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NRI को मिल सकती है पोस्टल बैलट की सुविधा, चुनाव आयोग ने सरकार को भेजा प्रस्ताव

अभी एनआरआई को अपने मतदान केंद्र पर ही मतदान करने की सुविधा है. (ANI)
अभी एनआरआई को अपने मतदान केंद्र पर ही मतदान करने की सुविधा है. (ANI)

विदेशों में एक करोड़ 30 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं. अनुमान के मुताबिक, इनमें 60% से अधिक मतदाता हैं. अगर चुनाव आयोग (Election Commission) के प्रस्ताव को सरकार से मंजूरी मिल गई तो ये मतदाता इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट (Postal Ballot) के जरिये आने वाले चुनाव में वोट कर सकेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 11:39 AM IST
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नई दिल्ली. साल 2021 में पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, तमिलनाडु, असम समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2021) होने हैं. चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान हो सके, इसे लेकर भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission) अब विदेशों में रह रहे भारतीयों यानी एनआरआई को पोस्टल बैलट (Postal Ballot) की सुविधा देने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है.

विदेशों में एक करोड़ 30 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं. अनुमान के मुताबिक, इनमें 60% से अधिक मतदाता हैं. अगर चुनाव आयोग के प्रस्ताव को सरकार से मंजूरी मिल गई तो ये मतदाता इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट के जरिये आने वाले चुनाव में वोट कर सकेंगे. चुनाव आयोग के प्रस्ताव को लागू करने के लिए सरकार को अध्यादेश के जरिए चुनाव कराने के नियमों में बदलाव करना होगा.

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पंजाब, गुजरात और केरल की बड़ी आबादी विदेशों में रहती है. एक बार ये फैसला लागू होने से कुछ राज्यों में एनआरआई वोटर्स नतीजे प्रभावित करने की भूमिका में आ जाएंगे. अगर प्रस्ताव पास हो गया तो सरकार की अनुमति के बिना एनआरआई को विदेश से ही वोट देने की सुविधा मिलेगी. अभी एनआरआई को अपने मतदान केंद्र पर ही मतदान करने की सुविधा है.
क्या है पोस्टल बैलेट?
Postal ballot एक डाक मत पत्र होता है. यह 1980 के दशक में चलने वाले पेपर्स बैलेट पेपर की तरह ही होता है. चुनावों में इसका इस्तेमाल उन लोगों के द्वारा किया जाता है जो कि अपनी नौकरी के कारण अपने चुनाव क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाते हैं. जब ये लोग Postal Ballot की मदद से वोट डालते हैं तो इन्हें Service voters या absentee voters भी कहा जाता है. इसे Electronically Transmitted Postal Ballot System (ETPBS) भी कहा जाता है. मतदाता द्वारा अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देकर इस Postal ballot को डाक या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वापस चुनाव आयोग के सक्षम अधिकारी को लौटा दिया जाता है.

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हुई शुरुआत?
पोस्टल बैलेट की शुरुआत 1877 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसे कई देशों जैसे इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड और यूनाइटेड किंगडम में भी इस्तेमाल किया जाता है. हालाँकि इन देशों में इसके अलग अलग नाम जरूर हैं.

भारत में कब से मिली ये सुविधा?
भारतीय चुनाव आयोग ने चुनाव नियामावली, 1961 के नियम 23 में संशोधन करके इन लोगों को चुनावों में पोस्टल बैलेट या डाक मत पत्र की सहायता से वोट डालने की सुविधा के लिए 21 अक्टूबर 2016 को नोटिफिकेशन जारी किया गया था.

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पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल अभी कौन कर रहे हैं?
>>सीमा पर या ड्यूटी पर तैनात सैनिक
>> चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी
>> देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी
>>प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने वाले लोग (कैदियों को वोट डालने का अधिकार नहीं होता है)
>>80 वर्ष से अधिक की उम्र के वोटर (रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है)
>>दिव्यांग व्यक्ति (रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है)
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