जब जेठमलानी ने कहा था- मैं अब सिर्फ एक बूढ़ा शख्स हूं जो भगवान का इंतजार कर रहा है

राम जेठमलानी (Ram Jethmalani) ने युवा वकीलों (Lawyers) से कहा था, "ये कोई गुलाब का बिस्तर नहीं है. एक वक्त ऐसा बिस्तर होता है, जिस पर कोई गुलाब नहीं होता. दूसरे ही वक्त गुलाब होता है लेकिन कोई बिस्तर नहीं होता."

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: September 8, 2019, 9:27 PM IST
जब जेठमलानी ने कहा था- मैं अब सिर्फ एक बूढ़ा शख्स हूं जो भगवान का इंतजार कर रहा है
जेठमलानी के राजनीतिक करियर के भी कई रंग दिखे. अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में उन्होंने मंत्री के रूप में काम किया. वो अधिकांश राजनेताओं के आलोचक थे.
Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: September 8, 2019, 9:27 PM IST
नई दिल्ली. "मैं अब भगवान का इंतजार करने वाला एक बूढ़ा शख्स हूं." ये वाक्य वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी (Ram Jethmalani) अदालत (Court) के एक अधिकारी के सामने अक्सर कहा करते थे. 2017 में अपने 94वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले जेठमलानी ने सात दशकों से जारी अपने वकालत के करियर को विराम दे दिया था. जब नव नियुक्त मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के स्वागत समारोह जेठमलानी पहुंचे तो उन्होंने औपचारिक घोषणा की थी, "माई लॉर्ड, मैं आपके सामने अंतिम बार हाजिर हूं. मैं अब 90 से ज्यादा का हो चुका हूं. मैंने ये सब देखा है. मैं अब सिर्फ एक बूढ़ा शख्स हूं जो भगवान का इंतजार कर रहा है." उन्होंने तब कहा था कि वे लोग जिन्हें उन्होंने बच्चों के रूप में देखा था, वो अब न्यायाधीश और अब मुख्य न्यायाधीश बन चुके हैं.

समारोह के दौरान न्यायमूर्ति मिश्रा ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि जेठमलानी के पास अभी भी कानून की दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है और उनके जैसा कोई व्यक्ति कभी सेवानिवृत नहीं हो सकता.

"ये कोई गुलाब का बिस्तर नहीं है..."
उन्होंने घोषणा की थी कि उनका घर हमेशा युवा वकीलों के लिए खुला है, जो उनसे सीखने की इच्छा रखते हैं. उन्होंने नए युवा वकीलों से कहा था, "ये कोई गुलाब का बिस्तर नहीं है. कभी-कभी, ये एक ऐसा बिस्तर होता है, जिस पर कोई गुलाब नहीं होता. दूसरे ही वक्त गुलाब होता है लेकिन कोई बिस्तर नहीं होता."

जेठमलानी 1947 के विभाजन के बाद भारत एक शरणार्थी के रूप में आए थे. बाद में अपनी काबिलियत के बल पर वो देश के महानतम वकीलों में से एक बन गए. वो बिना किसी भेदभाव के सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनेताओं, जासूसों, हत्यारों और डकैतों के वकील रहे.

जेठमलानी अपनी पसंद के मामलों में अप्रत्याशित थे
यदि उन्होंने मशहूर केएम नानावती मामले को रणनीतिक रूप दिया, तो उन्होंने इंदिरा गांधी के हत्यारों का भी प्रतिनिधित्व किया. अगर वो काले धन के लिए लड़ते रहे, तो वो चारा घोटाला मामलों में लालू प्रसाद यादव के लिए अदालत में पेश हुए. जेठमलानी अपनी पसंद के मामलों में अप्रत्याशित थे. उन्होंने कई अपराधियों को फांसी की सजा से बचाने का काम किया, लेकिन मौत की सजा के पक्ष में भी दृढ़ता से तर्क दिया. उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बात की और भ्रष्टाचार के मामलों में हाई-प्रोफाइल हस्तियों का बचाव करते भी नजर आए.
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जेठमलानी के राजनीतिक करियर के भी कई रंग
जेठमलानी के राजनीतिक करियर के भी कई रंग दिखे. अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में उन्होंने मंत्री के रूप में काम किया. वो अधिकांश राजनेताओं के आलोचक थे और उन्हें देश की स्थिति के लिए दोषी ठहराते थे. कई पत्रों और बयानों के बाद भाजपा ने 2013 में जेठमलानी के साथ अपने संबंध को खत्म किया. जेठमलानी एक शौकीन बैडमिंटन खिलाड़ी थे और अपने तेजतर्रार स्वभाव के लिए जाने जाते थे. वो अक्सर प्यार और जीवन के बारे में बात करते थे. कुछ साल पहले तक अपने मित्रों को पार्टी देने के मामले में भी वो काफी दिलेर थे. जहां वो सभी के साथ डांस भी करते थे. आज यानी कि 8 सितंबर, 2019 को उनका भगवान का इंतजार खत्म हो गया और वो इस दुनिया से रुखसत हो गए.

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First published: September 8, 2019, 1:19 PM IST
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