LoC के करीब पहली बार महिला सैनिकों की तैनाती, रायफल वूमेन को सौंपी गई जिम्मेदारी

LoC के करीब पहली बार महिला सैनिकों की तैनाती, रायफल वूमेन को सौंपी गई जिम्मेदारी
भारत-पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर तैनात महिला सैनिक

ड्रग्स और जाली नोटों (Drugs and Fake currency) की तस्करी को रोकने के लिए पहली बार LoC के पास महिला सैनिकों की तैनाती की गई है. इन महिला सैनिकों (women soldiers) को एलओसी (LoC) से महज़ 10-12 किलोमीटर दूर तैनात किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 4, 2020, 11:38 PM IST
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तंगधार. करीब 10 हज़ार की फुट ऊंचाई और एलओसी (LoC) से महज़ 10-12 किलोमीटर की दूरी पर हाथों में रायफल उठाए खड़ी ये महिला सैनिक असम राइफल्स  की हैं. ये रायफल वूमेन (rifle women) उत्तर-पूर्व में म्यांमार की सीमा (Myanmar Border) पर तो ऑपरेशन को अंजाम दे चुकी हैं, अब ये एलओसी के पास अपने महारथ दिखाएगी. दरअसल तंगधार में साधना पास (Sadhna Pass) पर नारकोटिक्स (ड्रग्स), नकली करेंसी और हथियारों की तलाशी का काम अब इन्हीं राइफल वूमेन के हाथों में है. ये इलाक़ा पीओके (PoK) के बेहद क़रीब है जहां से पाकिस्तान (Pakistan), आतंकवादियों (Terrorists) की घुसपैठ कराने के साथ-साथ नारकोटिक्स भेजने की कोशिश करता रहता है. जिससे घाटी (valley) में आतंकियों को फ़ंडिंग मुहैया कराई जाती है.

इस जगह पर ड्यूटी के लिए ये रायफल वूमेन (rifle women) पूरी तरह से मुस्तैद हैं. न्यूज़ 18 ने जब इन रायफल वूमेन से बात की तो उन्होंने बताया, “पहले तो हमें 44 हफ़्तों की ट्रेनिंग (training) दी जाती है ताकि हम नार्थ-ईस्ट (north-east) के साथ-साथ देश के किसी भी कोने में ड्यूटी कर सकते हैं, लेकिन इतनी उंचाई के लिए अलग से ट्रेनिंग दी गई है. खास तौर पर यहां की भाषा और रहन-सहन को ध्यान में रखकर. यही नहीं, जिन महिलाओं की हम चेकिंग (checking) करते हैं, वो आराम से चेकिंग में मदद करती हैं. हम लोग इस इलाके से गुज़रने वाली महिलाओं से बातचीत कर जानकारियां (information) भी जुटाती हैं."

ये महिलाएं LoC से 10-12 किमी की दूरी पर तैनात हैं




इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस की महिला पुलिसकर्मियों के जिम्मे थी यह जांच
इससे पहले इस साधना पास के इस पोस्ट पर जम्मू-कश्मीर की महिला पुलिस तैनात हुआ करती थी, जिन्हें अब असम राइफल्स की राफल वूमेन से बदल दिया गया है. सेना ने इसके लिए महिला राइफल वूमेन की एक प्लाटून को लगाया है. इस प्लाटून की 9 राइफल वूमेन सेना की एक महिला कैप्टन के नेतृत्व में इस पोस्ट से गुजरने वाली हर उस गाड़ी की तलाशी का काम करती हैं, जिसमें कोई भी महिला यात्री होती है. इन रायफल वूमेन की टुकड़ी को लीड करने वाली महिला अफसर कैप्टन गुरसिमरन कौर ने बताया कि उनकी टीम इस इलाके में बहुत अच्छे से अपनी ड्यूटी को निभा रही है. और इनके जोश में कोई कमी नहीं है क्योंकि इनकी ट्रेनिंग भी बिलकुल उसी तरह से हुई से जिस तरह से सेना के किसी जवान को दी जाती है.

सर्दियों से तुरंत पहले घुसपैठ के लिए संवेदनशील हो जाता है इलाका
असम राइफल्स की इन रायफल वूमेन को इस इलाके में तैनाती से पहले बाक़ायदा ट्रेनिंग दी गई है, खासतौर पर इस इलाके में बोले जाने वाली भाषा और यहां के रहन सहन को लेकर. तंगधार, सेना के 28 डिवीज़न के तहत आती है. इस डिवीज़न के जीओसी मेजर जनरल एडीएस औजला का मानना है कि पीओके से लगती नॉर्थ कश्मीर में जो कमियां थीं उन्हें पूरा करने के लिए इन्हें यहां तैनात किया गया है.

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आपको बता दें कि लाइन ऑफ कंट्रोल के पास तंगधार और तिथवाल इलाक़े में भारत के करीब 40 गांव पड़ते हैं. लाइन ऑफ कंट्रोल के पास इस गांवों से होकर ही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले घुसपैठ के रास्ते हैं और सर्दियों से पहले से घुसबैठ का सबसे अच्छा समय है. ऐसे में सेन किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहती हैं.
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