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हिंदू-मुस्लिम तनाव रोकने के लिए पंचायत ने लिया यह फैसला, पर क्‍या ये सही था?

हिंदू-मुस्लिम तनाव रोकने के लिए पंचायत ने लिया यह फैसला, पर क्‍या ये सही था?

इसी सूझबूझ की वजह से ही मेवात में कभी दंगा नहीं होने पाया है.

    मेवात के एक लड़के ने मुस्‍लिम धर्म के खिलाफ फेसबुक पर आपत्‍तिजनक पोस्‍ट डाल दी, जिसके बाद तनाव बढ़ने लगा. पोस्‍ट ऐसी थी कि दंगा भी हो सकता था.

    तभी दोनों धर्मों की संयुक्‍त पंचायत ने कानून अपने हाथ में लेकर लड़के को 11 जूते मारने, 21 हजार रुपए का जुर्माना लगाने और तीन माह के लिए गांव से निकालने का फरमान सुना दिया. इससे मामला शांत हो गया.

    क्‍या मेवात के नगीना कस्‍बे में फैला तनाव और संभावित दंगा रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई की जगह पंचायत का कानून हाथ में लेना ठीक है? सुप्रीम कोर्ट के वकील पद्मश्री बह्मदत्‍त कहते हैं, ‘तनाव और दंगा रोकने के लिए पंचायत की नीयत भले ही ठीक थी, फिर भी ऐसा फैसला देना कानून अपने हाथ में लेना है’.

    वो कहते हैं कि युवक ने निश्‍चित तौर पर गलत किया. इसलिए सबसे पहले उसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवानी चाहिए थी. कानून अपना काम करता. उन्होंने कहा कि जूते मारना तो सरासर गलत है. यह खाप पंचायतों की तरह लिया गया फैसला है.

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    मुस्‍लिमों के खिलाफ पोस्‍ट पर हिंदू ने सुनाया कड़ा फैसला

    नगीना के सरपंच मुस्‍लिम हैं, लेकिन अमन-चैन के लिए आरोपी युवक के खिलाफ फैसला पूर्व सरपंच सुभाष चंद गुप्‍ता ने सुनाया. जिन्‍हें इस फेसबुक पोस्‍ट के बाद 21 सदस्यीय सर्वधर्म कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था. जुर्माने की राशि भी मुस्‍लिमों ने नहीं रखी. उसे मंदिर में दान कर दिया.

    हमें कानून पर पूरा विश्‍वास, पुलिस के पास इसलिए नहीं गए

    गांव के सरपंच नसीम अहमद ने न्‍यूज18 डॉटकॉम से बातचीत में कहा कि हम मेवात का माहौल खराब नहीं करना चाहते थे. हमें कानून पर पूरा विश्‍वास है, लेकिन हम पुलिस के पास इसलिए नहीं गए क्‍योंकि आरोपी युवक ने जेबीटी की हुई है. वो एक निजी स्‍कूल में पढ़ाता है. ऐसे में उसका कॅरियर बर्बाद होता. इसलिए हमारे गांव में रहने वाली सभी सात बिरादरी एकत्र हुई और इसके बुजुर्गों ने यह फैसला लिया.

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    सरपंच ने कहा ‘फेसबुक ने माहौल खराब कर दिया’
    हमने पंचायत शुरू होते ही कह दिया था कि पंचायत को न तो जाति से जोड़ा जाए, न धर्म से, न राजनीति से बल्‍कि इसे सिर्फ बुराई खत्‍म करने की कोशिश के रूप में देखा जाए. अहमद ने कहा कि फेसबुक ने माहौल खराब कर दिया है. कोई कुछ भी पोस्‍ट डाल देता है. इसलिए इसका इस्‍तेमाल करते वक्‍त सावधानी बरतें.

    'इसी सूझबूझ की वजह से मेवात में कभी नहीं हुआ दंगा'

    मेवात के वरिष्‍ठ पत्रकार युनूस अलवी अमन के लिए दिए गए इस फरमान को सही मानते हैं. उनका कहना है कि युवक ने जो पोस्‍ट फेसबुक पर डाली थी उसे मुस्‍लिम समाज कभी बर्दाश्‍त नहीं करता. इसलिए दोनों समाजों ने यह सूझबूझ का फैसला लिया है. इसी तरह के फैसलों की वजह से ही मेवात में कभी दंगा नहीं होने पाया है.

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