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Omicron in India: आखिर ओमिक्रॉन क्यों है इतना खतरनाक, क्या 50 से ज्यादा म्यूटेशन है इसका कारण?

Omicron in India: आखिर ओमिक्रॉन क्यों है इतना खतरनाक, क्या 50 से ज्यादा म्यूटेशन है इसका कारण?

भारत में ओमिक्रॉन के मामलों को लगातार बढ़ना जारी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AP)

भारत में ओमिक्रॉन के मामलों को लगातार बढ़ना जारी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AP)

Omicron in India: नीति आयोग में सदस्य वीके पॉल का कहना है कि अगर ऐसे हाल बने तो भारत में रोजाना 13 से 14 लाख मामले आ सकते हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि ओमिक्रॉन भारत में इतने व्यापक स्तर पर नहीं फैल रहा है. जैसे इसका असर यूके में देखने को मिल रहा है. पॉल कहते हैं कि यूरोप की तरह हमारे यहां हाल नहीं हो हमें यह सुनिश्चित करना होगा और हर हाल के लिए तैयार रहना होगा.

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    नई दिल्ली. दो साल के लंबे अंतराल के बाद जब दुनिया यह सोच कर राहत की सांस ले रही थी कि अब धीरे धीरे वह महामारी (Pandemic) से उबर रहे हैं तब, पहली बार अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से खबर आई थी कि कोरोना ने अपने नए वेरिएंट (Coronavirus New Variant) के साथ फिर से मुंह उठाना शुरू कर दिया है. इस नए वेरिएंट को ओमिक्रॉन (Omicron) नाम दिया गया है, जिसे डेल्टा (Delta Variant) से ज्यादा संक्रामक बताया जा रहा है. अफ्रीका से खबर मिलने के डेढ़ महीने बीत जाने के बाद अब ओमिक्रान 90 देशों में अपना असर दिखा चुका है.

    महामारी की शुरुआत से अब तक यूनाईटेड किंगडम (यूके) में दैनिक मामलों में उच्चतम बढ़ोतरी देखी गई है. वहीं दिल्ली में छह महीने के बाद मामलों के बढ़ने से एक नई चिंता पैदा हो गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वेरिएंट ऑफ कंसर्न में सूचीबद्ध किए गए ओमिक्रॉन पर इसे लेकर शंका की जा रही है कि कहीं बढ़ते हुए मामलों की यही वजह तो नहीं है. ओमिक्रॉन वैक्सीन या उपचार के बाद भी कितना असर डाल सकता है इसे लेकर विशेषज्ञों को अभी डाटा आने का इंतज़ार है.

    क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन
    विश्व स्वास्थ्य़ संगठन ने 26 नवंबर को ओमिक्रॉन को वेरिएंट ऑफ कंसर्न में सूचीबद्ध किया था. जल्दी ही पता चला कि यह वेरिएंट 50 से ज्यादा म्यूटेशन कर चुका है औऱ इसके ज़रिए वैक्सीन और थेरेपी ले रहे लोगों को भी संक्रमण हो सकता है. इसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न की सूची में डालने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख ने दुनिया के सामने इसकी तेजी से फैलने की तस्वीर पेश की, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक पर्याप्त डाटा नहीं मिलने की वजह से अन्य वेरिएंट की तुलना में इसकी बढ़ोतरी की सही दर के बारे में ठीक से कुछ नहीं कहा जा सकता है.

    इसके बाद 17 दिसंबर 2021 को डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अब तक मिले साक्ष्य बताते हैं कि ओमिक्रॉन में डेल्टा से ज्यादा तेज गति से फैलने की काबिलियत है. यही नहीं डेल्टा की तुलना में जो इसका कम्युनिटी ट्रांसमिशन देखा गया है वो डेल्टा की तुलना में इसके दोगुना होने की दर 1.5 से 3 दिन के बीच देखी गई है. इसे देखकर लगता है कि ओमिक्रॉन संक्रमण के मामले में डेल्टा को मात दे सकता है.

    ओमिक्रॉन के फैलने के पीछे क्या है कारण
    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि ओमिक्रॉन उन देशों में तेजी से फैल रहा है जहां आबादी की इम्यूनिटी का स्तर उच्च है. अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इसकी वृद्धि दर क्या है, लेकिन वैश्विक स्तर पर ओमिक्रॉन के मामले उपलब्ध संख्या से कहीं अधिक हैं, और इसकी वजह, जांच में कमी आना, प्रतिरक्षा प्रणाली में घुसपैठ, लापरवाही की वजह से आंतरिक संक्रामकता का बढ़ना, या दोनों के एक साथ मिलने की वजह से यह हो सकता है. हांगकांग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन मानव श्वसन पथ या रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट के ऊतकों को 24 घंटों में डेल्टा की तुलना में 70 गुना ज्यादा तेजी से वृद्धि करता है.

    हालांकि हांगकांग में हुई शोध पूरी तरह से प्रयोगशाला में हुई है, इसलिए असल दुनिया में वायरल लोड को लेकर अभी ठीक से कुछ भी कहना मुश्किल है. इसी तरह मेसाचुसेट्स के रागोन इन्स्टिट्यूट का शोध बताता है कि ओमिक्रॉन मानव कोशिका में डेल्टा वेरिएंट या कोरोना के मूल स्ट्रैन जो वुहान में सबसे पहले पाया गया था उसकी तुलना में मानव कोशिकाओं में घुसने में ज्यादा सक्षम है. हालांकि हांगकांग यूनिवर्सिटी का शोध बताता है कि ओमिक्रॉन डेल्टा की तरह फेफड़ों की कोशिकाओं को संक्रमित नहीं कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह है कि ओमिक्रॉन पहले वाले वीओसी की तुलना में कम घातक लग रहा है.

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    भारत के लिए ओमिक्रॉन को लेकर क्या चिंता
    भारत में अब तक ओमिक्रॉन वेरिएंट से जुड़े 150 मामले सामने आ चुके हैं, वहीं दिल्ली में छह महीने के बाद मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है. एम्स के विशेषज्ञों की रिपोर्ट कहती है कि यह बढ़ोतरी ओमिक्रॉन की वजह से हो सकती है. एम्स में कम्यूनिटी मेडिसिन प्रोफेसर संजय राय का कहना है कि ओमिक्रॉन की संक्रामकता बहुत तेज है और ऐसी आबादी जो इम्यूनिटी के मामले में कमजोर है वहां इसके तेजी से फैलने का खतरा बहुत ज्यादा है. जहां तक भारत की बात है तो यहां अभी लाखों लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगनी बाकी है. राय कहते हैं ऐसे में वैसे ही हाल हो सकते हैं जैसे दूसरी लहर के दौरान हुए थे.

    इसी बात पर सहमति जताते हुए नीति आयोग में सदस्य वीके पॉल का कहना है कि अगर ऐसे हाल बने तो भारत में रोजाना 13 से 14 लाख मामले आ सकते हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि ओमिक्रॉन भारत में इतने व्यापक स्तर पर नहीं फैल रहा है. जैसे इसका असर यूके में देखने को मिल रहा है. पॉल कहते हैं कि यूरोप की तरह हमारे यहां हाल नहीं हो हमें यह सुनिश्चित करना होगा और हर हाल के लिए तैयार रहना होगा.

    यूके और द. अफ्रीका में तेजी से बढ़ रहे हैं अस्पताल में भर्ती होने के मामले
    वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेताया है कि यूके और दक्षिण अफ्रीका में अस्पताल में भर्ती होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. दूसरी लहर में भारत में अस्पताल और चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी की वजह से हड़कंप मच गया था. ऐसे में हमारा सचेत रहना बेहद ज़रूरी है, अभी तक जो भी मामले सामने आए हैं वो या तो बाहर से आने वाले लोग हैं या बाहर से आए लोगों के संपर्क में जो आए हैं, वो हैं. इसलिए अभी स्थिति हमारे नियंत्रण में ही है और नियंत्रण में रहे इसके लिए हमें अत्यधिक सचेत रहना होगा.

    Tags: Coronavirus, Delta, Omicron, WHO

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