Home /News /nation /

Opinion: पीएम मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की यूपी सरकार ने पूर्वांचल में पकड़ी विकास की रफ्तार

Opinion: पीएम मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की यूपी सरकार ने पूर्वांचल में पकड़ी विकास की रफ्तार

साल 2017 में जब भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 403 में से 325 सीटें अपने नाम की थी, तब पार्टी ने मुस्लिम बहुल इलाकों में भी अच्छा प्रदर्शन किया था. (फोटो: ANI)

साल 2017 में जब भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 403 में से 325 सीटें अपने नाम की थी, तब पार्टी ने मुस्लिम बहुल इलाकों में भी अच्छा प्रदर्शन किया था. (फोटो: ANI)

इससे पहले 13 दिसंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की मौजूदगी में काशी विश्वनाथ कॉरीडोर का लोकार्पण किया. इसका निर्माण 700 करोड़ रुपये की लागत से 33 महीने के अंदर किया. कुछ समय पहले तक यह संभव ही नहीं लगता था कि काशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा के दर्शन भी हो सकते हैं. पहले मंदिर तक जाने के लिए बेहद संकरा रास्ता था, लेकिन अब लाखों श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने पर भी कोई परेशानी नहीं होगी.

अधिक पढ़ें ...

नई दिल्ली.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 दिसंबर को अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी फिर पहुंचे और वहां के विकास के लिए दो हज़ार करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात दी. वाराणसी-जौनपुर मार्ग पर उन्होंने करखियांव इलाक़े में अमूल प्लांट का शिलान्यास किया. पिछले 10 दिन में यह प्रधानमंत्री का दूसरा वाराणसी दौरा है. अमूल प्लांट से आसपास के 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांव दूध क्रांति से जुड़ जाएंगे. इस प्लांट में दूध से निर्मित आइसक्रीम, पनीर, मक्खन, घी और खोया जैसे उत्पाद भी बनाए जाएंगे. गुजरात के उदाहरण से देखें, तो अमूल प्लांट लगने से बहुत से दूध उत्पादक किसान परिवारों की आमदनी बहुत बढ़ने वाली है, यह निस्संदेह कहा जा सकता है. वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके साथ ही 2100 करोड़ रुपये की 27 परियोजनाओं की सौगात अपने संसदीय क्षेत्र को और दी.

काशी विश्वनाथ कॉरीडोर का शिलान्यास
इससे पहले 13 दिसंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की मौजूदगी में काशी विश्वनाथ कॉरीडोर का लोकार्पण किया. इसका निर्माण 700 करोड़ रुपये की लागत से 33 महीने के अंदर किया. कुछ समय पहले तक यह संभव ही नहीं लगता था कि काशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा के दर्शन भी हो सकते हैं. पहले मंदिर तक जाने के लिए बेहद संकरा रास्ता था, लेकिन अब लाखों श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने पर भी कोई परेशानी नहीं होगी. काशी विश्वनाथ कॉरीडोर के निर्माण ने 241 साल बाद मंदिर की भव्यता उजागर की है. इससे पहले 1777 से 1780 के बीच मराठा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था.

पूर्वांचल को चमकाने का संकल्प
23 दिसंबर, 2021 को वाराणसी की अपनी एक और संक्षिप्त यात्रा में स्पष्ट कर दिया कि वे अपने संसदीय क्षेत्र के साथ ही पूरे पूर्वांचल को विकास की चमचमाती सड़क पर सरपट दौड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. हम जानते हैं कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकारें होने की वजह से स्वाभाविक रूप से विकास की रफ़्तार तेज़ हुई है. नरेंद्र मोदी हर यूपी दौरे में इसका ज़िक्र करना नहीं भूलते. वे इस व्यवस्था को डबल इंजन की सरकार करार देते हैं.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी या गठबंधन की सरकारों वाली व्यवस्था में विकास तो होता है, लेकिन कई बार यह भी देखने को मिलता रहा है कि चुनाव में इसका फ़ायदा बीजेपी को नहीं मिला है. मध्य प्रदेश और झारखंड में ऐसा होता हुआ हम देख चुके हैं. लेकिन जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, तो जितने राजनैतिक सर्वे अभी तक सामने आए हैं, उनसे यही स्पष्ट होता है कि योगी आदित्य नाथ सरकार के कामकाज से ज़्यादातर लोग ख़ुश हैं और प्रदेश में बीजेपी सरकार दोबारा आने की पूरी संभावना है.

राजनीतिक आकलनों में उलट-फेर होता रहा है और हो सकता है, लेकिन ज़मीनी हालात पर नज़र डालें, तो इतना तो बेशक कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने पूर्वांचल की कायापलट कर दी है. एक समय था, जब गोरखपुर और आसपास के इलाकों से रोज़ाना दिमाग़ी बुखार से बच्चों की मौतों की ख़बरों से अख़बार पटे रहते थे. टीवी न्यूज़ चैनलों पर भी दिमाग़ी बुखार से जुड़े लंबे-लंबे प्रसारण किए गए. तब यह भी कहा जाता था कि हालात में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है. लेकिन यूपी में बीजेपी सरकार आने के बाद हालात बदल गए, यह सच्चाई है और सबके सामने है.

सुधर गई पूर्वांचल की सेहत
गोरखपुर-बस्ती मंडल में पहले गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करता था. लेकिन अब ऐसा नहीं है. पूर्वांचल के सात ज़िलों की इतनी बड़ी आबादी का बोझ संभालते संभालते यह मेडिकल कालेज खुद बीमार हो चला था. गोरखपुर-बस्ती मंडल में अब चार मेडिकल कॉलेज चल रहे हैं. एक का शिलान्यास हो चुका है, जबकि बाकी दो जिलों के लिए भी कार्ययोजना बन रही है. साथ ही एम्स की भी सौगात भी गोरखपुर को मिली है. हम कह सकते हैं कि पूर्वांचल में स्वास्थ्य सेवाओं में कई गुना इज़ाफ़ा हो चुका है.

गोरखपुर को मिला विश्वस्तरीय एम्स
गोरखपुर में एम्स शुरू होने का श्रेय योगी आदित्य नाथ को ही देना होगा. क़रीब दो दशक से वहां एम्स की मांग हो रही थी. योगी आदित्य नाथ की अगुवाई में 2004 में इसके लिए बड़ा आंदोलन भी हुआ था. सांसद के तौर पर उन्होंने संसद में ज़ोरदार ढंग से पूर्वांचल में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर किए जाने की मांग उठाई और 22 जुलाई, 2016 को गोरखपुर में एम्स का बाक़ायदा शिलान्यास कर दिया गया. तब अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे. ज़ाहिर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने से मतलब था, इसलिए उन्होंने पार्टीगत भेदभाव दूर रखते हुए गोरखपुर को एम्स की सौगात देकर सांसद योगी के संघर्ष का फल दे दिया.

मार्च, 2017 में यूपी में राजनैतिक नेतृत्व बदला और योगी सीएम बन गए और एम्स के निर्माण में अपेक्षित तेज़ी आ गई. एम्स में हर तरह के इलाज के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं हैं, विशेषज्ञ हैं. इनमें लगातार सुधार किया जाता रहेगा. गोरखपुर एम्स का लाभ सिर्फ़ यूपी के पूर्वांचल के लोगों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि बिहार, झारखंड और पड़ोसी देश नेपाल के लोग भी उठा सकेंगे. अनुमान है कि लगभग सात करोड़ लोग इससे फ़ायदा ले सकेंगे. आगमी समय में गोरखपुर में यूपी का पहला आयुष विश्वविद्यालय भी शुरू हो जाएगा, 28 अगस्त, 2021 को जिसका शिलान्यास राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद चुके हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्टूबर, 2021 को भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल कुशीनगर गए और प्रदेश का तीसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा राष्ट्र को समर्पित किया. उन्होंने मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास भी किया. इसके पांच दिन बाद वे 25 अक्टूबर को बुद्ध की क्रीड़ास्थली सिद्धार्थनगर गए और उत्तर प्रदेश के नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण किया. गोरखपुर-बस्ती मंडल में उनका तीसरा दौरा था, जहां उन्होंने खाद कारख़ाने और एम्स समेत 9650 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाओं का लोकार्पण किया.

विकास की नई रफ़्तार पूर्वांचल एक्सप्रेस वे
नवंबर, 2021 के मध्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का लोकार्पण किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने बताया कि 19 महीने के कोरोना काल के बावजूद 36 महीने के रिकॉर्ड समय में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे तैयार हो गया. जुलाई, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया था. इस एक्सप्रेस वे ज़रिये लखनऊ पूर्वांचल से सीधे जुड़ गया है. इससे लगभग आठ करोड़ यूपी निवासियों के लिए तरक्क़ी की सीधी राह खुल गई है.

20 दिसंबर, 2021 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जौनपुर के मछलीशहर में 1538 करोड़ रुपये की लागत से तीन राष्ट्रीय राजमार्गों और कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी. उन्होंने वादा किया कि सारी सड़कें अमेरिका जैसी सड़कों की तरह बनाई जाएंगी.

लौट रहा है काशी का प्राचीन गौरव
ख़ासतौर पर वाराणसी की बात करें, तो काशी का प्राचीन गौरव लौट रहा है, साथ ही पुण्यनगरी आधुनिक विकास की राह पर भी तेज़ी से चल निकली है. शहर की संकरी गलियां अपने पुराने स्वरूप के साथ स्मार्ट भी हो रही हैं. ‘री-डेवलपमेंट ऑफ ओल्ड काशी योजना’ के तहत गलियों को चमकाने के साथ ही हाईटेक भी किया गया है. गलियों की दीवारों पर संस्कृतिक चित्रकारी की गई है. सीवर, पानी की निकासी के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं. तार अंडरग्राउंट कर दिए गए हैं. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दशाश्वमेध वॉर्ड 16.22 करोड़ रुपये, काल भैरव वॉर्ड 16.24 करोड़, राजमंदिर वॉर्ड 13.53 करोड़, जंगमबाड़ी वॉर्ड 12.65 करोड़ रुपये में और वाराणसी डेवलपमेंट अथॉरिटी की ओर से गढ़वासी टोला वॉर्ड 9.60 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक हो चुके हैं.

दो महीने में पीएम के चार पूर्वांचल दौरे
पिछले क़रीब दो महीने के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार बार पूर्वांचल का दौरा कर चुके हैं. इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की मौजूदगी में वे कई बड़े प्रोजेक्टों का लोकार्पण कर चुके हैं. पूर्वांचल की पहचान अब पिछड़ापन नहीं रहेगा. गोरखपुर, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर में केंद्र सरकार और राज्य सरकार स्वास्थ्य, संचार और समृद्धि की 12.50 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा की परियोजनाओं का लोकार्पण हाल ही में हो चुका है. इस मौक़े पर 255 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया.

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात ज़िलों की 41 में से 36 विधानसभा सीटें बीजेपी की झोली में गई थीं. ज़ाहिर है कि 2022 के चुनाव यह देखना दिलचस्प रहेगा कि पांच साल तक विकास की इमारत बनने के बाद पूर्वांचल का मिज़ाज क्या रहता है. बीजेपी की सीटें बढ़ेंगी या घटेंगी? वैसे बीजेपी को पूरी उम्मीद है कि उसके शासन काल में विकास के काम जिस रफ़्तार से हुए हैं, उन्हें देखते हुए इस बार पार्टी को 350 से ज़्यादा सीटें मिलेंगी.

Tags: PM Modi, Purvanchal, Purvanchal Expressway, Purvanchal Politics, UP Purvanchal Politics

विज्ञापन
विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर