कानून के लंबे हाथ! 22 साल बाद आखिर पुलिस की पकड़ में कैसे आया ओडिशा रेप केस का मुख्य आरोपी

22 साल बाद गिरफ्त में आया आरोपी. (File pic)

22 साल बाद गिरफ्त में आया आरोपी. (File pic)

1999 में हुई इस रेप की घटना ने ओडिशा (Odisha) को हिलाकर रख दिया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री जेबी पटनायक को इसके कारण इस्‍तीफा तक देना पड़ा था. अब 22 साल बाद पुलिस ने इस केस के मुख्य आरोपी को मुंबई से धरदबोचा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 12:16 PM IST
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नई दिल्‍ली. ओडिशा (Odisha) में एक आईएफएस अधिकारी की पत्नी से 22 साल पहले हुए गैंगरेप (Gangrape) के सनसनीखेज मामले के मुख्य आरोपी को अब पुलिस ने महाराष्ट्र (Maharashtra) में पकड़ा है. जेल के अंदर मुठभेड़, रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण गलती, ओडिशा के एक गांव में तीन महीने का खुफिया ऑपरेशन, संदिग्ध बैंक अकाउंट ट्रांसफर और आखिरी मिनट में भागने की कोशिश. ये सब ऐसे बिंदु हैं जिनकी वजह से पुलिस टीम भुवनेश्‍वर से महाराष्‍ट्र के लोनावला में रेप के मुख्‍य आरोपी तक पहुंच पाई और उसे गिरफ्तार कर लिया.

1999 में हुई इस रेप की घटना ने ओडिशा को हिलाकर रख दिया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री जेबी पटनायक को इसके कारण इस्‍तीफा तक देना पड़ा था. सोमवार को ओडिशा पुलिस ने 50 वर्षीय बिबेकानंद बिस्वाल उर्फ बीबन की आंबी वैली से हुई गिरफ्तारी के बाद उसे भुवनेश्‍वर में आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. वह आंबी वैली में प्लम्बर के रूप में काम कर रहा था, जो हर महीने 17,000 रुपये कमाता था और 'जालंधर स्वैन' के नाम का आधार कार्ड रखता था.

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भुवनेश्‍वर कटक के पुलिस कमिश्‍नर डॉ. सुधांशु सारंगी ने कहा, 'आरोपी को उसके परिवार सहित कई सोर्स से बीबन के रूप में पहचाना गया था. पहचान के बाद बीबन को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया और आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया है.'

लोनावाला में एक अधिकारी ने कहा के आंबी वैली में श्रमिकों के बैरक में बीबन ने एक संयुक्त पुलिस टीम को गुमराह करने की कोशिश की. इस दल में महाराष्ट्र के अधिकारी भी शामिल थे. उन्होंने दावा किया कि उसके पास मोबाइल फोन नहीं था और गिरफ्तारी के डर से उसने गलत बिस्तर की ओर इशारा किया. भागने की कोशिश भी की. लेकिन उसे तुरंत पकड़ लिया गया.
पुलिस कमिश्‍नर सुधांशु सारंगी एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी आईआईएफएल से 12 करोड़ रुपये की डकैती की जांच के लिए पिछले साल नवंबर में जेल गए थे. उन्‍होंने कहा, 'मैं सीसीटीवी कैमरे से डकैती मामले में आरोपियों की कुछ तस्वीरें दिखाना चाहता था. तब मैं 1999 के बलात्कार मामले में सह-अभियुक्तों में से एक धीरेन्द्र मोहंती के पास पहुंचा. जेलर ने मुझे सूचित किया कि वह सबसे पुराने कैदियों में से एक था, जो उम्रकैद काट रहा था. जब हमने केस फाइल को देखा, तो हमें पता चला कि मुख्य आरोपी अभी भी फरार था.'

यहीं से सारंगी के नेतृत्व में ऑपरेशन साइलेंट वाइपर की शुरुआत हुई. इसमें तीन अन्य पुलिस अधिकारी शामिल थे. इनमें कटक के डिप्‍टी पुलिस कमिश्‍नर, कटक के विशेष दस्ते के इंस्‍पेक्‍टर और बारंगा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर प्रभारी शामिल थे. जांच में पुलिस ने दूसरे आरोपी धीरेंद्र से पूछताछ की तो पता चला कि बीबन को 'बीके' यानी बारंगा किंग के नाम से जाना जाता है. इसके बाद टीम ने बीबन के परिवार की ओर जांच शुरू की तो पता चला कि परिवार की आय का स्रोत भी एक और है.





सांरगी ने बताया कि बीबन की पत्‍नी और दो बेटे हैं. एक बेटा शादीशुदा है. किसी की निरंतर आय का कोई स्रोत नहीं है. लेकिन इसके बावजूद उन्‍हें लगातार पैसे मिल रहे थे. इससे हमारा शक और बढ़ा कि बीबन का परिवार उसके संपर्क में है. जांच करने पर पता चला कि बीबन के बेटे के बैंक अकाउंट में 5 हजार से 25 हजार रुपये ट्रांसफर हुए थे. इसके बाद जाल बिछाकर बीबन को आंबी वैली से पकड़ लिया गया.
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