हर साल Medical, Engineering और दूसरी स्ट्रीम में ग्रेजुएट बनने वाले एक करोड़ युवाओं को चाहिए नौकरी

कार्यकारी परिषद की बैठक में चौथे दीक्षांत समारोह के लिए मंजूरी दी गयी.
कार्यकारी परिषद की बैठक में चौथे दीक्षांत समारोह के लिए मंजूरी दी गयी.

वहीं रोजगार (Employment) कार्यालय का आंकड़ा भी खासा चौंकाने वाला है. हर साल 4 करोड़ से ज़्यादा लोग रोजगार कार्यालय में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं. इन आंकड़ों को लेकर लोकसभा (Lok sabha) में भी मुद्दा उठ चुका है.

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  • Last Updated: September 23, 2020, 12:55 PM IST
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नई दिल्ली. देश में पब्लिक-प्राइवेट यूनिवर्सिटी (University) और कॉलेजों की कोई कमी नहीं है. यह ही वजह है कि हर साल करीब एक करोड़ युवा ग्रेजुएट (Graduate) बनकर तैयार हो जाते हैं. कई अलग-अलग स्ट्रीम के अलावा इसमे एक बड़ा आंकड़ा इंजीनियरिंग (Engineering) का भी है. हर साल ग्रेजुएट बनने वालों की फेहरिस्त में मेडिकल (Medical) फील्ड के युवा भी हैं.

एक करोड़ का यह वो आंकड़ा है जिसे हर साल नौकरी चाहिए. वहीं रोजगार (Employment) कार्यालय का आंकड़ा भी खासा चौंकाने वाला है. हर साल 4 करोड़ से ज़्यादा लोग रोजगार कार्यालय में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं. इन आंकड़ों को लेकर लोकसभा (Lok sabha) में भी मुद्दा उठ चुका है.

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लोकसभा में रखे गए इस आंकड़े ने चौकाया
एजुकेशन मिनिस्ट्री की ओर से हाल ही में एक सवाल के जवाब में हर साल ग्रेजुएट बनने वाले युवाओं के संबंध में कुछ आंकड़े रखे गए हैं. सदन में शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने बताया कि बीते 4 साल में कॉमर्स, ऑर्टस और साइंस समेत दूसरी स्ट्रीम में करीब 3.63 करोड़ युवा ग्रेजुएट बने हैं. वहीं मेडिकल फील्ड की बात करें तो 9.5 लाख युवा ग्रेजुएट बने और उसके बाद एक बड़ा नंबर इंजीनियरिंग का है. इस फील्ड में लगभग 39 लाख युवा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट बने हैं.

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हर साल चार करोड़ से ज़्यादा लोग रोजगार कार्यालय में अपना नाम दर्ज कराते हैं.


यहां हर साल तैयार होते हैं एक करोड़ ग्रेजुएट युवा

एजुकेशन मिनिस्ट्री की ओर से लोकसभा में ही रखे गए आंकड़े बताते हैं कि हर साल करीब 2.5 करोड़ युवा कॉलेज और यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेता है. इसी ढाई करोड़ में से एक करोड़ ग्रेजुएट बनते हैं तो बाकी के पोस्ट ग्रेजुएट और दूसरी हॉयर डिग्री हासिल करते हैं. सदन में रखे गए आंकड़ों के मुताबिक देश में 608 पब्लिक यूनिवर्सिटी और 385 प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं. दोनों तरह की यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 56.32 लाख और 18.54 लाख है. वहीं प्राइवेट कॉलेज का नंबर 30 हज़ार है, जसिमे 1.76 करोड़ छात्र पढ़ते हैं. यह छात्र संख्या हर साल कॉलेज और यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वालों की है.

हर साल 4 करोड़ से ज़्यादा नाम दर्ज होते हैं रोज़गार दफ्तर में

रोज़गार दफ्तर के 2015 से 2017 तक के आंकड़ों पर निगाह डालें तो हर साल 4 करोड़ से भी ज़्यादा लोग अपना नाम दर्ज कराने आते हैं. 2015 में 4.35, 2016 में 4.34 और 4.24 करोड़ था. इसमे सबसे ज़्यादा नंबर केरल तमिलनाडु, महाराष्ट, पश्चिम बंगाल और यूपी का है. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में तो यह आंकड़ा हर साल 75 लाख से ज़्यादा का है. इस आंकड़े में 29 साल तक की उम्र के युवाओं का आंकड़ा हर साल पौने तीन से तीन लाख तक का है.
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