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पहली बार संक्रमण के बाद तीन गुना जल्दी शिकार बनाता है ओमिक्रॉन, ऐसे लोगों को खतरा ज्यादा: WHO साइंटिस्ट

पहली बार संक्रमण के बाद तीन गुना जल्दी शिकार बनाता है ओमिक्रॉन, ऐसे लोगों को खतरा ज्यादा: WHO साइंटिस्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन. (फाइल फोटो)

विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन. (फाइल फोटो)

Omicron Variant in India: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, “दक्षिण अफ्रीका में मामले ओमिक्रॉन प्रकार के साथ तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि उस देश में इस स्ट्रेन से बच्चे ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में टेस्टिंग भी बढ़ाई गई हैं.” स्वामीनाथन ने बताया कि वर्तमान में बच्चों के लिए कई टीके उपलब्ध नहीं हैं और केवल कुछ ही देशों ने बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू किया है और इसके कारण मामलों में संभावित वृद्धि की चेतावनी दी है.

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    नई दिल्ली. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने सोमवार को कहा कि कोविड -19 के डेल्टा वेरिएंट की तुलना में, ओमिक्रॉन वेरिएंट में वायरस के पहले हमले के 90 दिन बाद फिर से संक्रमण की संभावना तीन गुना ज्यादा अधिक है. CNBC-TV18 से विशेष रूप से बात करते हुए, डॉ स्वामीनाथन ने कहा कि वेरिएंट पर विषाणु और इसके फैलने का डाटा मिलने में समय लगेगा, वर्तमान में वैज्ञानिक जो जानते हैं वह यह है कि दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रॉन प्रमुख वेरिएंट है.

    स्वामीनाथन ने कहा, “डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) की तुलना में ओमिक्रॉन में संक्रमण के 90 दिनों के बाद फिर से संक्रमण तीन गुना अधिक आम है. फिलहाल ओमिक्रॉन संक्रमण की क्लीनिकल ​​विशेषताओं को समझने के लिए अभी ये शुरुआती समय है. मामलों में वृद्धि और अस्पताल में भर्ती होने के बीच एक अंतराल है. यह बीमारी कितनी गंभीर है, यह जानने के लिए हमें अस्पताल में भर्ती होने की दरों का अध्ययन करने के लिए दो से तीन सप्ताह तक इंतजार करना होगा.”

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    दक्षिण अफ्रीका में बच्चों के संक्रमण की दर ज्यादा
    उन्होंने कहा, “दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि वहां इस स्ट्रेन से बच्चे ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में टेस्टिंग भी बढ़ाई गई हैं.”

    स्वामीनाथन ने बताया कि वर्तमान में बच्चों के लिए कई टीके उपलब्ध नहीं हैं और केवल कुछ ही देशों ने बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू किया है और इसके कारण बच्चों में मामले बढ़ सकते हैं.  उन्होंने कहा, “बच्चों के लिए बहुत सारे टीके उपलब्ध नहीं हैं और बहुत कम देश बच्चों का टीकाकरण कर रहे हैं. मामले बढ़ने पर बच्चों और असंक्रमित लोगों को अधिक संक्रमण हो सकता है. हम अभी भी डेटा का इंतजार कर रहे हैं ताकि बच्चों पर ओमिक्रॉन वेरिएंट के असर को खत्म किया जा सके.”

    स्वामीनाथन ने कहा, “हमें टीकाकरण पर एक व्यापक और विज्ञान आधारित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है. यह वही वायरस है जिससे हम निपट रहे हैं और इसलिए इससे बचाव के उपाय वही होंगे. अगर हमें वेरिएंट वैक्सीन की जरूरत है, तो यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वैरिएंट में कितना ‘इम्यून एस्केप’ है.”

    उन्होंने कहा कि सभी देशों को उम्र और क्षेत्र के आधार पर वैक्सीन के आंकड़ों का अध्ययन करना चाहिए ताकि उन लोगों का आकलन किया जा सके जो वैक्सीनेशन से छूट गए हैं. स्वामीनाथन ने कहा संक्रमण को कम करने के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को टीकाकरण करना प्राथमिकता होनी चाहिए.

    Tags: Coronavirus, Dr Soumya Swaminathan, Omicron variant, WHO

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