गर्भवती के इलाज में अनदेखी: पहले पेट में जुड़वां बच्चों की मौत, फिर मां ने भी तोड़ा दम

इस दर्दनाक हादसे के लिए परिजनों ने डॉक्टरों की अनदेखी को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि जान-बूझकर डॉक्टरों ने इलाज में देरी की.

News18Hindi
Updated: June 14, 2019, 8:50 PM IST
गर्भवती के इलाज में अनदेखी: पहले पेट में जुड़वां बच्चों की मौत, फिर मां ने भी तोड़ा दम
ओडिशा में एक महिला की मेडिकल अनदेखी के चलते जुडवां बच्चों समेत मौत हो गई है (सांकेतिक फोटो)
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Updated: June 14, 2019, 8:50 PM IST
पश्चिम बंगाल में दो डॉक्टरों की पिटाई के बाद से देशभर में डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन जारी हैं. इसी बीच ओडिशा से एक दिन दहला देने वाली ख़बर सामने आई है. यहां एक महिला की डॉक्टरों की अनदेखी के चलते मृत जुड़वां बच्चों को जन्म देते ही मां की भी मौत हो गई है. यह घटना ओडिशा के मयूरभंज जिले का है. यहां इस गर्भवती महिला को पंडित रघुनाथ मुर्मू (पीआरएम) मेडिकल कॉलेज में ले जाया गया था.

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज में अनदेखी की, इसी कारण उन्होंने महिला का प्राइवेट क्लीनिक में अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें पेट में बच्चे मृत पाए गए. इसके बाद महिला को भर्ती कराया तो उसकी भी जान चली गई. यह मामला तब ज्यादा गंभीर हो गया, जब मृत महिला के शव को लेकर उसके परिजन डीएम ऑफिस के सामने धरने पर बैठ गए.



पेट में ही जुड़वां बच्चों की हो चुकी थी मौत
गर्भवती महिला के परिजनों ने आरोप लगाया है कि महिला की मौत सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की अनदेखी के चलते हुई है. वे महिला की मौत के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई और परिवार के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक गर्भवती महिला ओडिशा के आदिवासी बहुल इलाके मयूरभंज के खूंटा इलाके की रहने वाली थी. दशरथी मुर्मू नाम की इस महिला का घर घंटासिला गांव में है. जिसे 11 जून को एक प्राइवेट क्लीनिक में कराए गए एक अल्ट्रासाउंड मेडिकल टेस्ट में जुड़वा बच्चों की मौत की जानकारी मिलने के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज पीआरएम में भर्ती कराया गया था. इसके बाद से महिला की लगातार अनदेखी किए जाने के चलते उसकी मौत हो जाने की बात कही जा रही है.

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महिला के शव को ले जाते स्थानीय लोग (फोटो- एएनआई)


परिजन कर रहे दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग
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मृत महिला के पति ने बताया, 'पीआरएम हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मरीज को ढंग से वक्त नहीं दिया. हमें तब मरीज के मर चुके बच्चों के बारे में पता चला, जब उसका प्राइवेट क्लीनिक में टेस्ट कराया गया.' उसने यह भी कहा है कि हम प्रशासन से इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और मुआवजा चाहते हैं.

जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने परिजनों को ही ठहराया जिम्मेदार
इस मामले में बरिपादा के मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि उन्होंने खुद सारी स्वास्थ्य रिपोर्ट्स की जांच की थी. सब कुछ ठीक था. लेकिन बड़ी संख्या में मरीजों के होने के चलते, उन्होंने इंतजार नहीं किया. बिना डॉक्टरों की सलाह लिए वे गए और अल्ट्रासाउंड करा लिया. जब मैंने रिपोर्ट्स देखीं तो पता चला कि जुड़वां बच्चों की पेट में ही मौत हो चुकी थी.

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