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OPINION: क्या सोनिया के भरोसेमंद मनमोहन सिंह फिर संसद में करेंगे वापसी?

मनमोहन सिंह (फ़ाइल फोटो)

मनमोहन सिंह (फ़ाइल फोटो)

राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान मनमोहन सिंह यूजीसी में ज्यादातर समय दरकिनार रहे. 22 जून 1991 को मनमोहन सिंह को यूजीसी के ऑफिस में फोन आया. लाईन पर नरसिम्हा राव थे.

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    (राशिद किदवई)

    क्या मनमोहन सिंह दोबारा वापसी करेंगे? 1991 के बाद ये पहला मौका है जब वो पार्लियामेंट से बाहर हैं. लेकिन इस बात की काफी संभावना है कि वो राज्यसभा में छठी बार डीएमके के समर्थन से वापसी कर लेंगे.
    डॉक्टर वायके अलघ ने एक बार कहा था कि मनमोहन सिंह भारत के सबसे अंडररेटेड नेता रहे हैं साथ ही बतौर अर्थशात्री उन्हें काफी बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया. कांग्रेस में हर कोई ये कहता है कि वो कई प्रधानमंत्रियों के खास थे. इसमें चरण सिंह, इंदिरा गांधी, चन्द्रशेखर और पीवी नरसिंह राव शामिल हैं.

    राजीव गांधी ने मनमोहन को कहा- 'जोकर'
    साल 1985 में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे उस वक्त मनमोहन सिंह योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे. पूर्व गृह सचिव सीजी सोमया जो सीएजी से रिटायर हुए उन्होंने अपनी आत्मकथा में मनमोहन सिंह और राजीव गांधी का ज़िक्र किया है. आत्मकथा में लिखा है कि राजीव गांधी ने एक बार मनमोहन सिंह के नेतृत्व में योजना आयोग को जोकरों की जमात (बंच ऑफ जोकर्स) कहा था.

    उस वक्त कहा गया कि राजीव गांधी की टिपण्णी से मनमोहन सिंह दुखी हो गए थे. वो योजना आयोग से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे थे.



    सोमया ने अपनी किताब में दावा किया है कि उस उक्त उन्होंने मनमोहन सिंह को मनाया था. उन्होंने लिखा है, ''मैं मनमोहन के साथ एक घंटे तक बैठा, उन्हें मनाया. उन्हें कहा कि प्रधानमंत्री युवा हैं हमें उन्हें समझाने की जरूरत है. आखिरकार मैं उन्हें मनाने में कामयाब रहा.''

    नरसिम्हा राव का बुलावा
    हालांकि अर्थशास्त्री विवेक कौल ने इस घटना का जिक्र अलग तरीके से किया है. उन्होंने एक कॉलम में लिखा, ''जोकर कहने के बाद भी मनमोहन सिंह योजना आयोग में अपने पद पर बने रहे. इससे ये साबित होता है कि वो कोई कड़ा फैसला नहीं ले सकते बल्कि वो हालात से समझौता करने वाले हैं.''

    राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान मनमोहन सिंह यूजीसी में ज्यादातर समय दरकिनार रहे. 22 जून 1991 को मनमोहन सिंह को यूजीसी के ऑफिस से फोन आया. लाईन पर नरसिम्हा राव थे. वो प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले थे. उन्होंने मनमोहन सिंह को कहा, '' वहां क्या कर रहे हैं? घर जाइए कपड़े बदलिए और सीधे राष्ट्रपति भवन आ जाइए.''

    आर्थिक सुधर जिन्होंने देश बदल दिया
    24 जून 1991 को मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के तौर पर पहली बार प्रेस कॉन्फेंस की. यहां उन्होंने रिफॉर्म की बातें की. उन्होंने विकास में रोड़े अटकाने वाली चीजों को खत्म करने के संकेत दिए.

    24 जुलाई 1991 को जब अपने भाषण में उन्होंने राजीव गांधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपये देने की बात की तो पार्लियामेंट में कांग्रेस के नेताओं ने जमकर तालियां बजाई. राजीव गांधी फाउंडेशन की प्रमुख सोनिया गांधी थीं लिहाजा इस मुद्दे पर उन दिनों खासा विवाद भी हुआ था. लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर उन्होंने 100 करोड़ कि रेवड़ियां कैसे बांट दी.



    विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया. कहा गया कि सरकार टैक्स देने वालों के पैसे को प्राइवेट ट्रस्ट को बांट रही है. सोनिया, प्रियंका, राहुल और अमिताभ बच्चन इसके ट्रस्टी थे. इस फंड को वापस लेने से सकार की और किरकिरी हो जाती.

    इस बीच नरसिम्हा राव ने इस मुद्दे पर मनमोहन सिंह को सोनिया के सामने सरकार का पक्ष रखने को कहा. मनमोहन और सोनिया में बातचीत हुई लेकिन वो सोनिया से कुछ भी पूछने की हिम्मत नहीं जुटा सके.

    सोनिया गांधी ने राव को चिट्ठी लिखी और उस फंड को वापस ले लिया गया. उन्होंने सरकार को धन्यवाद दिया और कहा कि सरकार किसी दूसरे प्रोजेक्ट को पैसा दे.

    ऐसे बड़े नेता बने मनमोहन
    इस तरह से मनमोहन सिंह की राजनीतिक पारी की शुरुआत हो गई. सीताराम केसरी को हटाकर सोनिया गांधी खुद कांग्रेस की अध्यक्ष बन गईं. इसके बाद सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को बड़े नेता के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया.

    मनमोहन सिंह ने कोई चुनाव नहीं जीता था. सोनिया गांधी ने दक्षिण दिल्ली से मनमोहन सिंह को लोकसभा का टिकट दे दिया. वो 30 हज़ार वोटों से विजय कुमार मल्‍होत्रा से हार गए.

    एके एंटनी के नेतृत्व में कांग्रेस ने एक कमेटी बनाई. इनका काम था 1996 और 1998 के आम चुनाव में हार की समीक्षा करना. इस कमेटी ने मनमोहन सिंह के आर्थिक उदारीकरण को हार के लिए ज़िम्मेदार ठहराया. लेकिन सोनिया गांधी इस तर्क को मानने के लिए तैयार नहीं थीं.

    सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को राज्यसभा में विपक्ष का नेता बना दिया. इसके बाद 2004 से लेकर 2014 तक प्रधानमंत्री रहे.

    (ये लेखक का निजी राय है, इससे न्‍यूज 18 का कोई संबंध नहीं है.)

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