Article-370 हटाने से पहले NSA डोभाल ने पुख्‍ता तैयारी के लिए किया था श्रीनगर का सीक्रेट दौरा

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जब पूरा देश करगिल युद्ध (Kargil War) की 20वीं वर्षगांठ मनाने में व्यस्त था, उसी समय अजित डोभाल (Ajit Doval) ने 23 और 24 जुलाई को श्रीनगर (Srinagar) का सीक्रेट दौरा किया.

News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 6:37 PM IST
Article-370 हटाने से पहले NSA डोभाल ने पुख्‍ता तैयारी के लिए किया था श्रीनगर का सीक्रेट दौरा
एनएसए अजीत डोभाल ने अनुच्‍छेद-370 हटाने के फैसले से पहले श्रीनगर के सरक्रेट दौरे में राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक से मुलाकात भी की.
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Updated: August 7, 2019, 6:37 PM IST
जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu Kashmir) को विशेष राज्‍य का दर्जा देने वाला अनुच्‍छेद-370 (Article 370) अब इतिहास बन चुका है. राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल (Ajit Doval) ने असंभव से दिखने वाले इस फैसले से पहले जबरदस्‍त तैयारी की थी. इसके लिए उन्‍होंने 23 और 24 जुलाई को श्रीनगर का सीक्रेट दौरा किया. उन्‍होंने योजना को सफल बनाने के लिए सेना, वायुसेना, एनटीआरओ, आईबी, रॉ, अर्द्धसैनिक बलों और राज्य की नौकरशाही के साथ सामंजस्य बनाया.

पहले ही किया गया बाद के हालात का आकलन और निपटने की तैयारी
दिल्ली से आदेश मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी अनुच्छेद-370 (Article 370) हटने के बाद के हालात से निपटने की तैयारी में जुट गए. केंद्र सरकार ने भी जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों और सुरक्षाबलों के साथ मिलकर आकलन किया कि फैसला लागू होने के बाद होने वाली किसी अनहोनी से कैसे निपटा जाएगा. लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections 2019) से पहले ही अनुच्छेद-370 हटाने की योजना सियासी गलियारों की शीर्ष हस्तियों के बीच आ चुकी थी. इस मुद्दे पर असल काम जून, 2019 के दूसरे सप्ताह में शुरू हुआ. अपने वायदे के मुताबिक लोकसभा चुनाव के बाद पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने वाली बीजेपी (BJP) इस योजना को अमलीजामा पहनाना चाहती थी.

कश्‍मीर दौरे में अमित शाह ने नौकरशाहों और सेना के अफसरों से की बात

जून के दूसरे सप्ताह में अमित शाह कश्मीर दौरे पर गए. इस दौरान उन्‍होंने वरिष्‍ठ नौकरशाहों और सेना के अधिकारियों से बातचीत की. सूबे के जमीनी हालात का जायजा लेकर अमित शाह (Amit Shah) दिल्ली लौट आए. मोदी सरकार के आदेश के बाद सरकारी अधिकारी तैयारियों में जुट गए. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जब पूरा देश करगिल युद्ध की 20वीं वर्षगांठ मनाने में व्यस्त था, उसी समय डोभाल ने 23 और 24 जुलाई को श्रीनगर का सीक्रेट दौरा किया. इस योजना को सफल बनाने के लिए डोभाल तब तक सेना, वायुसेना, एनटीआरओ, आईबी, रॉ, अर्द्धसैनिक बलों और राज्य की नौकरशही के साथ सामंजस्य बना चुके थे.

अमित शाह ने सेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख से सीधे बात की. उन्हें सेनाओं को तैनात करने का आदेश दिया. साथ ही उन्हें ट्रांसपोर्ट सुविधा तैयार रखने को कहा.


पाकिस्‍तान की हर हरकत पर रखी निगाह, जवाब देने के लिए की तैयारी
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योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए पाकिस्तान की तरफ से सतर्क रहना जरूरी था. डोभाल ने ड्रोन की मदद से सीमा, नियंत्रण रेखा और पाक अधिकृत कश्‍मीर पर लगातार निगरानी करवाई. आतंकवादियों और अलगाववादियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए 20 ड्रोन के लाइव फुटेज की मदद ली गई. ये ड्रोन LoC और अमरनाथ यात्रा रूट की निगरानी कर रहे थे. वायुसेना को बिना कारण बताए कहा गया कि देश के अलग-अलग ठिकानों से अर्द्धसैनिक बलों के मूवमेंट के लिए 10 सी-17 और 6 सी-130जे विमान मुहैया कराए. शाह ने पिछले सप्ताह सेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख से सीधे बात की. उन्हें सेनाओं को तैनात करने का आदेश दिया. साथ ही उन्हें ट्रांसपोर्ट सुविधा तैयार रखने को कहा गया.

पुलिस और सेना से इकट्ठे करवाए गए 2000 सेटेलाइट फोन
पुलिस और सेना को सभी सेटेलाइट फोन इकट्ठे करने को कहा गया. आखिरकार 2000 सेटेलाइट फोन को सेना के अफसरों और राज्य सरकार के अफसरों के बीच बांटा गया ताकि इस फैसले को लागू करने के बाद जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जाए. घाटी में करीब 45 हजार जवान तैनात किए गए. इस पूरी कवायद के दौरान एनएसए और उनकी टीम ने पूरी गोपनीयता बनाए रखी. मीडिया और लोगों को सिर्फ इतना पता चला कि कश्मीर में सुरक्षाबलों की बड़ी संख्या में तैनाती हो रही है. इस दौरान इजरायली ड्रोंस को भी पीर पंजाल रेंज में भेजा गया ताकि भीड़ को काबू करने में इसका इस्तेमाल किया जा सके.

सुखोई और मिराज-2000 लडाकू विमानों ने भरीं दर्जनों उड़ानें
श्रीनगर एयरपोर्ट से सुखोई और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने दर्जनों उड़ानें भरीं. डोभाल ने काउंटर टेररिज्म ग्रिड के अधिकारियों के साथ बैठक कर योजना पर चर्चा की ताकि योजना लागू करने के बाद आतंकी हमलों की सूरत में जवाब देने के लिए तैयार रहा जाए. इस बीच सरकार ने सेना को एलओसी के पास मौजूद आतंकी कैंपों पर जोरदार कार्रवाई की अनुमति दे दी. सेना ने पाक फायरिंग का जवाब देने के लिए बोफोर्स तोप का इस्तेमाल किया.

अमरनाथ यात्रा में कटौती के साथ ही लिए कई अहम फैसले
जम्मू-कश्मीर में NSA की मीटिंग के दौरान ही अमरनाथ यात्रा में कटौती का फैसला लिया गया. इसी बैठक में एनएसए ने सुझाव दिया कि जम्मू-कश्मीर से सभी सैलानियों को बाहर निकलने को कहा जाए. इस बैठक में अर्द्धसैनिक बलों की 100 और कंपनियों को जम्‍मू-कश्‍मीर में तैनात करने का फैसला लिया गया. इसका इस्तेमाल बैक-अप के रूप में करने पर सहमति बनी. सेना प्रमुख योजना को लागू करने के बाद सुरक्षा संबंधी चिंता पैदा करने वाली हर जगह गए.

तैयारी पूरी होने के बाद पूरे मिशन को गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हाथ में ले लिया. उन्‍होंने राज्‍यसभ में बिल पेश किया और उसके बाद अनुच्‍छेद-370 इतिहास हो गया.


तैयारी पूरी होने के बाद अमित शाह ने संभाली मिशन की कमान
तैयारी पूरी होने के बाद पूरे मिशन को गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हाथ में ले लिया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद एक कोर टीम के साथ इस फैसले से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर रहे थे. कोर टीम में कानून व न्याय सचिव आलोक श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव लॉ (होम) आरएस वर्मा, एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, गृह सचिव राजीब गौबा और कश्मीर पर उनकी टीम के लोग शामिल थे. सेना प्रमुख, खुफिया एजेंसियों के प्रमुख और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के प्रमुख भी 24 घंटे गृह सचिव व जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव के साथ संपर्क में थे.

जम्‍मू-कश्‍मीर में उठाए गए कई सख्‍त और एहतियाती कदम
मुख्य सचिव ने 4 अगस्त की रात जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह को कई एहतियाती कदम उठाने को कहा. इसमें कश्मीरी नेताओं की नजरबंदी, गिरफ्तारी, मोबाइल सेवाओं को बंद करना, लैंडलाइन टेलीफोन सेवाएं खत्म करना, धारा-144 लागू करना और कर्फ्यू लागू करने के लिए ड्रिल करना शामिल था. रविवार को फैसला लिया गया कि सोमवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक होगी और इस मिशन की जानकारी मंत्रिमंडल के सदस्यों को देकर प्रस्ताव पास किया जाएगा. कानून मंत्रालय को जिम्मा दिया गया कि अनुच्छेद-370 को खत्म करने से जुड़ी अधिसूचना राष्ट्रपति भवन की ओर से ठीक समय पर जारी की जा सके. अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में जब बिल पेश किया तो एक बीजेपी सांसद ने प्रतिक्रिया दी, "शाह का मिशन कभी फेल नहीं होता."

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First published: August 7, 2019, 5:30 PM IST
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