कश्मीर घाटी में सामान्य जनजीवन प्रभावित, खुले सरकारी दफ्तर

कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) में बाजारों के नहीं खुलने और सड़कों से सार्वजनिक वाहनों के नदारद रहने के साथ ही गुरुवार को लगातार 25वें दिन भी सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा.

भाषा
Updated: August 29, 2019, 4:16 PM IST
कश्मीर घाटी में सामान्य जनजीवन प्रभावित, खुले सरकारी दफ्तर
कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) में बाजारों के नहीं खुलने और सड़कों से सार्वजनिक वाहनों के नदारद रहने के साथ ही गुरुवार को लगातार 25वें दिन भी सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा.
भाषा
Updated: August 29, 2019, 4:16 PM IST
कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) में बाजारों के नहीं खुलने और सड़कों से सार्वजनिक वाहनों के नदारद रहने के साथ ही गुरुवार को लगातार 25वें दिन भी सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा. अधिकारियों के अनुसार हालांकि शहर के कई भागों में कुछ निजी गाड़ियां दौड़ती नजर आयीं और कुछ रेहड़ी पटरी वाले भी अपना काम-धंधा करते दिखाई दिये.

अधिकारियों के मुताबिक सरकारी कार्यालय खुले रहे लेकिन सार्वजनिक वाहनों की कमी के चलते उनमें से कई में उपस्थिति कम रही जबकि जिला मुख्यालयों में हाजिरी सामान्य रही.

फिलहाल बंद रहेंगी इंटरनेट सेवाएं
वैसे तो घाटी के कई हिस्सों में लैंडलाइन टेलीफोन सेवाएं बहाल कर दी गयी हैं लेकिन मोबाइल टेलीफोन सेवाएं और सभी इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद है. बता दें बुधवार को जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Governor Satyapal Malik) ने कहा था कि इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर गयी हैं क्योंकि लोगों को एकत्र करने तथा युवाओं को बरगलाने में ये आतंकवादियों और पाकिस्तान के लिए ज्यादा उपयोगी है. उन्होंने संकेत दिया कि सेवाएं कुछ और समय तक स्थगित रहेंगी. मलिक ने कहा कि इंटरनेट "सबसे खतरनाक औजार’’ है जिसका इस्तेमाल आतंकवादी और पाकिस्तानी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए करते हैं.

मलिक ने कहा था कि, "इंटरनेट का माध्यम हमारे लिए थोड़ा उपयोगी है, लेकिन यह आतंकवादियों, पाकिस्तानियों के लिए अधिक उपयोगी है. इसका इस्तेमाल भीड़ जुटाने और बरगलाने के लिए भी किया जाता है."

पांच अगस्त से लगे हैं प्रतिबंध
केंद्र द्वारा पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों (Union Territory) में बांटने के बाद राज्य में कई तरह की प्रशासनिक पाबंदियां लगायी गयी थीं.
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ज्यादातर शीर्ष और दूसरी पीढ़ी के अलगाववादी नेताओं (Separatist Leader) को एहतियान हिरासत में ले लिया गया है और तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों-- फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah), उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) और महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) समेत मुख्य धारा के नेताओं को या तो हिरासत में लिया गया है या उन्हें नजरबंद कर दिया गया है.

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First published: August 29, 2019, 4:16 PM IST
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