सोनिया गांधी के दूसरे कार्यकाल का पहला साल: राहुल से ज्यादा उनकी टीम के लिए चुनौती

सोनिया गांधी के दूसरे कार्यकाल का पहला साल: राहुल से ज्यादा उनकी टीम के लिए चुनौती
(PTI)

कांग्रेस के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के इस्तीफे के कुछ महीने बाद यानी अगस्त 2019 में सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने दूसरी बार कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कुर्सी संभाली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 3:39 PM IST
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नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2019 में हार का सामना करने के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी  (Rahul Gandhi) ने इस्तीफा दे दिया. उसके कुछ महीने बाद यानी अगस्त 2019 में सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने दूसरी बार कांग्रेस के अेध्यक्ष पद की कुर्सी संभाली. अगस्त के दूसरे हफ्ते में सोनिया गांधी अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा करेंगी. तब से पार्टी एक राज्य में सत्ता खो चुकी है. दूसरे में कगार पर है. दोनों राज्यों में महत्वाकांक्षी युवा नेताओं के असंतोष से परिस्थितियां बिगड़ीं. चीनी घुसपैठ, कोविड -19 पर सरकार की प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी लाइन को चाक-चौबंद करने में पार्टी का आंतरिक संवाद भी उनके लिए संकट का कारक बनी.

पुराने नेता वर्तमान स्थिति के लिए राहुल के सलाहकारों को दोषी मानते हैं. यह समूह या तो सोनिया गांधी को पूर्ण अधिकार और कार्यकारी शक्तियों के साथ अध्यक्ष के रूप में जारी रखना चाहता है या फिर अगर राहुल को एक साल बाद फिर बागडोर सौंपनी हो तो पार्टी में इस पर व्यापक चर्चा की मांग कर रहा है. राहुल से ज्यादा राहुल की टीम निशाने पर है.

नये कलेवर में राहुल गांधी!
मई 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद गांधी ने पिछले साल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. वहीं पिछले कुछ दिनों में राहुल ने चीनी घुसपैठ पर एक कड़ा रुख अपनाया है, अर्थव्यवस्था पर कोविड -19 के प्रभाव पर विशेषज्ञों के साथ उनकी बातचीत के ऑनलाइन वीडियो जारी किए हैं. कुछ महत्वूपर्ण फैसलों पर राहुल की मुहर है.
वहीं सोनिया गांधी द्वारा पिछले दिनों राज्यसभा सांसदों की बुलाई गई बैठक में सांसद राजीव सातव ने यूपीए 2 सरकार में मंत्री रहे कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी की इस हालत का जिम्मेदार ठहराया था.   बैठक में जब यह सवाल उठा  कि लोगों के साथ कांग्रेस की लोकप्रियता में लगातार गिरावट के पीछे क्या वजह थी, इस पर युवा सांसद राजीव सातव ने कहा कि किसी भी समीक्षा के लिए  यूपीए -2 में वापस जाना होगा. उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार के प्रदर्शन और 2009 के बाद संगठन की उपेक्षा ने पार्टी को गलत दिशा की ओर ढकेल दिया.



CNN-News18 के  पत्रकार सुमित पांडे की यह खबर अंग्रेजी में है. इसे पूरा पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें- https://www.news18.com/news/politics/one-year-of-sonia-gandhi-2-0-challenge-is-not-to-the-leadership-but-rahul-gandhis-advisors-2749077.html
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