पारंपरिक तौर पर विरोध करने वाले भी अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के साथ क्यों हैं?

जम्मू-कश्मीर पर बड़ा फैसला आने के बाद देश के अंदर अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के पक्ष और विपक्ष में गोलबंदी शुरू हो गई है. इस फैसले के बाद देश का राजनीतिक माहौल भी नए सिरे से बनने और बिगड़ने लगे हैं.

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 9:14 PM IST
पारंपरिक तौर पर विरोध करने वाले भी अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के साथ क्यों हैं?
इस फैसले के बाद देश का राजनीतिक माहौल भी नए सिरे से बनने और बिगड़ने लगे हैं.. (फोटो-पीटीआई)
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Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 9:14 PM IST
जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाला अनुच्छेद 370 खत्म हो जाने के बाद विरोधी आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श करना शुरू कर दिया है. मोदी सरकार के द्वारा जम्मू-कश्मीर पर बड़ा फैसला आने के बाद देश के अंदर अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के पक्ष और विपक्ष में गोलबंदी शुरू हो गई है. इस फैसले के बाद देश का राजनीतिक माहौल में भी नए सिरे से बनना और बिगड़ना शुरू हो गया है. अनुच्छेद 370 पर सरकार के कदम के बाद पक्ष में बोलने वालों का कहना है कि जब देश एक है तो विधान अलग-अलग क्यों? इन लोगों का कहना है कि सरकार का फैसला एतिहासिक है वहीं विपक्ष में बोलने वालों का अपना ही तर्क है.

विपक्षी दल भी मोदी सरकार के साथ

वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो सराकर के फैसले के खिलाफ हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता की वकालत करने वालों की जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार के ताजा फैसले पर क्या है प्रतिक्रिया? खासतौर से देश के युवा सांसद, पूर्व युवा सांसद, छात्र नेता, स्टूडेंट्स यूनियन, जेएनयू के स्टूडेंट्स और पूर्व स्टूडेंट्स अनुच्छेद 370 के संशोधन पर क्या सोचते हैं?

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं.


दिलचस्प बात यह है कि कुछ विपक्षी दलों में ऐसी भी राजनीतिक पार्टियां और नेता हैं, जो मोदी सरकार के इस कदम का स्वागत कर रहे हैं. इस वर्ग में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो पहले कभी मोदी के धुर विरोधी हुआ करते थे. वह अब सरकार को खुलकर समर्थन कर रहे हैं. वहीं दूसरा धरा कुछ वामपंथियों का है, जो इस संशोधन के खिलाफ है और उनको लगता है कि मोदी सरकार ने संविधान की आत्मा के साथ खिलवाड़ किया है. इन लोगों को लगता है कि मोदी सरकार ने संविधान की अवहेलना की है. इन्हीं लोगों में से एक घरा जेएनयू छात्र संघ का है, जो फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कर रहा है.

कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने व्यक्तिगत तौर पर सरकार का समर्थन किया है


देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस में भी धारा 370 और 35A पर दो फाड़ हो गए हैं. कांग्रेस के कई नेताओं ने व्यक्तिगत तौर पर समर्थन किया है, लेकिन वह पार्टी के तौर पर विरोध कर रहे हैं. ऐसी खबर है कि पार्टी के मीडिया विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में पार्टी प्रवक्ताओं के बीच भी इसको लेकर बहस हुई है. कुछ प्रवक्ता और नेता पार्टी के विरोध के रुख से सहमत हैं तो कुछ इसके विरोध की वजह से राजनीतिक नुकसान की बात कर रहे हैं.
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कांग्रेस के कई नेता पार्टी लाइन से हटे

कांग्रेस नेता और सुपौल से 14वीं लोकसभा की सदस्य रहीं रंजीत रंजन ने भी अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने का समर्थन किया है. रंजीता रंजन कहती हैं, 'कश्मीरी पंडितों को काफी कष्ट झेलना पड़ा है. मेरे पति को भी कश्मीर में स्वीकार नहीं किया गया, जबकि उनकी बहन के पति को स्वीकर कर लिया गया.

रंजीत रंजन कश्मीरी पंडित हैं और उन्होंने बिहार के राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव से शादी कर ली थी


बता दें कि रंजीत रंजन कश्मीरी पंडित हैं और उन्होंने बिहार के राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव से शादी कर ली थी. रंजीता के माता पिता कश्मीरी हैं. रंजीता को एक बेटी होने के नाते उनको जमीन लेने का हक नहीं मिला. रंजीता रंजन की तरह कांग्रेस के कई और ऐसे नेता हैं जो केंद्र सरकार के इस कदम का समर्थन किया है. इसमें दीपेंद्र हुड्डा भी शामिल हैं.

ये हाल सिर्फ कांग्रेस पार्टी का ही नहीं है दूसरे दलों में भी कमोबेश इसी तरह के हालात हैं. ये पार्टियां भले ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल का विरोध कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के कई नेता पार्टी लाइन से हटकर बयान दे रहे हैं. ऐसे नेताओं में पार्टी के युवा नेताओ की संख्या कुछ ज्यादा है.

जेएनयू के कुछ वामपंथी छात्र संगठनों ने जरूर जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने का विरोध किया है


जेएनयू कैंपस की फिजा बदेलगी?

हां, जेएनयू के कुछ वामपंथी छात्र संगठनों ने जरूर जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने का विरोध किया है. ऐसी खबर है कि अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर सोमवार देर रात दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हंगामा होता रहा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2016 की तरह बीते सोमवार को भी देर रात तक जेएनयू कैंपस में एक बार फिर से 'आजादी-आजादी' के नारे लगे हैं. हालांकि नारे लगाने वाले कौन लोग थे उसका पता अभी तक नहीं चल सका है. ये नारे अंधेरे में लगाए जा रहे थे. नारे में अनुच्छेद 370 को वापस लेने की मांग की जा रही थी. ऐसी खबर है कि नारे लगाने वाले कुछ वामपंथी और कश्मीरी छात्र थे. नारे लगाने वाले लोग मीडिया के कैमरे से कतराते रहे.

कुल मिलाकर धारा 370 और 35ए पर अगले कुछ दिनों तक गहमागमी बनी रहेगी. वामपंथी दलों ने अनुच्छेद 370 के संबंध में लिए गए फैसले के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन की तैयारी में हैं. माकपा, माकपा(माले) ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी सहित तमामल माम धरा सात अगस्त को देशभर में प्रतिरोध दिवस मनाने का एलान किया है.

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First published: August 6, 2019, 6:14 PM IST
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