ओडिशा: चक्रवात फानी के कारण 20 साल पीछे पहुंच गए चिल्का के मछुआरे

ओडिशा: चक्रवात फानी के कारण 20 साल पीछे पहुंच गए चिल्का के मछुआरे

ओडिशा: चक्रवात फानी के कारण 20 साल पीछे पहुंच गए चिल्का के मछुआरे

चिल्का झील के पास रहने वाले कई मछुआरों की तरह ही बेहेरा की नाव और मछली पकड़ने का जाल पानी में बह गए हैं. हज़ार लोगों की आजीविका इसी झील में मछली पकड़ने पर निर्भर थी.

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(सुदर्शन छोट्टोरे)



ओडिशा के पुरी जिले के बाघ लांजी गांव के रहने वाले 45 वर्षीय अखिला बेहेरा के परिवार में पांच सदस्य हैं. एशिया के सबसे बड़े खारे पानी की चिल्का झील से मछली पकड़कर वो अपनी आजीविका कमाते हैं. हर महीने उन्हें इससे 10 से 15 हज़ार तक की कमाई हो जाती थी. लेकिन पिछले कुछ सालों में मछली पकड़ने के क्षेत्रों का अतिक्रमण और कई अन्य स्थानीय समस्याओं के कारण उनकी कमाई लगातार कम होती जा रही है.



लेकिन उनकी तकलीफें उस वक्त और बढ़ गईं जब 3 मई को फानी चक्रवात राज्य के तटीय इलाकों से टकराया और 30 में से 14 जिलों को तबाह कर दिया. चिल्का झील के पास रहने वाले कई मछुआरों की तरह ही बेहेरा की नाव और मछली पकड़ने का जाल पानी में बह गए हैं. हज़ार लोगों की आजीविका इसी झील में मछली पकड़ने पर निर्भर थी. चिल्का झील के किनारे बसे बाघ लांजी गांव में 200 परिवार रहते हैं और यहां चक्रवात से बचने के लिए कोई आश्रय नहीं है.





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हालांकि इस इलाके से तीन किलोमीटर की दूरी पर एक आश्रय बना है, लेकिन चक्रवात संबंधी लगातार चेतावनी मिलने के बावजूद गांववालों ने अपनी ज़मीन के प्रति मोह के चलते अपना गांव खाली नहीं किया. इस गांव के करीब 90 नाव बर्बाद हो गए. कुछ के टुकड़े तो मिले पर कुछ नाव बिल्कुल हैं.



बापिना बेहेरा का कहना है कि चक्रवात के कारण लगभग सभी परिवारों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. चीज़ों को पटरी पर लाने के लिए कभी कुछ महीनों का वक्त लग जाएगा. बेहेरा कहते हैं कि फानी चक्रवात ने उन सभी को 20 साल पीछे धकेल दिया है.



1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन, 2013 फैलिन चक्रवात, 2014 के हुदहुद तूफान और 2018 की तितली तूफान के कारण पहले ही यहां का मछुआरा समुदाय काफी नुकसान झेल चुका है.



पड़ोसी गांव बारकोड में भी हालात कमोबेश ऐसे ही हैं. 150 परिवारों वाले इस गांव में सभी पारंपरिक तौर पर मछुआरे ही हैं. इस गांव के निवासी 53 वर्षीय दुर्योधन बेहेरा ने मछली पकड़ने का जाल खरीदने के लिए एक सहकारी संस्था से पैसे और एक नाव उधार लिया था. महज़ 300 रुपए की आय में लोन का पैसा चुकाने, किराया देने और घर का खर्च चलाने में उन्हें पहले से ही काफी दिक्कतें हो रही थीं. और अब चक्रवात के कारण उनकी नाव पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है.



लोगों का कहना है कि भले ही सरकार ने उनके लिए मुआवजे का ऐलान किया है, लेकिन वो नाकाफी होगा और उन्हें साहूकारों के पास जाना ही पड़ेगा.



सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चक्रवात फानी से प्रभावित 14 जिलों में पांच लाख से अधिक घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. राज्य सरकार ने चिल्का मछुआरों के लिए सहायता की घोषणा की है. सरकार ने नाव के लिए 40 हज़ार और मछली पकड़ने के जाल के लिए 10 हज़ार रुपए सहायता देने की बात कही है. दूसरे इलाके के मछुआरों के लिए भी ऐसी ही घोषणाएं की गई हैं. राज्य सरकार ने केंद्र से घरों के पुर्निमाण के लिए मदद मांगी है.



पिछले 50 वर्षों में ओडिशा में इस तरह के 35 गंभीर तूफान आ चुके हैं. 1999 सुपर साइक्लोन में 10 हज़ार लोगों की मौत हो गई है. ओडिशा सरकार के अनुमान के मुताबिक फानी तूफान से 12 हज़ार करोड़ का नुकसान हुआ है और इस बाबत केंद्र को एक ज्ञापन भी सौंपा है.



केंद्र सरकार ने पहले ही 340 करोड़ रुपए की राहत राशि राज्य को दे दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाई सर्वेक्षण के बाद उन्होंने अतिरिक्त एक हज़ार करोड़ सहायता राशि देने का वादा किया है. प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक कुल प्रभावित जनसंख्या 1.65 करोड़ है और तूफान से मरने वालों की संख्या 64 है. भले ही सरकार ने राहत और बहाली का काम तेज़ कर दिया है, लेकिन ये देखना होगा कि मछुआरों जैसे गंभीर रूप से प्रभावित समुदायों की आजीविका को बहाल करने में कितना वक्त लगेगा.



(लेखक भुवनेश्वर में लेखक और रिसर्चर हैं)



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