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'डेई' और 'तितली' से निपट चुका ओडिशा 'फानी' से टकराने को भी तैयार

News18Hindi
Updated: April 30, 2019, 12:03 PM IST
'डेई' और 'तितली' से निपट चुका ओडिशा 'फानी' से टकराने को भी तैयार
ओडिशा पिछले साल अक्टूबर में चक्रवाती तूफान तितली की जद में आया था.

सितंबर और अक्टूबर, 2018 में एक के बाद एक चक्रवाती तूफानों ने दक्षिण भारत में भीषण तबाही मचाई थी. हालांकि, ओडिशा ने अपने तटीय इलाकों से तूफान के टकराने से पहले ही हर तैयारी पूरी कर ली थी. इस बार भी ओडिशा प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद और तैयार है.

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  • Last Updated: April 30, 2019, 12:03 PM IST
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चक्रवाती तूफान 'फानी' लगातार विकराल होता जा रहा है. मौसम विभाग ने अगले 36 घंटे में 'फानी' के दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में बंगाल की खाड़ी के ऊपर तीव्र होने की आशंका जताई है. लिहाजा, दक्षिण के कई राज्यों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. इस तूफान के चलते केरल और ओडिशा में तेज आंधी के साथ भारी बारिश हो सकती है. ओडिशा ने इस आपदा से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है.

भारतीय सेना और नौसेना को इससे निपटने के लिए अलर्ट पर रखा गया है. तीनों ही सेनाओं की राहत टीमें बनाई गई हैं. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और भारतीय तटरक्षक बल को हाई अलर्ट पर रखा गया है. नौसेना ने जहाजों को अतिरिक्त गोताखोरों, डॉक्टरों, रबड़ की नौकाओं और राहत सामग्री के साथ तैयार कर लिया है.

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ओडिशा पिछले साल सितंबर में चक्रवाती तूफान 'डेई' और अक्टूबर में 'तितली' की चपेट में आया था, लेकिन दोनों ही बार पहले से मुस्तैदी के कारण जान-माल का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ. 22 सितंबर, 2018 को चक्रवाती तूफान डेई ओडिशा के तट पर पहुंचा, जिससे जबरदस्त बारिश हुई. मलकानगिरी जिले का शेष राज्य से संपर्क ही टूट गया. इसके बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आदेश दिया कि जिले के लोगों तक तत्काल पहुंचकर मदद मुहैया कराई जाए. उन्होंने अगले 7 दिन तक हर व्यक्ति को 60 रुपये प्रतिदिन और 12 साल से कम आयु के हर बच्चे को 45 रुपये रोज सहायता राशि मंजूर की. प्रशासन ने पूरी तत्परता दिखाते हुए हालात पर नियंत्रण पाया.



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सितंबर, 2018 में ओडिशा में चक्रवाती तूफान डेई ने दस्तक दी थी.


इसके बाद 11 अक्टूबर, 2018 को चक्रवाती तूफान तितली ने ओडिशा में दस्तक दी. 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवा चली. तटीय इलाकों में तेज बारिश हुई. मौसम विभाग ने इसे भीषण तूफान की कैटेगरी में रखा. हालांकि, ओडिशा प्रशासन पहले से ही चौकन्ना था. तूफान के राज्य से टकराने से पहले ही उत्तरी तटीय इलाकों को हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था. चार जिलों के स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए थे. खतरे वाली जगहों से लोगों को हटा दिया गया था. लगभग 3 लाख लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था. साथ ही मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की हिदायत दे दी गई थी.

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इसके अलावा एनडीआरएफ और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) के कर्मियों को पहले ही संवेदनशील जिलों में तैनात कर दिया गया. मुख्यमंत्री ने पहले ही शरणार्थी शिविर तैयार रखने का निर्देश दे दिया था. लिहाजा, तूफान से प्रभावित लोगों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ा. ओडिशा में चक्रवाती तूफान तितली और उसके कारण आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 57 रही. इनमें 10 बच्चे भी थे. मृतकों में 39 की मौत सिर्फ गजपति जिले में हुई. इस दौरान करीब 2200 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

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तितली की भीषणता के मुकाबले हताहतों की कम संख्या सिर्फ इसलिए रही क्योंकि ओडिशा प्रशासन सतर्क था और तूफान से निपटने की पहले से ही तैयारी कर ली थी. इसी दौरान तितली ने केरल में भी कहर बरपाया था. ओडिशा की तैयारी को लेकर पूरे देश में तारीफ हुई. बार-बार चक्रवाती तूफान की चपेट में आने वाले ओडिशा ने इस बार भी 'फानी' से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है.

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First published: April 30, 2019, 10:50 AM IST
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