गिरिराज सिंह बोले मोदी सरकार को बदनाम करने के लिये फिर सक्रिय हुआ 'अवॉर्ड वापसी गैंग'

पत्र के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि ऐसा लगता है कि 'अवॉर्ड वापसी' गैंग सक्रिय हो गया है.

News18Hindi
Updated: July 24, 2019, 11:51 PM IST
गिरिराज सिंह बोले मोदी सरकार को बदनाम करने के लिये फिर सक्रिय हुआ 'अवॉर्ड वापसी गैंग'
केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार को अस्थिर करने के लिये 'अवॉर्ड वापसी' गैंग फिर से सक्रिय हो गया है.
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Updated: July 24, 2019, 11:51 PM IST
केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार को अस्थिर करने के लिये 'अवॉर्ड वापसी' गैंग फिर से सक्रिय हो गया है. गिरिराज का यह बयान 49 प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र, जिसमें कहा गया है कि 'जय श्री राम' का उद्घोष भड़काऊ नारा बनता जा रहा है, के बाद आया है. प्रधानमंत्री को लिखे खुले पत्र में यह भी कहा गया है कि 'असहमति के बिना लोकतंत्र नहीं होता है.'

केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने पत्रकारों से कहा, 'मॉब लिंचिंग का सवाल उठाने वाले यह लोग तब कहां थे जब कैराना (उत्तर प्रदेश) के विधायक हाल ही में मुसलमानों को हिंदुओं की दुकानों से सामान नहीं खरीदने के लिये कह रहे थे. वे क्यों खामोश रहे?'

गिरिराज बोले- मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश
पत्र के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि ऐसा लगता है कि 'अवॉर्ड वापसी' गैंग सक्रिय हो गया है. मंत्री ने कहा, 'अवॉर्ड वापसी गैंग मोदी सरकार को बदनाम करने और उसे अस्थिर करने के मकसद से फिर सक्रिय हो गया है.'

वहीं पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाले प्रबुद्ध नागरिकों को बुधवार को राष्ट्रविरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि वे विपक्ष की कठपुतली के रूप में अभिनय कर रहे हैं.

49 लोगों ने लिखा है ये खत
दरअसल, फिल्मकारों अदूर गोपालकृष्णन और अपर्णा सेन, गायक शुभा मुद्गल, इतिहासकार रामचन्द्र गुहा और समाजशास्त्री आशीष नंदी समेत 49 प्रबुद्ध नागरिकों ने 23 जुलाई के इस पत्र में अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं.
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बता दें इस चिट्ठी में कहा गया है कि 'हम शांतिप्रिय और स्वाभिमानी भारतीय के रूप में, अपने प्यारे देश में हाल के दिनों में घटी कई दुखद घटनाओं से चिंतित हैं.' पत्र में कहा गया है, 'मुस्लिमों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों की पीट-पीटकर हत्या के मामलों को तत्काल रोकना चाहिए. हम एनसीआरबी का आंकड़ा देखकर चौंक गए कि वर्ष 2016 में दलितों पर अत्याचार के कम से कम 840 मामले थे और दोषसिद्धि के प्रतिशत में भी गिरावट आयी.'

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First published: July 24, 2019, 11:51 PM IST
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