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    अनुच्छेद 370 पर उमर अब्दुल्ला ने कसा रविशंकर प्रसाद पर तंज, कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अंदाजा न लगाएं

    नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने रविशंकर प्रसाद पर तंज कसा है. (फाइल)
    नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने रविशंकर प्रसाद पर तंज कसा है. (फाइल)

    केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shanker Prasad) ने साफ शब्दों में कहा था कि जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को विशेष दर्ज प्रदान करने वासे अनुच्छेद 370 (Article 370) को पिछले साल समाप्त कर दिया गया था, जिसे अब बहाल नहीं किया जाएगा.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 25, 2020, 4:36 PM IST
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    श्रीनगर. नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) को बहाल नहीं करने संबंधी केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shanker Prasad) के बयान पर रविवार को तंज करते हुए कहा कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश क्या फैसला सुनाएंगे, इसका अंदाजा नहीं लगाएं.

    दरअसल केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को कहा था कि अनुच्छेद 370 के तहत भूतपूर्व राज्य जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) का विशेष दर्जा बहाल नहीं किया जाएगा. इस पर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, 'प्रिय रविशंकर प्रसाद जी, हम आपसे कुछ भी बहाल करने की उम्मीद नहीं रखते हैं, लेकिन जब तक सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता है... कृपया यह अंदाजा नहीं लगाए कि माननीय न्यायाधीश क्या फैसला देंगे.'


    इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने साफ शब्दों में कहा था कि जम्मू-कश्मीक को विशेष दर्ज प्रदान करने वासे अनुच्छेद 370 को पिछले साल समाप्त कर दिया गया था, जिसे अब बहाल नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसे एक उचित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत समाप्त किया गया और संसद के दोनों सदनों ने इसे अच्छी संख्या बल से मंजूरी दी थी.



    कानून मंत्री ने कहा कि इसे समाप्त करना देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता थी और लोगों ने इसकी प्रशंसा की. उन्होंने दावा किया था कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त किये जाने से केंद्र शासित प्रदेश में विकास को बढ़ावा मिला है और समाज के कमजोर वर्ग जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को वही अधिकार प्राप्त हो रहे हैं जो उन्हें देश के बाकी हिस्सों में मिलते हैं.

    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट, नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत जम्मू-कश्मीर की मुख्यधारा की कई पार्टियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें केंद्र सरकार के पांच अगस्त 2019 के निर्णय को चुनौती दी गई है. इसी के तहत जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म कर दिया गया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था. (भाषा इनपुट के साथ)
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