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OPINION: नागरिकता संशोधन बिल–धार्मिक अत्याचार झेल रहे लोगों पर मोदी सरकार का मरहम

Anil Rai | News18Hindi
Updated: December 4, 2019, 5:31 PM IST
OPINION: नागरिकता संशोधन बिल–धार्मिक अत्याचार झेल रहे लोगों पर मोदी सरकार का मरहम
मोदी सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से आसानी से पास हो जाएगा बिल

बुधवार को कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन विधेयक पास कर दिया है. लोकसभा और राज्यसभा के जो आंकड़े हैं उससे साफ है कि सदन में ये बिल पास हो ही जाएगा और जल्द से जल्द कानून बन जाएगा.

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  • Last Updated: December 4, 2019, 5:31 PM IST
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नागरिकता संशोधन बिल के बहाने मोदी सरकार ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से धार्मिक अत्याचार के कारण भारत में शरण के लिए आए लोगों पर मरहम लगाने का काम किया है. बिल का समर्थन कर रहे नेताओं का कहना है कि भारत से सटे तीनों देश मुस्लिम देश हैं, ऐसे में गैर मुस्लिमों को यहां लगातार धार्मिक कारणों से प्रताड़ित किया जा रहा है. यही कारण है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भागकर ये लोग भारत आ रहे हैं.

भारत क्योंकि एक धर्मनिरपेक्ष देश है, ऐसे में भारत की जिम्मेदारी बनती है कि वो मुस्लिम देशों में धार्मिक अत्याचार झेल रहे नागरिकों को संंरक्षण दे. भारत ऐसा कर भी रहा है लेकिन नागरिकता पाने का रास्ता इतना कठिन है कि इन देशों से आए गैर मुस्लिम लोगों को भारत की नागरिकता नहीं मिल पा रही है. हालांकि इस बिल के कानून बन जाने से अब ये रास्ता आसान हो जाएगा.

मोदी सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से आसानी से पास हो जाएगा बिल
बुधवार को कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन विधेयक पास कर दिया है. लोकसभा और राज्यसभा के जो आंकड़े हैं उससे साफ है कि सदन में ये बिल पास हो ही जाएगा और जल्द से जल्द कानून बन जाएगा, हालांकि इस विधेयक पर भी एनआरसी और धारा 370 जैसा घमासान देखने को मिल रहा है. जिस तरह मोदी सरकार ने मजबूत इच्छा शक्ति से तीन तलाक बिल, धारा 370 जैसे बिल पास करा लिए उसके बाद ये बिल लोकसभा या राज्यसभा में रुकेगा इसकी उम्मीद न के बराबर है. हालांकि विपक्ष इस बिल में कुछ संशोधनों से खफा है, लेकिन लोकसभा का गणित बताता है कि उसके पास हंगामे के अलावा कोई रास्ता नहीं है. हंगामे से बिल लेट भले हो जाए लेकिन उसे पास होने से रोका नहीं जा सकता है.

अब आसानी से मिलेगी नागरिकता
दरअसल लंबे समय से पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थी भारत की नागरिकता की आस लगाए बैठे हुए हैं. एक आंकड़े के मुताबिक देश में नागरिकता की उम्मीद लगाए गैर मुस्लिम शरणार्थियों की संख्या करीब 1 करोड़ के आस-पास है. नागरिकता कानून 1955 के हिसाब से भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य होता है, लेकिन नए संशोधन के बाद इस समय-सीमा को घटाकर 6 साल किया जा सकता है. साफ है सरकार पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को आसानी से भारत की नागरिकता देने की तैयारी में है. साथ ही इससे उनके उन घावों पर मरहम लगाने की कोशिश में है जिसके कारण वो अपना देश छोड़ने को मजबूर हुए थे.

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First published: December 4, 2019, 2:12 PM IST
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