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क्या भारत में मिला ओमिक्रॉन वेरिएंट का कोई केस, संसद में सरकार ने दी जानकारी; जानें 10 अहम बातें

क्या भारत में मिला ओमिक्रॉन वेरिएंट का कोई केस, संसद में सरकार ने दी जानकारी; जानें 10 अहम बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया. (फाइल फोटो)

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया. (फाइल फोटो)

Omicron Coronavirus Variant: वैज्ञानिकों का कहना है कि 'ओमिक्रॉन' वेरिएंट कई बार उत्परिवर्तन का नतीजा है. कोविड के अधिक संक्रामक स्वरूप बी.1.1.1.529 के बारे में पहली बार 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन को सूचित किया गया था. इसके बाद बोत्सवाना, बेल्जियम, हांगकांग, इजरायल, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, जापान, जर्मनी और फ्रांस सहित 16 देशों में भी इसकी पहचान की गई है. डब्ल्यूएचओ ने 26 नवंबर को इसे 'चिंताजनक' स्वरूप बताते हुए ओमिक्रॉन नाम दिया था.

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    नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि भारत में अभी तक कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ (Coronavirus New Variant Omicron) का एक भी मामला सामने नहीं आया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya) ने शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन राज्यसभा में कहा, ‘पहली बार दक्षिण अफ्रीका में मिले और ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और हांगकांग सहित कई देशों में फैल चुके कोविड-19 स्ट्रेन ‘ओमिक्रॉन’ का अब तक देश में एक भी केस नहीं है.’ ओमिक्रॉन को कोरोना वायरस के विभिन्न स्वरूपों में सबसे खतरनाक माना जा रहा है.

    वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘ओमिक्रॉन’ वेरिएंट कई बार उत्परिवर्तन (Mutations) का नतीजा है. कोविड के अधिक संक्रामक स्वरूप बी.1.1.1.529 के बारे में पहली बार 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को सूचित किया गया था. इसके बाद बोत्सवाना, बेल्जियम, हांगकांग, इजरायल, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, जापान, जर्मनी और फ्रांस सहित 16 देशों में भी इसकी पहचान की गई है. डब्ल्यूएचओ ने 26 नवंबर को इसे ‘चिंताजनक’ स्वरूप (Variant of Concern) बताते हुए ओमिक्रॉन नाम दिया था.

    कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ पर 10 अहम बातें

    मंडाविया ने राज्यसभा को बताया, "भारत में अब तक COVID-19 वेरिएंट ओमिक्रॉन का कोई मामला सामने नहीं आया है. हम तुरंत संदिग्ध मामलों की जांच कर रहे हैं और जीनोम अनुक्रमण कर रहे हैं. हमने बहुत कुछ सीखा है... आज हमारे पास बहुत सारे संसाधन और प्रयोगशालाएं हैं. हम किसी भी स्थिति से निपट सकते हैं."
    कोरोना वायरस के संभावित रूप से अधिक संक्रामक स्वरूप ओमिक्रॉन के कई देशों में फैलने से बढ़ती चिंताओं के बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ एक समीक्षा बैठक की और उन्हें मामलों की शीघ्र पहचान और प्रबंधन के लिए जांच बढ़ाने की सलाह दी.
    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भूषण ने यह रेखांकित करते हुए कि ऐसा नहीं है कि नया स्वरूप आरटी-पीसीआर और आरएटी जांच से पकड़ में नहीं आ सकता है, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पर्याप्त बुनियादी ढांचा और निगरानी वाले घरेलू पृथक-वास सुनिश्चित करने के लिए कहा.
    चिंता वाले स्वरूप (वीओसी) से देश को उत्पन्न होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को गहन रोकथाम, सक्रिय निगरानी, ​​जांच बढ़ाने, अधिक संक्रमितों वाले क्षेत्रों की निगरानी, ​​टीकाकरण बढ़ाने और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में वृद्धि सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है.
    भूषण ने 28 नवंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे एक पत्र में, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी निगरानी, ​नमूनों को ​जीनोम अनुक्रमण के लिए शीघ्र भेजना सुनिश्चित करने और इस वीओसी को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार सख्ती से लागू करने पर भी जोर दिया.
    एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत में अभी तक कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमिक्रॉन का कोई मामला अभी सामने नहीं आया है. इसके बावजूद भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक कंसोर्टिया आईएनएसएसीओजी (इंडियन सार्स-सीओवी-2 कंसोर्टियम ऑन जिनोमिक्स) स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के पॉजिटिव नमूनों के जीनोम विश्लेषण में तेजी ला रहा है.
    केंद्र ने 'जोखिम वाले' देशों से यात्रा करने वाले या उससे होकर आने वाले लोगों के लिए रविवार को सख्त दिशानिर्देश जारी किये थे और राज्यों को जांच-निगरानी उपायों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई निर्देश जारी किए थे. इसने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को फिर से शुरू करने की समीक्षा करने का भी निर्णय लिया. 'जोखिम वाले' (26 नवंबर तक अपडेट) के रूप में वर्गीकृत देशों में यूरोपीय देश, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरिशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर, हांगकांग और इज़रायल शामिल हैं.
    केंद्र ने कुछ देशों में कोरोना वायरस के अत्यधिक उत्परिवर्तित स्वरूप ओमिक्रॉन के उभरने के मद्देनजर मंगलवार को देशव्यापी कोविड-19 रोकथाम उपायों की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ा दी और राज्यों को सतर्क रहने को कहा. केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने एक पत्र-व्यवहार में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 25 नवंबर को जारी किये गए परामर्श का सख्ती से पालन करने के लिए कहा. इस परामर्श में सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी निगरानी और जांच की सिफारिश की गई है.
    भल्ला ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाकर स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार उनकी जांच की जानी चाहिये. साथ ही भारतीय सार्स-कोव-2 जीनोम समूह मार्गदर्शन दस्तावेज (आईएनएसएसीओजी) के अनुसार ऐसे यात्रियों के नमूनों को तुरंत नामित जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाओं में भेजा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को चिंताजनक स्वरूपों की मौजूदगी के बारे में पता चलने पर तुरंत आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय करने चाहिए.
    भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक समीरन पांडा ने शनिवार को कहा कि कोरोना वायरस के नए स्वरूप की जीन और संरचना में परिवर्तन देखा गया है, लेकिन इन बदलावों से उसकी संक्रामक क्षमता बढ़ेगी या वह टीके के प्रभाव को कम कर देगा, इसका परीक्षण किया जा रहा है. पांडा ने कहा कि भारत में इस्तेमाल किये जा रहे टीके- कोवैक्सीन और कोविशील्ड पूर्व में ज्ञात उत्परिवर्तनों के विरुद्ध कारगर पाए गए हैं. उन्होंने कहा, "बी.1.1.529 उत्परिवर्तन के विरुद्ध वह कारगर होंगे या नहीं यह समय बताएगा."

    Tags: Coronavirus, Mansukh Mandaviya, Omicron variant

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