राज्यसभा सांसद पद्मविभूषण रघुनाथ महापात्रा का कोरोना संक्रमण से निधन

राज्यसभा सांसद रघुनाथ महापात्रा का निधन.

राज्यसभा सांसद रघुनाथ महापात्रा का निधन.

पत्थरों को तराशने की अपनी कला के लिए देश-दुनिया में विख्यात रहे राज्यसभा सांसद रघुनाथ महापात्रा का कोरोना के चलते निधन हो गया. वे पिछले हफ्ते ही कोविड से संक्रमित हुए थे और उनका इलाज भुवनेश्वर के एम्स में चल रहा था.

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भुवनेश्वर. राज्यसभा सांसद और मशहूर मूर्तिकार रहे रघुनाथ महापात्रा का रविवार को भुवनेश्वर में निधन हो गया. उन्हें पिछले हफ्ते से कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भुवनेश्वर के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां आज दोपहर में उनका निधन हो गया. भुवनेश्वर एम्स की ओर ये जानकारी दी गई है. रघुनाथ महापात्रा को 22 अप्रैल को कोविड के लक्षण दिखाई दिए थे. इसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था. जहां उनका इलाज चल रहा था, हालांकि उनकी तबियत में सुधार नहीं हो रहा था और आखिरकार आज दोपहर वे कोविड से जिंदगी की जंग हार गए.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

78 वर्ष की आयु में पद्मविभूषण रघुनाथ महापात्रा के निधन के समाचार पर देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है. कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए उनके परिवार से बात की थी. गृहमंत्री अमित शाह और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है. पद्मविभूषण रघुनाथ महापात्रा निधन पर ओडिशा के राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने दुख जताया है.

मूर्तिकला के प्रख्यात कलाकार थे रघुनाथ महापात्रा
पत्थर पर खुदाई कर खूबसूरत मूर्तियां बनाने के लिए मशहूर रघुनाथ महापात्रा ने ओडिशा के साथ देश और दुनिया में अपनी ख्याति स्थापित की थी. उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करने के बावजूद उन्होंने अपनी लगन और मेहनत के बल पर न सिर्फ ओडिशा बल्कि पूरी दुनिया में अपने कौशल का लोहा मनवाया.

उनका जन्म पुरी जिले के सदर ब्लाक खपुरिया गांव में 24 मार्च, 1943 को हुआ था. बचपन से ही कारीगरी के शौकीन रघुनाथ महापात्रा ने युवा काल में ही अपनी प्रतिभा से शोहरत हासिल कर ली थी.

मनोनीत होकर पहुंचे थे राज्यसभा



कारूकार्य की उनकी शैली मशहूर थी. उन्हें 1975 में केंद्र सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था. फिर साल 2001 में उन्हें पद्म भूषण और 2013 में पद्म विभूषण सम्मान दिया गया. 2016 में ओडिशा सरकार ने उन्हें ललित कला एकेडमी का अध्यक्ष भी बनाया था. राज्यसभा सांसद के तौर पर मनोनीत होकर वे राज्यसभा पहुंचे थे. वे महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के अनन्य भक्त थे और पुरी जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में भी उन्होंने सहयोग दिया था.

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