तबलीगी जमात पर फैसला देने वाली पीठ के जज बोले- मैं कुछ टिप्णियों से सहमत नहीं

तबलीगी जमात पर फैसला देने वाली पीठ के जज बोले- मैं कुछ टिप्णियों से सहमत नहीं
जस्टिस एम.जी. सेवलीकर ने शुक्रवार को कहा कि वह फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों से असहमत थे. (तबलीगी जमात की प्रतीकात्मक तस्वीर)

न्यायमूर्ति नलावडे (Justice TV Nalawade) और न्यायमूर्ति सेवलीकर (Justice M.G. Sewlikar) की एक खंडपीठ ने इस साल मार्च में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले 29 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को 21 अगस्त को रद्द करने का आदेश दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 10:03 PM IST
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मुंबई. दिल्ली में आयोजित तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के कार्यक्रम में शामिल होने वाले विदेशी नागरिकों (Foreigners) के खिलाफ मामलों को खारिज करने वाली अदालत की पीठ का हिस्सा रहे बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के जस्टिस एम.जी. सेवलीकर ने शुक्रवार को कहा कि वह फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों से असहमत थे. उन्होंने आज चार पन्नों का अपना आदेश जारी किया.

'न्यायमूर्ति टी.वी. नलावडे द्वारा की गई टिप्पणी से सहमत नहीं थे'
उन्होंने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के खिलाफ हुई कार्रवाई के संदर्भ में अपने साथी न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.वी. नलावडे द्वारा की गई टिप्पणी से सहमत नहीं थे.

21 अगस्त को दिया था FIR रद्द करने का आदेश
हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ के न्यायमूर्ति नलावडे और न्यायमूर्ति सेवलीकर की एक खंडपीठ ने इस साल मार्च में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले 29 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को 21 अगस्त को रद्द करने का आदेश दिया था. इन लोगों के खिलाफ कथित तौर पर वीजा शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी. पीठ ने कहा कि आरोपियों को 'बलि का बकरा' बनाया गया और उन पर निराधार आरोप लगाए गए कि वे देश में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के लिये जिम्मेदार हैं.



राज्य सरकार ने 'राजनीतिक बाध्यताओं' के चलते कार्रवाई की
पीठ ने यह भी कहा था कि राज्य सरकार ने 'राजनीतिक बाध्यताओं' के चलते कार्रवाई की और तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए विदेशियों के खिलाफ बड़ा दुष्प्रचार किया गया. अदालत ने कहा था, 'महामारी या विपत्ति आने पर राजनीतिक सरकार बलि का बकरा ढूंढने की कोशिश करती है और हालात बताते हैं कि संभावना है कि इन विदेशी लोगों को बलि का बकरा बनाने के लिए चुना गया था.'

 21 अगस्त को कहा था-FIR रद्द करने के मूल अंश से सहमत नहीं
न्यायमूर्ति सेवलीकर ने हालांकि 21 अगस्त को कहा था कि वह आदेश (प्राथमिकी रद्द करने) के मूल अंश से जहां सहमत हैं वहीं वह न्यायमूर्ति नलावडे की कुछ टिप्पणियों से सहमत नहीं हैं और एक अलग आदेश पारित करेंगे.

जारी किया 4 पन्नों का आदेश
न्यायमूर्ति सेवलीकर ने शुक्रवार को चार पन्नों का आदेश जारी कर कहा कि वह सीएए और एनआरसी के संबंध में न्यायमूर्ति नलावडे द्वारा की गई टिप्पणी से सहमत नहीं हैं. न्यायमूर्ति सेवलीकर ने कहा, 'मैं (सीएए और एनआरसी पर) टिप्पणियों से एकमत नहीं हूं क्योंकि इस संबंध में याचिकाओं में आरोप नहीं लगाए गए हैं और न ही इस संदर्भ में कोई साक्ष्य हैं.' उन्होंने कहा, 'इसलिये, मेरी राय में यह टिप्पणियां याचिका के दायरे से बाहर हैं.'

न्यायमूर्ति नलावडे ने अपने आदेश में कहा था कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ देश भर में मुस्लिम समुदाय द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किये गए क्योंकि उनका मानना था कि मुस्लिम शरणार्थियों और प्रवासियों को नागरिकता नहीं दी जाएगी.
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