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पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन का एक महीना पूरा, क्या चन्नी बन पाएंगे राज्य के नए 'कैप्टन'

पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन का एक महीना पूरा, क्या चन्नी बन पाएंगे राज्य के नए 'कैप्टन'

Charanjit Singh Channi's Regime: एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि चरणजीत सिंह चन्नी की गति के साथ तालमेल बैठाना बहुत मुश्किल है. वो बगैर सोए घंटों काम कर सकते हैं.

Charanjit Singh Channi's Regime: एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि चरणजीत सिंह चन्नी की गति के साथ तालमेल बैठाना बहुत मुश्किल है. वो बगैर सोए घंटों काम कर सकते हैं.

Charanjit Singh Channi's Regime: एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि चरणजीत सिंह चन्नी की गति के साथ तालमेल बैठाना बहुत मुश्किल है. वो बगैर सोए घंटों काम कर सकते हैं.

    नई दिल्ली. बेटे की शादी से जुड़ा कार्यक्रम होने वाला है, चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के साथ लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) में हैं. वह शादी से कुछ घंटे पहले चंडीगढ़ लौटते हैं, शादी और दावत में शामिल होते हैं और फिर अपने दफ्तर में मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता कर रहे होते हैं, आगे उसी दिन वो पीपीसीसी प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के लखीमपुर खीरी के जुलूस में शामिल होते हैं.

    ये मुख्यमंत्री चन्नी की दिनचर्या है, जिसमें वो बीते दिनों बहुत गति लाए हैं और इस तरह उनका पंजाब की कमान संभाले हुए एक महीना हो गया है. इस दौरान बैठकें करना, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलना, राज्य के चक्कर लगाना, देर रात तक काम करना कुल. मिलाकर बीते एक महीने से वह रुके नहीं हैं. वह कैप्टन अमरिंदर की कमी को पूरा करने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं.

    रविवार को चन्नी की जिद्दी सिद्धू के साथ पांच घंटे तक बैठक चली, जो सुबह 1.15 बजे पर खत्म हुई. अगली सुबह 10 बजे चन्नी सिविल सचिवालय में मंत्रीमंडल की बैठक कर रहे थे. उसके बाद वह मीडिया से मुखातिब हुए और शाम को अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाने के लिए चमकौर साहिब के लिए रवाना हुए.

    इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि उनकी गति के साथ तालमेल बैठाना बहुत मुश्किल है. वो बगैर सोए घंटों काम कर सकते हैं. वह सचिवालय में देर रात तक काम करते हैं, फिर घर जाते हैं और रात के 2.30 बजे किसी सवालों के जवाब के लिए फोन करने लगते हैं. सुबह 5 बजे वो फिर से फाइल उठा कर उस पर काम करने लग जाते हैं. कई अधिकारी तो अब नींद पूरी नहीं होने की शिकायत करने लगे हैं. मुख्यमंत्री की आने वाले चुनाव को लेकर राज्य की व्यापक स्तर पर दौरा करने की योजना है, और वो माझा, दाओबा और मालवा क्षेत्र का दौरा पहले ही कर चुके हैं.

    एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चन्नी बीच खेल में मैदान में उतरे हैं, उन्हें दूसरे खिलाड़ियों के साथ तालमेल बैठाने के लिए दौड़ते हुए मैदान में उतरना था, लेकिन उन्होंने अपनी पारी को अच्छे से निभाया है. वहीं अगर अमरिंदर सिंह की बात की जाए तो वो कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं, पंजाब में उनका एक वजन है, उनके पास सब कुछ उपलब्ध था, उनकी सरकार को परिणाम और शपथ ग्रहण समारोह के बीच में ही एक हफ्ते का वक्त मिला था और उन्होंने इस वक्त का इस्तेमाल घोषणाओं की व्यवस्था में किया.

    वहीं अगर चन्नी की बात की जाए तो जबसे उन्होंने कमान संभाली है, उन्हें हर दिशा में खींचा जा रहा है. वो हाईकमान से बैठक के लिए दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं. सिद्धू जैसे अप्रत्याशित नेता को संभाल रहे हैं. और इन सभी के बीच में ही मुख्यमंत्री ने गरीबों के लिए बिजली बिल के बकाया में छूट और लाल डोरा इलाके में रहने वालों के लिए संपत्ति के अधिकार की प्रक्रिया को शुरू करने में सफलता भी हासिल कर ली है.

    अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही चन्नी ने जोर देकर कहा था कि वो सभी के लिए सुलभ रहने वाले मुख्यमंत्री साबित होंगे, उनके इस बयान को अमरिंदर पर कटाक्ष के तौर पर देखा गया था. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा था कि वह समय बचाने के लिए अपनी कार में ही अपना बिस्तर रखते हैं. उन्होंने उस सुरक्षा के तामझाम को भी लौटा दिया जो अमरिंदर को घेरे रहता था.

    कांग्रेस के विधायक अक्सर ये शिकायत करते थे कि अमरिंदर ने खुद को फार्महाउस तक सीमित करके रखा हुआ है. कांग्रेस के ही विधायक दर्शन बरार कहते हैं कि चन्नी का आना सभी के लिए खुशी की बात है, जिस तरह से मुख्यमंत्री कार्यालय में लोगों की भीड़ नजर आ रही है, ऐसा लगता है कि पूरी कांग्रेस वहां पर मौजूद है. मैंने कभी भी इस जगह पर इतने लोगों का जमावड़ा नहीं देखा है.

    कपूरथला में एक नौकरी मेले के दौरान जिस तरह से वो युवाओं से मिले वह काफी सराहनीय था, उन्होंने युवाओं से कहा कि वो उनके वड्डे प्रा ( बड़े भाई) की तरह है. इसी तरह गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान उन्होंने पुलिस बैंड के एक सदस्य को गले लगाया. इसी तरह अपने बेटे की गुरुद्वारे में हुई शादी में लंगर के लिए जमीन पर बैठे थे. हालांकि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल इसे फोटो खिंचाने का पैंतरा बताते हैं, उनका कहना है कि कांग्रेस के पास पैसा नहीं है या फिर वो एक घोषणाएं पहले करते, वो लोग जानते हैं कि दो महीने बाद आचार संहिता लगने वाली है, इसके बाद उनकी घोषणाओं का भुगतान अगली सरकार करेगी.

    वहीं आप के नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा का कहना है कि चन्नी को पहले ये साफ करना चाहिए की वो बेरोजगारी और पवित्र वस्तु के अनादर वाले मामले पर क्या कर रहे थे. वो सिर्फ हवाई तीर चला रहे हैं. ऐसी दौड़ का क्या मकसद जब जमीन पर कुछ काम ही नहीं हो रहा हो.

    पवित्र वस्तु के साथ बेअदबी, विवादास्पद बिजली खरीदी समझौते और ड्रग रैकेट जिसे निपटाने में अमरिंदर नाकाम रहे थे. उसके अलावा चन्नी को सिद्धू और दूसरे असंतुष्ट तत्वों पर भी नजर बना कर रखनी है. इसी दौरान उनकी उपलब्धियों में एक चीज और जुड़ गई है. चन्नी, कांग्रेस, उसका भीतरी संगठन और यूपीए एवं मोदी शासन के दौरान कांग्रेस के प्रदर्शन पर पीएचडी थीसिस भी लिख रहे हैं. उनके सहयोगियों का मानना है कि वो दिसंबर को लेकर काफी आत्मविश्वास से भरे हुए हैं.

    Tags: Captain Amarinder Singh, Charanjit Singh Channi, Punjab news

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