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गलवान का एक साल: चीन से निपटने के लिए ऐसी है भारत की तैयारी, राफेल समेत कई ताकतें तैनात

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भी कहा था कि भारत हर स्थिति के लिए तैयार है. अब तक दोनों देशों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भी कहा था कि भारत हर स्थिति के लिए तैयार है. अब तक दोनों देशों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)

One Year of Galwan Incident: भारतीय वायुसेना (IAF) ने भी अपने स्तर पर काम शुरू कर दिया है. राफेल के साथ-साथ, मिग-29 और सू-30 जहाजों की टुकड़ी उत्तरी सीमाओं के इलाके में सक्रिय रहेगी. वहीं, इस महीने के अंत तक दूसरा स्क्वाड्रन भी ऑपरेशन के लिए तैयार होगा.

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    नई दिल्ली. गलवान घाटी (Galwan Valley) पर भारत और चीन (India-China) की सेना के बीच हुई झड़प को एक साल होने को आया है. महीनों बाद भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. दोनों ओर से सैन्य ताकत में इजाफा जारी है. खबर आती रही है कि पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में चीन लगातार क्षमता बढ़ा रहा है. हालांकि, मौके पर किसी भी हालात का सामना करने के लिए भारतीय पक्ष भी तैयार है. सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भी कहा था कि भारत हर स्थिति के लिए तैयार है. अब तक दोनों देशों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा बलों ने पूरे लद्दाख सेक्टर में खुद को मजबूत कर लिया है. इस दौरान बलों ने इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर से लेकर संपर्क बढ़ाने और पड़ोसी देश की सेना का सामना करने के लिए अतिरिक्त जवानों को तैनात किया है. एजेंसी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया, 'लद्दाख सेक्टर में अचानक चीनी आक्रमण से हैरान बलों ने खुद को काफी मजबूत कर लिया है.' उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के नजरिए से देखें, तो सबसे बड़ी उपलब्धि सभी अग्रिम मोर्चों के साथ सड़क संपर्क बेहतर होना है.



    अधिकारियों ने जानकारी दी है कि पूरी LAC के साथ-साथ लद्दाख में चीन का सामना करने के लिए अतिरिक्त स्ट्राइक कॉर्प्स तैनात किए गए हैं. उन्होंने कहा, 'मथुरा की वन स्ट्राइक कॉर्प्स को लद्दाक में उत्तरी सीमा पर भेजा गया है. 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स को अतिरिक्त 10 हजार जवान मुहैया कराए गए हैं और उन्हें पूरे उत्तर पूर्वी राज्यों का जिम्मा दिया गया है.'

    यह भी पढ़ें: India-China Standoff: हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा पोस्ट से कब हटेगी सेना? चीन ने दिया ये सुझाव

    एजेंसी के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने भी अपने स्तर पर काम शुरू कर दिया है. राफेल के साथ-साथ, मिग-29 और सू-30 जहाजों की टुकड़ी उत्तरी सीमाओं के इलाके में सक्रिय रहेगी. वहीं, इस महीने के अंत तक दूसरा स्क्वाड्रन भी ऑपरेशन के लिए तैयार होगा. अधिकारियों ने कहा है कि सशस्त्र बलों की तैयारी उस स्तर पर हैं कि चीन या दूसरी मुश्किलें किसी भी तरह से हैरान नहीं कर सकती.

    मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि सेना ने LAC पर पहली बार के-9 तोपें तैनात की हैं. खास बात है की इन तोपों में पहिए लगे होते हैं, जिनकी वजह से इनकी आवाजाही में किसी अन्य गाड़ी का जरूरत नहीं होती. सेना ने M-777 आर्टिलरी गन भी तैनात की हैं. इसके अलावा भारत ने हवाई सुरक्षा की भी पुख्ता व्यवस्था की है.

    कहा जा रहा है कि LAC पर आकाश मिसाइल, इजरायल का स्पाइडर और रूस का पेचोरा तैनात है. इनके साथ सीमा पर रडार बस्टिंग, SPICE 2000, एंटी टैंक गाइडेड मिसालइल आर-73, 400 मीडियम रेंज एयर टू एयर गाइडेड जैसी मिसाइल भी तैनात की हैं. यहां सेना के पास 15-18 महीनों का रसद भी मौजूद है.

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