हॉस्टल में आदिवासी लड़कियों के गर्भवती होने के मामले पर ओडिशा विधानसभा में हंगामा

कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्रा ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया. उन्होंने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कहा.

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Updated: July 3, 2019, 1:12 PM IST
हॉस्टल में आदिवासी लड़कियों के गर्भवती होने के मामले पर ओडिशा विधानसभा में हंगामा
हॉस्टल में आदिवासी लड़कियों के गर्भवती होने के मामले पर ओडिशा विधानसभा में मंगलवार को हंगामा हुआ. (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: July 3, 2019, 1:12 PM IST
भुवनेश्वर के राज्य सरकार के हॉस्टल में चार आदिवासी लड़कियों के कथित तौर पर गर्भवती होने को लेकर मंगलवार को ओडिशा विधानसभा में हंगामा हुआ. विपक्ष ने आरोप लगाया कि आदिवासी लड़कियों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे हॉस्टल सुरक्षित नहीं है और हॉस्टलों का दुरुपयोग किया जा रहा है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने इस विषय पर सरकार से बयान की मांग की.

कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्रा ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया. उन्होंने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कहा.

नरसिंह मिश्रा ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को दबाने की कोशिश की गई क्योंकि हॉस्टल के अधिकारियों ने लड़कियों को उनके घर भेज दिया है. उन्होंने कहा कि प्रारंभिक चिकित्स रिपोर्ट में कहा गया था कि चार लड़कियां गर्भवती पाई गईं, बाद में उनमें से तीन की रिपोर्ट नकारात्मक आई. मिश्रा ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

दोषियों को सजा की मांग

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे इस घटना को गंभीरता से लें और इसमें संलिप्त लोगों को सजा दें. कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर यह घटना दिल्ली-मुंबई में होती तो पूरे देश में प्रदर्शन होते. मिश्रा ने पूछा, “क्या नवीन के नेतृत्व वाली बीजद सरकार का यह महिलाओं का सम्मान है.”

बीजेपी सदस्य बिष्णु चरण सेठी ने भी घटना पर चिंता व्यक्त की और मुख्यमंत्री से एक बयान की मांग की. सेठी ने कहा, "मामले को दबाने के लिए पीड़ितों के माता-पिता को धमकाया जा रहा है."

सदन में हंगामा
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इस बीच कांग्रेस सदस्य सदन के आसन्न के समीप चले गए और अध्यक्ष एस एन पात्रा से अनुरोध किया कि वे मुख्यमंत्री को बयान देने का आदेश दें. विपक्षी सदस्यों ने अध्यक्ष के आसन्न पर भी चढ़ने की कोशिश की जिसके बाद 10 मिनट के लिए कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी. बाद में अध्यक्ष ने संबंधित विभागों को सदन में बयान देने के लिए कहा.

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First published: July 3, 2019, 1:12 PM IST
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