निर्भया केस की 7वीं बरसी: NCRB की रिपोर्ट में खुलासा- रेप के मात्र 32% मामलों में हो पाती है सजा

बलात्कार के मात्र 32% मामलों में सिद्ध हो पाता है अपराध (सांकेतिक फोटो, Reuters)
बलात्कार के मात्र 32% मामलों में सिद्ध हो पाता है अपराध (सांकेतिक फोटो, Reuters)

एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार 2017 में बलात्कार (Rape) के मामलों में आरोप पत्र यानि चार्जशीट दाखिल किए जाने की दर (Charge-Sheeting Rate) घटकर 86.4 प्रतिशत रह गई जो 2013 में 95.4 प्रतिशत थी.

  • भाषा
  • Last Updated: December 15, 2019, 10:56 PM IST
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नई दिल्ली. पूरे देश को हिलाकर रखने वाले निर्भया सामूहिक बलात्कार (Nirbhaya Gang Rape) के सात साल बाद देश में बलात्कार (Rape) के मामलों में दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) 32.2 प्रतिशत है.

इस घटना के बाद यौन उत्पीड़न (Sexual Harrasment) से निपटने के लिए कानूनों को सख्त बनाये जाने के बावजूद बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) कम है.

2017 में चार्जशीट दाखिल होने की दर घटकर हो गई थी 86.4%
वर्ष 2017 के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार उस वर्ष बलात्कार के मामलों की कुल संख्या 1,46,201 थी, लेकिन उनमें से केवल 5,822 लोगों की दोषसिद्धि हुई.
एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2017 में बलात्कार के मामलों में आरोप पत्र यानि चार्जशीट दाखिल किए जाने की दर (Charge-Sheeting Rate) घटकर 86.4 प्रतिशत रह गई जो 2013 में 95.4 प्रतिशत थी.



पुलिस कर्मचारियों को अधिक कुशल बनाने की जरूरत: अलवर बलात्कार मामले की वकील
अलवर बलात्कार मामले (Alwar Rape Case) में बचाव पक्ष की वकील शिल्पी जैन ने कहा कि बलात्कार मामलों की जांच करने वाले पुलिस के क्षेत्र-स्तरीय कर्मचारियों को अधिक कुशल बनाने की आवश्यकता है.

इस मामले में ओडिशा के पूर्व पुलिस महानिदेशक बी बी मोहंती के बेटे बिट्टी मोहंती ने एक विदेशी पर्यटक (Foreign Tourist) से बलात्कार किया था. जैन ने कहा, ‘‘वे ज्यादातर अनुभवहीन हैं और ताकत उनके सिर पर चढ़ जाती है और ज्यादातर मामलों में वे बेहद भ्रष्ट हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक उप-निरीक्षक (Sub-Inspector) उच्चतम स्तर का अधिकारी होता है जो आरोप पत्र दायर करता है, इसलिए कोई भी तथ्यों की गुणवत्ता की कल्पना कर सकता है.’’

निर्भया गैंगरेप मामले के बाद कानूनों की समीक्षा के लिए JS वर्मा समिति का हुआ था गठन
गौरतलब है कि दक्षिण दिल्ली में 23 वर्षीय एक छात्रा से वर्ष 2012 में 16 और 17 दिसम्बर की दरम्यानी रात में एक चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया. सड़क पर फेंके जाने से पहले उस पर गंभीर रूप से हमला किया गया और 29 दिसम्बर को सिंगापुर (Singapore) के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी.

निर्भया पर इस भयानक हमले के एक सप्ताह बाद यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने के लिए आपराधिक कानूनों की समीक्षा के लिए न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति (Justice JS Verma Committee) गठित की गई थी. जिसके बाद रेप के लिए अधिकतम सजा को उम्रकैद से बढ़ाकर फांसी कर दिया गया था.

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