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अयोध्या का फैसला: मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने की शांति की अपील

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 5:59 AM IST
अयोध्या का फैसला: मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने की शांति की अपील
देश भर में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं.

राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद (Ramjanm bhoomi Babari Masjid) विवाद मामले में शनिवार सुबह सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले देश भर में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 5:59 AM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अयोध्या (Ayodhya) से जुड़े दशकों पुराने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद  (Ramjanm bhoomi Babari Masjid) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) शनिवार को फैसला सुनाएगा. इससे पहले हर ओर से शांति की अपील की जा रही है. राजनेताओं, धर्मगुरुओं और प्रमुख नागरिकों की ओर से अपील की जा रही है कि सभी सौहार्द और सद्भाव बनाए रखें. हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि मुसलमानों से अधिक बहुसंख्यक हिंदू समुदाय की जिम्मेदारी है कि वे शांति बनाए रखें.

News18 से विशेष बातचीत करते हुए प्रसिद्ध कवि मुनव्वर राणा ने कहा कि राष्ट्र के हिंदू देश के मुसलमानों के संरक्षक हैं. उन्होंने कहा 'राज्य और देश में मौजूदा स्थिति में… जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शीघ्र ही अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की उम्मीद है. हमारे सभी उलेमा (मुस्लिम विद्वान), राजनीतिक नेता और धर्म गुरु (धार्मिक नेता) मुसलमानों को बता रहे हैं कि क्या करना है और क्या नहीं करना है. लेकिन, मेरे विचार के अनुसार, इस देश में सबसे बड़ी जिम्मेदारी बहुमत के साथ है.'

जब मैं पाकिस्तान गया था....
कहा कि 'लगभग 30 साल पहले जब मैं पाकिस्तान गया था, जो तब हमारा दुश्मन देश था और जो आज हमारा दुश्मन देश भी है, मुझे याद है कि मैंने एक साक्षात्कार में उनसे कहा था कि मैं 80 करोड़ हिंदुओं के घेरे में रहता हूं और इससे बड़ी कोई सुरक्षा नहीं हो सकती है. आज इस देश के हिंदुओं को यह साबित करना होगा कि मुसलमान उनकी निगरानी में रहते हैं. यह मुसलमानों की एकमात्र जिम्मेदारी नहीं है.'

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि 'हम सभी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं और मैं यह कहना चाहूंगा कि मुसलमानों को शीर्ष अदालत के फैसले को स्वीकार करना चाहिए चाहे वह किसके पक्ष में आए. यहां तक ​​कि मैं हिंदू भाइयों से भी अपील करना चाहूंगा कि वे सुप्रीम कोर्ट से जो भी फैसला आए, उसे स्वीकार करें. हिंदू समाज के धर्मगुरुओं को भी अपने समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील करनी चाहिए, भले ही यह आदेश उनके पक्ष में न आए.'

'फ़ैसले का सभी का सम्मान करना चाहिए'
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य और प्रसिद्ध सुन्नी धर्मगुरु खालिद रशीद फिरंगा महली ने भी कहा कि 'फ़ैसले का सभी का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अयोध्या पर अंतिम फैसला जल्द ही होने की उम्मीद है और हमने इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया, लखनऊ में एक शांति सम्मेलन के लिए बुलाया था जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था और शांति और भाईचारे का संदेश दिया. सभी को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करना चाहिए और किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली कोई बात नहीं कहनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए.'
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First published: November 9, 2019, 4:26 AM IST
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