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कोरबा जिले में नोनी सुरक्षा योजना से जोड़ी गईं सिर्फ 1200 बेटियां

कोरबा जिले में नोनी सुरक्षा योजना से जोड़ी गईं सिर्फ 1200 बेटियां

महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा.

महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा.

12 लाख से अधिक की आबादी वाले कोरबा जिले में महज 1200 बेटियों को ही नोनी सुरक्षा योजना से जोड़ा जाना महिला एवं बाल विकास विभाग पर सवाल खड़े करता है.

    12 लाख से अधिक की आबादी वाले कोरबा जिले में महज 1200 बेटियों को ही नोनी सुरक्षा योजना से जोड़ा जाना महिला एवं बाल विकास विभाग पर सवाल खड़े करता है.

    गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करने वाले परिवार से जुड़ी 18 साल की उम्र की बेटियों की जरूरतें पिता को पूरी करने में आसानी हो, इसके लिए छत्‍तीसगढ़ सरकार ने नोनी सुरक्षा योजना शुरू की है. योजना को दिसंबर में 4 साल पूरे होने जा रहे हैं.

    इस योजना का जितना प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए था, महिला एवं बाल विकास विभाग की उदासीनता के कारण उतना हो नहीं सका है. सरकार की योजना का लाभ बीपीएल परिवार में जन्म लेनी बाली बेटियों को दिलाना है. इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को जिला से लेकर ग्रामीण स्तर तक तैनात अमले के सहयोग से ऐसे परिवारों का पंजीयन कराते हुए कम से कम एक परिवार से 2 बालिकाओं का नि:शुल्क बीमा करना है. बीमा का लाभ उन बेटियों को 18 साल की उम्र पूरी होने पर एक लाख रुपए के रूप में मिलना है.

    यह राशि पढ़ाई के साथ-साथ उसके शादी-ब्याह और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्च की जा सकती है. जनवरी 2014 में शुरू हुई यह योजना विभागीय उदासीनता के चलते उस मुकाम तक नहीं पहुंच सकी है, जहां तक पहुंचना चाहिए. स्वास्थ्य विभाग के अनुमानित आंकड़ों की मानें तो जिले में हर साल 3 हजार 35 बेटियां जन्म लेती हैं, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग 4 साल में 1200 बेटियों को ही बीमित कर पाया है. बेटियों की जन्मदर को देखते हुए यह आंकड़ा कहीं से भी फिट नहीं बैठता.

    Tags: Korba news, Women and Child Development Department

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