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दादी की रसोईः सिर्फ 5 रुपए में देसी घी से बना खाना खिलाने वाले अनूप खन्ना की कहानी

दादी की रसोईः सिर्फ 5 रुपए में देसी घी से बना खाना खिलाने वाले अनूप खन्ना की कहानी

सिर्फ 5 रुपए में देसी घी से बना खाना खिलाते हैं.

सिर्फ 5 रुपए में देसी घी से बना खाना खिलाते हैं.

नोएडा में दादी की रसोई के दो स्टॉल लगाते हैं अनूप खन्ना. जिसमें 5 रु में खिलाते हैं देसी घी से बना खाना. 7 सालों से जरूरतमंदों को रोटी, कपड़ा और दवाई की पूर्ति कर रहे हैं.

हमने और आपने कई जगहों पर कुछ लोगों को औरों की सेवा करते देखा है. लेकिन आज हम आपको जिनकी कहानी बताने जा रहे हैं. वह न तो किसी धार्मिक संगठन के व्यक्ति हैं न ही कोई संस्थान. वह अकेले ही रोज़ाना कई लोगों को खाना खिलाते हैं. वन मैन आर्मी हैं नोएडा के अनूप खन्ना.

गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए और मां की इच्छा के लिए अनूप खन्ना ने ‘दादी की रसोई’ की शुरुआत की. यहां वह लोगों को 5 रु. में देसी घी से बना खाना खिलाते हैं. लेकिन क्या सिर्फ इन 5 रु. से ‘दादी की रसोई’ रोज चल जाती है. या सिर्फ 10 रूपए में कपड़े देकर ‘सद्भावना स्टोर’ को चलाया जाता है. कैसे 500 लोगों को हर दिन खाना खिला पाते हैं अनूप खन्ना…? इन सब सवालों के जवाब और उनकी शुरूआत करने से लेकर 7 सालों के सफर की कहानी जानने के लिए हमने बात की ‘दादी की रसोई’ चलाने वाले अनूप खन्ना से…

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शुरुआत में सिर्फ दाल-चावल और अचार खिलाते थे.

कैसे हुई ‘दादी की रसोई’ की शुरुआत 

मेरी लाइफ का मोटो है कि “छोटे कदम हमारे समाज में बड़े बदलाव लाते हैं.”

अनूप खन्ना बताते हैं कि “मैं 1984 से नोएडा में रह रहा हूं. मैं एक बिजनेसपर्सन हूं. मेरी दो फार्मेसी की दुकानें हैं. मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूं. मेरे पिताजी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे थे. उन्होंने मुझे हमेशा लोगों की भलाई करने के लिए प्रेरित किया. मेरी लाइफ का मोटो है कि छोटे कदम हमारे समाज में बड़े बदलाव लाते हैं.” मेरी मां की इच्छा थी कि गरीबों को खाना दिया जाए. बच्चों ने भी इसके लिए मुझसे कहा. मेरा मानना है कि किसी भी आदमी की बुनियादी जरूरत होती हैं रोटी, कपड़ा और दवाई. मुझे इन तीनों चीजों को गरीबों को आसानी से मुहैया कराना था. जिसके चलते एक छोटे से कदम के रूप में मैंने 21 अगस्त 2015 को ‘दादी की रसोई’ शुरू की.

‘दादी की रसोई’ में हम 5 रु में खाना खिलाते हैं. खाना देसी घी में बनाया जाता है. वे बताते हैं कि शुरुआत तो दाल-चावल और अचार से की थी. लेकिन अब मेनू में दाल चावल से लेकर और भी कई सब्जियां जैसे राजमा, खिचड़ी भी खिलाते हैं. जिससे लोग मजे से खाना खा सकें. इसमें मजदूर, कर्मचारी, स्टूडेंट हर तबके के लोग खाना खाने आते हैं. हम हर दिन लगभग 500 से अधिक लोगों को खाना खिलाते हैं.

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अनूप खन्ना हर दिन 500 से ज्यादा लोगों को खाना खिलाते हैं.

कितने में की शुरूआत और रोजाना कितना खर्च 

अनूप खन्ना बताते हैं कि ‘दादी की रसोई’ की शुरुआत लगभग 3 हजार रु की लागत से की थी. नोएडा में ऐसे 2 स्टॉल चल रहे हैं. एक सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे सेक्टर 17 में और दोपहर 12:30 बजे से 2:00 बजे तक सेक्टर 29 में चलाते हैं. रोज स्टॉल पर खाना बनाने के लिए और बाकी चीजों के लिए लगभग ₹3000 से 3500 तक का खर्च आता है.

आपने मजरूह सुल्तानपुरी का ये शेर तो सुना ही होगा – “हम अकेले ही चले थे जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया.”

बहुत से लोग अपनी मर्जी से ज्यादा पैसे दान करके भी जाते हैं. जब धीरे-धीरे लोगों को पता चला कि मैं ‘दादी की रसोई’ चला कर लोगों को 5 रु. में खाना खिला रहा हूं तो मुझे किराने की दुकान वाले ने भी कम दामों पर सामान देना शुरू कर दिया. इसके साथ ही जन्मदिन, शादी की सालगिरह जैसे कार्यक्रमों पर खाना दे जाते हैं. जो हमारे जरिए लोगों तक पहुंच सके.

आखिर 5 रु क्यों लेते हैं  

वे बताते हैं कि ” खाना और कपड़े तो मैं मुफ्त में दे सकता था, पर 5 रु और 10 रु लेने की वजह यह है की यहां भोजन करने वालों का स्वाभिमान बना रहे. हर तबके का आदमी 5 रु देकर सम्मान से खाना खाता है.”

रोटी के बाद कपड़े और दवाई की जरूरत कैसे पूरी करते हैं 

‘दादी की रसोई’ की तर्ज पर ही उन्होंने ‘सद्भावना स्टोर’ शुरू किया है. ‘सद्भावना स्टोर’ के जरिए जरूरतमंद लोगों को सिर्फ ₹10 में कपड़े मिल सकते हैं. इसके साथ ही यहां जूते, किताबें और दूसरी उपयोग की चीजें देते हैं. इस स्टोर से गरीब व्यक्ति खरीदारी कर सकते हैं. मेरे इस छोटे से प्रयास को लोगों ने खूब सराहा और इसमें मेरा साथ देने के लिए आगे भी आए हैं. इस काम में भी लोग मेरी मदद करते हैं.

वह बताते हैं कि मैं नोएडा में दो फार्मेसी की दुकानें चलाता हूं. हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री ‘जन औषधि योजना’ में एनरोल होकर नोएडा में पहला ‘प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र’ खोला है. इसमें सस्ती कीमतों पर बढ़िया क्वालिटी की दवाएं मिल जाती हैं. जिससे की सभी लोगों को महंगाई को दौर में सस्ती दवाएं उपलब्ध हो जाती हैं.

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दादी की रसोई के साथ ही सद्भावना स्टोर भी चलाते हैं.

अनूप खन्ना पर बन रही बायोपिक में इतने बड़े अभिनेता  

अनूप खन्ना को इस काम के चलते अब तक कई बार सम्मानित किया जा चुका है. साल 2019 में दिल्ली में ‘लग्जरी बॉक्स एंड एक्सक्लूसिव अवार्ड’ में फिल्म एक्ट्रेस सारा खान ने पुरस्कृत किया था. उन्हें साल 2020 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित किया गया था. उन्हें ‘पर्ल्स इंडिया’ द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें साल 2021 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के कर्मवीर के स्पेशल एपिसोड में भी बुलाया गया था. इसके साथ ही ‘दादी की रसोई’ के संचालक अनूप खन्ना पर बायोपिक भी बन रही है. जिसमें अनूप खन्ना का किरदार जाने-माने अभिनेता शक्ति कपूर द्वारा निभाया जा रहा है. इसके साथ ही इस फिल्म में अनुराधा कालिया, ऋषभ राज सचदेवा जैसे कलाकार रोल निभाएंगे. इस फिल्म का टाइटल भी ‘दादी की रसोई’ रखा गया है.

लोगों को देते हैं यह संदेश 

वह कहते हैं कि जिंदगी जीने के सिर्फ दो ही तरीके होते हैं. एक तो ये कि जो हो रहा है उसे अंधे, बहरे, गूंगे बनकर देखते रहो. उसे बर्दाश्त करते जाओ या फिर जिम्मेदारी उठाओ और उसे बदल डालने की कोशिश करो. वह चाहते हैं कि  ‘दादी की रसोई’ जैसा कंसेप्ट बढ़ता रहे. पूरे देश में ऐसे अलग-अलग ब्रांचेस हों जिससे की कभी कोई भूखा न रहे. यह जो विचार है लोग इस से प्रेरित होते हैं मुझे अच्छा लगता है. यह विचार ऐसे ही आगे बढ़ते रहना चाहिए जिससे देश में भुखमरी जैसी समस्या खत्म हो जाए.

Tags: News18 Hindi Originals

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