पुलिस की वर्दी पर स्टेथेस्कोप लगाकर घूम रहे हैं अधिकारी, एक साथ निभा रहे हैं दो ड्यूटी

वडोदरा के डीसीपी डॉ. करण वाघेला भी आईपीएस बनने से पहले डॉक्टर रहे हैं. महामारी के इस दौर में वाघेला को एसआरपी परिवारों के मेडिकल कंडिशन को संभालने की जिम्मेदारी आई है

राज्य के मेहसाणा जिले के एक अस्पताल में सेवाएं देने वाले डॉ. पार्थ राज गोहिल जिले के एसपी हैं. राज्य में कानून व्यवस्थाएं बनाए रखने के अलावा डॉ. पार्थ पुलिस परिवार में जो लोग कोरोना संक्रमित हुए है उनके इलाज में भी सहयोग दे रहे है.

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अहमदाबाद. गुजरात में आज-कल पुलिस अफसर डॉक्टर की भूमिका भी अदा कर रहे हैं. पुलिस यूनिफॉर्म के साथ स्टेथेस्कोप भी दिख रहा है. दरअसल गुजरात में कोरोना वायरस महामारी (Gujarat Corona Pandemic) की दूसरी लहर के कारण डॉक्टरों की कमी देखी जा रही है. डॉक्टरों की कमी के बीच गुजरात पुलिस ने एक रास्ता निकाला है. पुलिस अफसर बनने से पहले जिन अधिकारियों का बैकग्राउंड मेडिकल फील्ड से रहा है, ऐसे 18 अफ़सरों को पुलिसकर्मी और उनके परिवारो के कोरोना के मामलों में मदद और मेडिकल सहयोग देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

राज्य के मेहसाणा जिले के एक अस्पताल में सेवाएं देने वाले डॉ. पार्थ राज गोहिल जिले के एसपी हैं. राज्य में कानून व्यवस्थाएं बनाए रखने के अलावा डॉ. पार्थ पुलिस परिवार में जो लोग कोरोना संक्रमित हुए है उनके इलाज में भी सहयोग दे रहे है. चूंकि डॉ. पार्थ आईपीएस बनने से पहले डॉक्टर थे, आज उनका मेडिकल ज्ञान लोगों के काम आ रहा है.

दवाइयों के डोज से लेकर रिपोर्ट तक की जानकारी
बिल्कुल इसी अंदाज में वलसाड के जिला एसपी डॉ. राजदीप झाला भी अपने पुलिस परिवारों की मदद में आगे आये हैं. पुलिस कॉलोनी हो या कोविड आइसोलेशन सेंटर डॉ राजदीप झाला सारी दवाइयों के डोज को कैसे, कब लेना है इसकी जानकारी देते हैं. उनका कहना है कि कोविड अस्पतालों में रोजाना आना-जाना अपने साथ काम करने वालों का हाल चाल जानना अब एक क्रम बन गया है. डॉ. राजदीप का कहना है कि पुलिस परिवार में जब जिले का मुखिया खुद उनके सही इलाज की चिंता करें तो जाहिर है मरीज का मनोबल और बढ़ता है.

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फोन पर भी देते हैं मरीजों को सलाह
वहीं, वडोदरा के डीसीपी डॉ. करण वाघेला भी आईपीएस बनने से पहले डॉक्टर रहे हैं. महामारी के इस दौर में वाघेला को एसआरपी परिवारों के मेडिकल कंडिशन को संभालने की जिम्मेदारी आई है. डॉक्टर के तौर पर किस वक्त क्या करना है, यह जानकारी के लिए कोई भी पुलिसकर्मी फोन करके उनसे बात कर सकता है.

दरअसल, कोरोना काल में पुलिसकर्मी फ्रंटलाइन वर्कर हैं. ऐसे में कई पुकिसकर्मी कोरोना से संक्रमित हुए और कइयों ने जान गंवाई. कोरोना के इस कहर में ड्यूटी भी देखनी उनकी प्राथमिकता रही ऐसे में उनकी दरकार भी जरूरी थी. हालांकि डॉक्टर्स पर बोझ पहले से है ऐसे में गुजरात के डीजीपी ने पुलिस फोर्स में रहे ऐसे 18 अधिकारियों को चुना जिनका बैकग्राउंड मेडिकल का रहा हो और उन्हें दो से तीन जिलों के पुलिस परिवारों की जिम्मेदारी दी है.