Home /News /nation /

nw18hindioriginals hyderabad journo quits job to feed orphans twice a week

मिलिए हैदराबाद के इस पत्रकार से, यह नौकरी छोड़ अनाथ बच्चों के लिए बनाते हैं मुफ़्त खाना.

एक बार 500 लोगों का खाना भी  अकेले बनाया था.

एक बार 500 लोगों का खाना भी अकेले बनाया था.

खुद गुज़रे थे आर्थिक संकट से और आज करीबन 200 अनाथ बच्चों को खिलाते हैं मुफ़्त खाना. पिछले 5 सालों से खिला रहे हैं खाना और यू ट्यूब पर भी डालते हैं बल्क कुकिंग के वीडियोज़.

अगर आप खाने के शौकीन हैं तो यकीनन आप ‘नवाब किचन’ से तो वाकिफ़ होंगे ही. यह हैं  हैदराबाद के वह  मशहूर ‘कंटेन्ट क्रीऐटर’ जिन्होंने ना सिर्फ अपने कंटेन्ट से लोगों का दिल जीता  है बल्कि अपनी नेक मुहिम से लाखों अनाथ बच्चों के चेहरों पर मुस्कान भी लायी है.

नवाब किचन का चेहरा माने जाने वाले खाजा मोइनुद्दीन ने न्यूज 18 से बातचीत के दौरान विस्तार से बात की अपने इस सफ़र के बारे में.  पेशे से पत्रकार  खाजा मोइनुद्दीन  ने अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीबन आठ साल तक एक तेलुगू न्यूज चैनल में बतौर प्रोग्राम डायरेक्टर काम किया है.

हैदराबाद, पत्रकार

नवाब किचन की शुरुआत उन्होंने अपनी नौकरी के साथ ही की थी. दरअसल, वह बताते हैं कि उनके विवाह के शुरुआती दिनों में उन्हें वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा था. उनके वैवाहिक जीवन के शुरुआती पांच से सात साल तो  वित्तीय संकट में ही गुज़रे. वह कहते हैं कि इसी दौरान उन्हें पैसों की असली कीमत मालूम हुई और उसी दौरान ही उन्हें  एक भूखे व्यक्ति के लिए खाने के क्या मायने होते हैं इसका एहसास हुआ.

नवाब किचन ने आज जिस नेक काम का बीड़ा उठाया है उसके पीछे की असली वजह उनके खुदके जीवन का संघर्ष रहा है.

वह बताते हैं कि भले ही वह नवाब किचन का चेहरा हैं लेकिन उनके दो मित्र श्रीनाथ रेड्डी और भगत रेड्डी भी हर एक यू ट्यूब वीडियो के लिए उतनी ही मेहनत करते हैं. भगत नवाब किचन के यू ट्यूब वीडियो के लिए कैमरा का काम संभालते हैं. उनके चैनल के सारे वीडियोज़ भगत ही शूट करते हैं और इसके साथ ही पोस्ट प्रोडक्शन का सारा काम भी वह अकेले ही संभालते हैं. वहीं श्रीनाथ वीडियोज़ के प्रमोशन और उनके लिए स्पान्सर लाने का काम संभालते हैं.

2017 में शुरू किए गए इस चैनल की इस सितंबर में पांचवी वर्षगांठ है. नवाब किचन के यू ट्यूब चैनल पर अब तक कुल साढ़े छह सौ वीडियोज़ हैं.

मोइनुद्दीन के मुताबिक कोरोना से पहले तक वह लोग हफ्ते में तीन बार खाना बनाते थे पर कोरोना के बाद से अब केवल हफ्ते में दो ही बार खाना बना पा रहे हैं. हालांकि पिछले कुछ महीनों से वह फिरसे हफ्ते में तीन बार खाना बनाने के बारे में विचार कर रहे थे पर मानसून को मद्देनज़र रखते हुए उन्होंने  फ़िलहाल अपनी  इस योजना को स्थगित कर दिया है.

हैदराबाद,पत्रकार, अनाथ बच्चे

 जानिए कैसे शुरुआत हुई नवाब किचन की?

मोइनुद्दीन बताते हैं कि वह उनके मित्र श्रीनाथ और भगत के साथ मिलकर एक यू ट्यूब चैनल खोलने के बारे में विचार कर रहे थे. इस चर्चा के दौरान इन तीनों ने यह निर्णय लिया कि यह लोग ‘बल्क कुकिंग’ के वीडियोज़ बनाएंगे. तभी मोइनुद्दीन से सोचा कि वह लोग इतना सारा खाना तो बनाएंगे पर किसी भी हालत में यह खाना बर्बाद नही होना चाहिए और तभी उन लोगों ने विचार किया कि क्यों ना इस खाने को अनाथ बच्चों में वितरित किया जाए.

पहले वह खाने को पैक करके लोगों में वितरित करते थे पर फिर उन्हें लगा की अपने हाथों से लोगों को खाना  खिलाने में जो सुख प्राप्ति है वह पैक करके देने में नहीं  है. इसलिए अब वह अपने हाथों से सभी बच्चों को खाना परोसते हैं.

इस प्रकार एक यू ट्यूब चैनल बनाने की योजना से शुरुआत हुई इस नेक अभियान की जिससे आज कई लोग जुड़े हैं.

कैसे की फंड की व्यवस्था?

वह कहते हैं कि इन तीनों ने अपने निजी बचत के पैसों से इस चैनल की शुरुआत की. इन लोगों ने तीस -तीस हज़ार रुपए का अंशदान किया था और फिर इस जमा हुई धनराशि से उन्होंने शुरुआत की बल्क कुकिंग की. शुरुआती वीडियोज़ में वह साठ से सत्तर लोगों का खाना बनाते थे जिसका प्रतिदिन खर्च सात से आठ हज़ार रुपए आता था.

उनकी जमा की गई धनराशि से उन्होंने छह वीडियोज़ बनाए पर जब सातवें वीडियो की बारी आई तो उनके पास मात्र चार हज़ार रुपए ही बचे थे. अपर्याप्त धनराशि होने के कारण उन्होंने अपने वीडियोज़ के माध्यम से ही लोगों से मदद की अपील की.
राजस्थान के रहने वाले एक व्यक्ति ने की थी पहली मदद

वह कहते हैं कि उन्हें आज भी स्पष्ट याद है कि उनकी अपील के बाद उन्हें पहला ईमेल राजस्थान से आया था. उस व्यक्ति ने एक हज़ार रुपए की मदद की थी. वह आगे बताते हैं कि “हमारे चार हज़ार और उनके दिए हुए हज़ार रुपए से हमने अपना सातवां वीडियो शूट किया. उस व्यक्ति का आभार व्यक्त करने के लिए हमने उस वीडियो की शुरुआत में उनके बेटे की एक तस्वीर भी लगाई थी. हालांकि उन्होंने इसके लिए यह कहते हुए इन्कार कर दिया था कि उन्होंने बस एक नेक काम में अपना योगदान दिया है. पर हम उनका उदाहरण देकर अपने बाकी दर्शकों को भी प्रेरित करना चाहते थे।”

खुले आसमान के नीचे बनाते हैं सारा खाना

नवाब किचन के सारे वीडियोज़ खुले आसमान के नीचे ही शूट किए गए हैं. मोइनुद्दीन सारा खाना खुले में ही बनाते हैं. इस कार्य के लिए पहले चार सालों तक एक राजनेता का फार्महाउस निशुल्क में उपलब्ध था.  पर पिछले एक साल से अब उन्हें हर दिन का एक हज़ार रुपए किराया देना पड़ता है. हफ्ते में दो बार खाना बनाने के लिए उन्हें हर हफ्ते दो हज़ार तो केवल किराया देना पड़ता है.

हैदराबाद, पत्रकार, अनाथ बच्चे बनाते हैं डेढ़ सौ से दो सौ लोगों का खाना

    नवाब किचन में हर बार डेढ़ सौ से दो सौ लोगों का खाना बनता है.  हर दिन इतने लोगों का खाना बनाने का खर्च करीबन 20 हज़ार रुपए आता है. पिछले पांच वर्षों से अब तक नवाब किचन में अधिकतम पांच सौ लोगों का खाना बना है.

वह कहते हैं कि पहले वह सारा काम अकेले ही करते थे पर अब उनके पास पांच-छह सहायक भी हैं. उनके सहायक सफ़ाई और खाना बनाने की तैयारी में उनकी मदद करते हैं पर अभी भी सारा खाना वह खुद ही बनाते हैं.

यू ट्यूब की कमाई से होता है गुज़ारा

मोइनुद्दीन कहते हैं कि उनके यू ट्यूब वीडियोज़ से जो भी कमाई होती है उसका तीनों दोस्तों में समान विभाजन होता है. और इसी आमदनी से उन तीनों का गुज़ारा होता है.

शुरुआत के पहले दो- तीन महीनों में ही नवाब किचन के वीडियो काफ़ी वाइरल हुए थे और यू ट्यूब के माध्यम से उनकी अच्छी खासी कमाई भी होती थी.  पर उनके मुताबिक पिछले कुछ वक्त से उनके यू ट्यूब चैनल पर काफ़ी कम व्यू आ रहे हैं, इस वजह से उनकी आय भी बहुत कम हो गई है.

व्यू और आय में गिरावट के बावजूद वह कहते हैं कि वह हमेशा इस काम को जारी रखना चाहते हैं क्योंकि इस नेक काम से उन्हें काफ़ी सुकून और खुशी मिलती है.

भविष्य की योजना

 भविष्य की योजना के बारे में पूछने पर वह कहते हैं कि उनका बचपन से एक स्कूल खोलने का सपना है.  वह यह स्कूल गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए खोलना चाहते हैं जिससे उन्हें गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त हो सके.

Tags: News18 Hindi Originals

अगली ख़बर