हैं कि जो इनपर गुजरी वो किसी और पर न गुजरे. बस इसीलिए सरकारों से गुहार लगा रहे हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक एनआरआई दूल्‍हों की शिकार महिलाओं के 3768 मामले मिले हैं. जबकि अकेले पंजाब में ही 30 हजार से ज्‍यादा मामले एनआरआई दूल्‍हों द्वारा भारतीय लड़कियों को धोखा देने के हैं. उत्‍तर प्रदेश में 130 लड़कियां अभी तक ऐसी शिकायत कर चुकी हैं.


आईए पढ़‍िए NRI दूल्‍हों की शिकार चार भारतीय लड़कियों की कहानी, उन्‍हीं की जुबानी......

अमेरिकी पत्‍नी की सेवा और प्रॉपर्टी के लिए एनआरआई पति ने की मुझसे शादी.......
- जुबी, लखनऊ 


file photo


अपनी शादी को लेकर मैं भी उतनी ही एक्‍साइटेड थी, जितनी कोई और लड़की होती. मैं पढ़ी‍-लिखी लड़की थी. एक कॉरपोरेट में डिप्‍टी डायरेक्‍टर के पद पर तैनात थी. लड़का भी एनआरआई था तो सोचा  जिंदगी अच्‍छी कटेगी. हाेने वाली ससुराल अ‍ार्थिक रूप से संपन्‍न थी. ऊपर से ये लोग अजनबी भी नहीं थे. मां के कजिन की जानकारी में थे. चूंकि मैं माता-पिता की सबसे छोटी संतान थी. पापा की उम्र 70 से ऊपर थी और कोई भाई भी नहीं था तो बिना किसी जांच-पड़ताल के 10 अप्रैल 2014 को बड़े धूमधाम से मेरी शादी कर दी गई.

रंगीन सपनों के साथ मैं अबू धाबी पहुंची. अभी मेहंदी भी न उतर पाई थी कि एक सच ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया. मेरे पति के सिर पर बाल नहीं थे वे बिग लगाते थे. जब उन्‍होंने बिग उतारी तो मैं उन्‍हें पहचान ही न पाई. फिर पता चला कि उनकी उम्र तो काफी ज्यादा है. उस रात मैं देर तक रोई पर मां-बाप को कुछ नहीं बताया. हालांकि मैंने सब्र कर लिया. इसी को निय‍ति मानते हुए निभाने का फैसला किया.


दिन बीत रहे थे, मैं खुश थी कि चलो अब सब ठीक है, लेकिन एक सच से मैं पूरी तरह टूट गई. मेरे पति की अमेरिकी पत्‍नी का फोन आया जिससे वे 10 साल पहले लव मैरिज कर चुके थे. दोनों का एक बच्‍चा भी था. मेरे लिए ये सदमा झेलना मुश्किल था. मैं खूब रोई. खूब विरोध किया.

file photo


जब मैं कई रात-दिन पूछती रही कि मुझे धोखा क्‍यों दिया ? बस मुझे दो बातें पता चलीं कि अमेरिकी पत्‍नी रिनी का एक्‍सीडेंट हो गया था, उसकी सेवा के लिए कोई लड़की चाहिए थी जो मैं थी. वहीं मेरे पति के मां-बाप चाहते थे कि बेटा किसी मुस्लिम लड़की से शादी करें तभी वे उसे प्रॉपर्टी देंगे.

इसी के बाद मेरे साथ मारपीट का सिलसिला शुरू हो गया.  मुझे घर से बाहर निकाल दिया. जब मैं पुलिस स्‍टेशन जाने लगी तो तो मेरी बड़ी ननद जिसे मैं बहुत प्‍यार करती थी, मुझे अपने घर ले गई और तीन दिनों तक मुझे बांधकर रखा. एक दिन ननद और ननदोई बाहर गए तो मैं भांजी को बहलाकर वहां से भाग निकली. बेहद बदहवास मैं भागते हुए सीढ़‍ियों से गिर भी गई. मैं मन और शरीर दोनों से जख्‍मी हो चुकी थी.

मैंने मां-पापा को ये बात बताई और मैं अबू धाबी सिटी में पुलिस स्‍टेशन के लिए निकल पड़ी. वहीं ये सुनकर भारत में मेरे पापा का बीपी बढ़ गया और दोनों किडनी फेल हो गईं. वे डायलिसिस पे आ गए. हालांकि पुलिस स्‍टेशन पहुंचने से पहले ही मेरे सास-ससुर आ गए. मुझसे माफी मांगी. लिखित में परेशान न करने का वादा भी किया और मुझे घर ले गए. मैंने सोचा शायद सुधर गए होंगे लेकिन ये उनकी चाल थी.


Indian marriage- इंडियन मैरिज
प्रतीकात्मक तस्वीर


10 दिन बाद मेरे पति मुझसे बोले तुम्‍हारा स्‍थाई वीजा बनवाना है तो भारत जाना होगा. 18 जून 2015 को वो मुझे लखनऊ एयरपोर्ट पर लाए और छोड़कर वापस अबू धाबी चले गए. मैं घर पहुंची और अगले ही दिन तलाक का नोटिस आ गया. अब मैं कई दिन, महीनों और साल इंतजार करती रही. न पति का पता है न सास-ससुर का.

पिछले चार सालों से मैं अपनी जंग खुद लड़ रही हूं और भारत सरकार से कार्रवाई की मांग कर रही हूं. मैंने वकालात पढ़ी थी, जब एनआरआई पति का केस लड़ने के लिए कोई तैयार न हुआ तो आज मैं अपना केस खुद लड़ रही हूं और अन्‍य लड़कियों को भी कानूनी सलाह देती हूं.

आपकी बेटी डायन है, इसे अपने घर में नहीं रख सकते, ले जाओ ....
सुजाता कुमारी, समस्‍तीपुर, बिहार...

file photo


मैंने एमए पास कर ली तो पापा मेरे लिए रिश्‍ते ढूंढने लगे. मैं तीनों भाई-बहनों में सबसे छोटी थी. बड़ी बहन विधवा हो गई शादी के बाद तो पापा बहुत चिंता में रहते थे. वे चाहते थे कोई अच्‍छा लड़का मिले तो मेरे हाथ पीले कर दें. एक दिन किसी पत्रिका में उन्‍हें एक लड़के का प‍ता मिला जो मॉस्‍को में जॉब कर रहा था और उसके परिजन पटना में रहते थे. पापा ने बात की तो लड़के वालों ने लड़की देखने की इच्‍छा जताई.

एक दिन मेरी होने वाली सास, ननद मुझे देखने आईं. करीब ढ़ाई घंटे तक वे मेरी हाइट, हाथ, पैर, मुंह, आंख, नाक, बाल देखती रहीं. बातें करती रहीं. मुझे चलवाकर देखा गया. उन्‍हें मैं पसंद आ गई. बात पक्‍की हो गई. शादी में छह महीने का वक्‍त था तो वे मुझसे इतने दिनों तक खूब बातें करती रहीं. उन सबका हफ्ते में कई कई बार फोन आता था.


10 दिसंबर 2015 को मेरी शादी हुई. 11 को मैं ससुराल गई. 12 को मेरा रिसेप्‍शन था. जब मेरे मायके से  लोग रिसेप्‍शन में गए और उन्‍होंने पूछा कि कैसी है बहू तो मेरी सास बोलीं कि इसकी टोन अच्‍छी नहीं है. ससुराल वालों के चेहरे लटके हुए थे. मैं ससुराल में दो दिन भी नहीं रह पाई कि 14 दिसंबर को मेरे प‍ति अमिताभ कंवल मास्‍को चले गए. उसी दिन से मेरे ससुराल वालों ने मेरा उत्‍पीडन शुरू कर दिया. परेशान होकर 21 जनवरी को मैं अपने मायके आ गई.

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करीब 5 महीने बाद 12 मई को मेरे पति मेरे देवर के साथ मुझे लेने मेरे मायके आए. उसी दिन मुझे पटना पहुंचाकर 13 मई को वे फिर मास्‍को चले गए. ये सब देखकर मैं हैरान थी. मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि ये हो क्‍या रहा है. अमिताभ के जाते ही फिर मेरे सास-ससुर ने मुझे प्रताड़‍ित करना शुरू कर दिया. मुझसे बोले पति नहीं है यहां क्‍यों रह रही हो, चली जाओ. जब वापस अा जाए तो आ जाना. दुखी होकर 12 जून को मैं फिर मायके चली आई.

26 जून के बाद ससुराल में किसी ने भी मेरा फोन उठाना बंद कर दिया. मैंने पापा को पूरी कहानी बताई तो उन्‍होंने ससुर से बात की. मई 2017 तक ऐसे ही हालात रहे और ए‍क दिन उन्‍होंने कह दिया- आपकी बेटी डायन है. ये तंत्र मंत्र खेलती है. इसे हम अपने घर में नहीं रख सकते. ये हम सबको मार डालेगी. इसके हाथ का बना खाना खा के सब मर जाएंगे.


24 जून 2017 को मैं पिता के साथ पटना ससुराल आ गई. सामाजिक दवाब में सास-ससुर ने मुझे रख तो लिया पर जिंदगी जानवरों से भी बदतर कर दी. अब यहां दो तांत्रिक आती हैं. वे मुझे गोबर खिलाते हैं, राख झाड़ते हैं. मेरे खाने-पीने के बर्तन अलग हैं. मैं साल भर से रसोई में नहीं घुसी. कहते हैं मेरे ऊपर प्रेत हैं. मेरे पति भी मुझे नहर में काटकर डालने की धमकी दे चुके हैं. पर मैं कहां जाऊं........

मेट्रीमोनियल साइट पर झूठ बोलकर की थी शादी फिर दिया धोखा....
- रितु शर्मा, हिमाचल प्रदेश

प्रतीकात्मक तस्वीर.


मैं एमएससी बायोकैमिस्‍ट्री कर रही थी, तभी मेट्रीमोनियल साइट पर संजय सिंह ने मुझे अप्रोच किया. उन्‍होंने बताया कि वे अटलांटा पुलिस में हैं. उनके सभी रिश्‍तेदार भी यूएस और कई अन्‍य देशों में रहते हैं. हालांकि वे रहने वाले दिल्‍ली के थे. कुछ दिन हमारी बातचीत हुई फिर शादी के लिए बात आगे बढ़ी. उनकी तरफ से कहा गया कि वे मुझे शादी के बाद यूएस ले जाएंगे.

हमने 9 अप्रैल 2013 को कोर्ट मैरिज कर ली. उसके बाद पापा ने 6 मई 2013 को हमारी पारंपरिक तरीके से शादी कराई. करीब 10 दिन मैं और मेरे पति साथ रहे. फिर वीजा कराने की बात कहकर वे यूएस चले गए. तभी हमें पता चला कि संजय सिंह अटलांटा पुलिस में नहीं हैं बल्कि बेरोजगार हैं. उन्‍होंने झूठ बोलकर शादी की. फिर पता चला कि उनके मामा दिल्‍ली के साकेत में ही रहते हैं. मासी उत्‍तम नगर में और अन्‍य रिश्‍तेदार भी यहां भारत में ही रहते हैं.

मैं अपने मायके में ही रही और वीजा के लिए कोशिशें करती रही लेकिन अप्रैल 2014 में जब वीजा की सभी औपचारिकताएं पूरी हो गई और उनके स्‍पॉन्‍सर करने का वक्‍त आया तो पति और उनकी मां ने शर्त रख दी. वे बोले कि भारत आने जाने में काफी खर्च पड़ता है इसलिए घरवालों से 15 लाख रुपये ले लो. मैंने इसका विरोध किया कि शादी से पहले तो ऐसी कोई बात नहीं थी. जब हमने मना कर दिया तो उन्‍होंने वीजा कराने से मना कर दिया अौर बात बढ़ती गई.


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22 अक्‍तूबर 2014 को वे फिर भारत आए. मुझसे और परिवार से मिले. अपने किसी रिश्‍तेदार के पास रुके. तब हमने वीजा की बात की लेकिन वे धोखा देकर निकल गए. इससे भी ज्‍यादा खराब हालात तब हुए जब उन्‍होंने मेरे पापा के खिलाफ पालमपुर पुलिस स्‍टेशन में और उनकी यूनिवर्सिटी में शिकायत कर दी कि ये अपनी बेटी को ले जाने के लिए दवाब बना रहे हैं. इसके बाद हालात बिगड़ गए, मैं अवसाद की स्थिति में पहुंच गई.

मैंने भी पुलिस में कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की पर नहीं हो सकी. फिर मैंने एक एनजीओ जागोरी से मदद मांगी तब जाकर तीन महीने बाद मेरी पुलिस ने शिकायत दर्ज की. अब 3 साल हो गए मेरा केस चल रहा है. मानसिक तनाव रहता है पर जिंदगी जीने की कोशिश कर रही हूं.

सास ससुर की देखभाल के लिए की मुझसे शादी की फिर अमेरिका में की लव मैरिज 
- बिन्‍दू, आंध्र प्रदेश

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पापा ने मेरे लिए तेलंगाना में लड़का देखा. चूंकि वह दूर के रिश्‍ते में था तो हमें लगा कि सब ठीक ही होगा. पूरी तरह अरेंज मैरिज थी, हालांकि मैं तैयार थी इसके लिए. हमारी शादी 2015 में हो गई. जब मैं ससुराल पहुंची तो लड़के ने कहा कि अभी सास ससुर के पास रहो कुछ दिन में वह वीजा बनवाकर भेज देगा. उसके बाद मेरा पति सुंदर माणिपल्‍ली यूएसए चला गया.

कुछ दिन में मुझे सुनने में आया कि मुझसे शादी के बाद लड़के ने अमेरिका में भी लव मैरिज कर ली है. हालांकि मेरे पास कोई सबूत नहीं था तो मैं कुछ कह नहीं सकती थी. हालांकि एक बार यूएसएस जाने के बाद मणिपल्‍ली कभी वापस नहीं आया.


जब मैंने यूएसए जाने के लिए सास और ससुर से बात की तो उन्‍होंने कहा कि अपने मायके से प्रॉपर्टी के कागजात ले आओ. कुछ और पैसा लाना पड़ेगा तब ही जा पाओगी. जब मैंने मना किया तो उन्‍होंने मुझे गालियां देना शुरू कर दिया. मुझसे कहा गया कि मैं घर में नौकरानी हूं और वहीं काम करूं.

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सास-ससुर मेरे साथ बेहद खराब व्‍यवहार करते थे. मैं मानसिक रूप से इतनी परेशान हो गई कि मैंने अलग रहने का फैसला कर लिया और इनके खिलाफ शिकायत कर दी. इसके बाद मेरे प‍ति वापस आए और सास-ससुर ने कहा कि अब सब ठीक हो जाएगा मैं केस वापस ले लूं तो मैंने उनकी बात मान ली. 10 दिन बाद सुंदर वापस यूएसए चले गए. फिर हमारे आंध्र प्रदेश में एक रस्‍म है तो मैं मायके आ गई.

अक्‍तूबर 2015 में जब मैं मायके से ससुराल गई तो सास-ससुर ने घर में घुसने से मना कर दिया और बोले कि अतिरिक्‍त पैसा दोगे तभी बेटा भी बात करेगा वरना ले जाओ अपनी लड़की को. हमारे पास पैसा नहीं था तो मुझे वापस आना पड़ा. तब से ससुराल के लोगों से मेरी कोई बात नहीं हुई. मेरी तरफ से मेंटीनेंस का हुआ तो ससुर ने तलाक का केस डाल दिया और पति के बजाय ससुर उस केस की पैरवी कर रहे थे.

हालांकि कोर्ट ने ससुराल वालों की वो याचिका भी खारिज कर दी. तब से अब तक कोर्ट की सुनवाइयां चल रही हैं. न्‍याय की आस बंधी है.

Tags: Ministry of External Affairs, Ministry of Women and Child Development, NRI Bahrain

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