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OPINION: इतनी बदहाल है बिहार की शिक्षा व्यवस्था, सुधारने के लिए उठाने होंगे कडे़ कदम

News18Hindi
Updated: November 21, 2019, 7:10 PM IST
OPINION: इतनी बदहाल है बिहार की शिक्षा व्यवस्था, सुधारने के लिए उठाने होंगे कडे़ कदम
बिहार में विश्वविद्यालयों का काम सिर्फ परीक्षा लेना भर रह गया है

सवाल उठता है कि एक समय में जिसे 'ऑक्सफोर्ड ऑफ बिहार' कहा जाता था, वह रैंकिंग में सबसे घटिया प्रदर्शन करने वाली संस्था कैसे बन गई? बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Bihar Deputy CM Sushil Kumar Modi) जेएनयू (JNU) को इतने हमलावर हो जाते हैं, वो अपने ही राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों की गिरती हालत पर नजरें क्यों फेर लेते हैं?

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  • Last Updated: November 21, 2019, 7:10 PM IST
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  (राहुल कुमार)

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru University) के छात्र हॉस्टल फीस सहित अन्य शुल्कों में बढ़ोत्तरी के खिलाफ लगातार आंदोलनरत हैं. वे लाठीचार्ज और भारी भरकम पुलिसिया इंतजाम के बावजूद अपनी मांगों को लेकर जेएनयू परिसर (JNU Campus) से संसद मार्च (Parliament March) कर रहे हैं. आंदोलन और संघर्ष का रास्ता अख्तियार कर रहे छात्रों पर देश का एक वर्ग हमलावर भी हैं. इसी कड़ी में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Bihar Deputy CM Sushil Kumar Modi) भी जेएनयू छात्रों पर तीखा हमला कर रहे हैं. हालांकि, जिस वक्त सुशील कुमार मोदी उच्च शिक्षा के सबसे बेहतरीन संस्थान के छात्रों पर तीखा हमला कर रहे थे, उसी वक्त बिहार के पटना विश्वविद्यालय (Patna University) के तहत आने वाले 144 साल पुराने पटना कॉलेज (Patna College) को नैक ने 1.62 प्वाइंट के साथ 'सी' ग्रेड दिया था. सवाल उठता है कि एक समय में जिसे 'ऑक्सफोर्ड ऑफ बिहार' कहा जाता था, वह रैंकिंग में सबसे घटिया प्रदर्शन करने वाली संस्था कैसे बन गई? बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी जेएनयू को इतने हमलावर हो जाते हैं, वो अपने ही राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों की गिरती हालत पर नजरें क्यों फेर लेते हैं? गौरतलब है कि नैक की ग्रेडिंग में पटना विश्वविद्यालय भी ‘बी‘ ग्रेड ही हासिल कर सका, जबकि अन्य विश्वविद्यालयों की हालत बेहद खराब हैं.

बिहार में विश्वविद्यालयों का काम सिर्फ परीक्षा लेना भर रह गया है. अभी राज्य के कॉलेजों में कुल 12,893 शिक्षकों का पद स्वीकृत है, लेकिन इसकी तुलना में सिर्फ 5318 शिक्षक ही कार्यरत हैं और 7575 शिक्षकों के पद खाली हैं. यह तस्वीर सिर्फ मौजूदा कॉलेज और विश्वविद्यालयों को लेकर है. बिहार के उच्च शिक्षा को लेकर कई चिंताजनक तस्वीर हैं. बिहार में 22 विश्वविद्यालय हैं और इसके तहत करीब 744 कॉलेज चल रहे हैं. इसका मतलब यह हुआ कि राज्य में प्रत्येक लाख की आबादी पर महज 7 कॉलेज हैं, जबकि देश में प्रति लाख औसतन 28 कॉलेज हैं. जाहिर है बहुत बड़ी आबादी गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा से वंचित हैं. इस तरह से बिहार की बहुत बड़ी आबादी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बगैर जवान हो रही है.

लाखों बच्चे पढ़ने के लिए जाते हैं बाहर

राज्य की करीब 32 फीसदी आबादी 16-17 के आयु वर्ग की है और इसका सिर्फ 44.07 फीसदी हिस्सा ही माध्यमिक से उच्च माध्यमिक शिक्षा की तरफ जा रहा है, जबकि प्राथमिक से माध्यमिक में स्थानांतरित होने वाले बच्चों का प्रतिशत 84.64 है. इसका मतलब यह हुआ कि बिहार की बहुत बड़ी आबादी बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के श्रम बल में कन्वर्ट हो रहा है. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के आस-पास की गुणवत्ता वाला एक भी विश्वविद्यालय या कॉलेज इस राज्य के छात्रों को उपलब्ध नहीं है. हर साल राज्य के लाखों बच्चे दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, जामिया मिलिया इस्लामिया, बीएचयू और देश के दूसरे हिस्से में मौजूद विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा और शोध के लिए जाने को मजबूर हैं.

ऐसा नहीं है कि बिहार में सिर्फ उच्च शिक्षा की हालत बद से बदतर है, बल्कि प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्कूलों का हाल भी बेहाल है. एक समय में नीतीश कुमार की सरकार जहां लाखों लड़कियों को साइकिल देकर स्कूल तक लाने में सफल रहे, लेकिन अब वे इससे आगे बढ़ते नहीं दिख रहे हैं. राज्य सरकार का पूरा फोकस वोट बैंक पर शिफ्ट हो गया है. वे मैट्रिक, इंटरमीडिएट और स्नातक में फर्स्ट डिविजन आने वाले बच्चों को नगद इनाम देने में ज्यादा यकीन करते हैं. वे इन बच्चों को बेहतर शिक्षा की जगह कैश कंपोनेंट पर काम करते हैं, क्योंकि यह कैश उनको संबंधित घरों में लोकप्रिय बनाए रखने में मददगार होता हैं. बिहार के पास 'डेमाग्राफिक डिविडेंड' का लाभ उठाने का बड़ा मौका है, लेकिन उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई देती है.

92% स्कूलों में कंप्यूटर नहींबिहार के किसी भी शहर की सड़कों पर सुबह सुबह घूम लें. लगभग सभी शहरों में कुकुरमुत्ते की तरह कोचिंग संस्थान और उसमें पढ़ने वाले हजारों बच्चे साइकिल और उसके कैरियर पर कॉपी-किताब दबाए हुए दिख जाएंगे. वे बच्चे स्कूल और कॉलेज में नहीं होने वाली पढ़ाई की भरपाई कोचिंग संस्थानों में जाकर करते हैं. असर की 2016 की रिपोर्ट और डाइस की स्कूल एजुकेशन इन इंडिया रिपोर्ट बताता है कि बिहार के करीब 92 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर नहीं है. इसी तरह से 40 फीसदी स्कूलों के पास ही बिजली है और करीब 38 फीसदी स्कूलों के पास की खेल का मैदान है.

राइट टू एजुकेशन के नॉर्म्स के अनुसार राज्य के प्राथमिक स्कूलों में करीब 2,75,000 शिक्षकों की कमी है. शिक्षकों की इतनी कमी के बावजूद इनका बड़ा हिस्सा मिड डे मील से लेकर गैर शैक्षणिक कार्यों में फंसा रहता है. हालांकि, शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया जारी है और करीब एक लाख शिक्षकों की भर्ती करने की फिलहाल योजना है. लेकिन सरकार की मंशा शिक्षकों की भर्ती कम बल्कि दिखने और दिखाने का ज्यादा है. हर जिला अलग-अलग रोस्टर के साथ शिक्षकों की भर्ती कर रहा है, इससे एक-एक अभ्यर्थी दर्जनों जगह पर फॉर्म भर रहे हैं. ऐसे में किसी अभ्यर्थी का चयन एक से अधिक स्थानों पर होने की स्थिति में बाकी जगहों पर दोबारा भर्ती की प्रक्रिया शुरू करना होगा.

केंद्रीय विद्यालय का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री रहते उपेंद्र कुशवाहा ने 2016 में बिहार के करीब 10 जगहों पर केंद्रीय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव राज्य को दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसमें किसी तरह की रुचि नहीं दिखाई. औरंगाबाद और नवादा में तो जमीन आवंटन होने के बावजूद सरकार केंद्रीय विद्यालय को जमीन स्थानांतरित नहीं कर रही है और इसका खामियाजा हजारों छात्रों को हो रहा है. हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने राज्य सरकार को एक बार फिर जमीन आवंटन के लिए लिखा है. केंद्रीय विद्यालय के सवाल पर पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा विधानसभा सत्र के दौरान अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने वाले हैं.

जेएनयू का आंदोलन बिहार के लिए भी विचार करने का समय है. इसे शिक्षा की व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने के लिए कुछ गंभीर कदम उठाने होंगे. राज्य में युवाओं की बड़ी आबादी को देखते हुए अगर समय रहते शिक्षा में व्यापक और गुणवत्तापूर्वक सुधार नहीं किया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहना होगा.

(लेखक पेशे से एजुकेशन एंटरप्रेन्योर हैं यह उनके निजी विचार हैं)

 

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First published: November 21, 2019, 7:06 PM IST
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