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OPINION: केरल 'लॉबी' का विरोध, महाराष्ट्र के विधायकों का मन- शिवसेना को लेकर पसोपेश में सोनिया गांधी

News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 1:35 PM IST
OPINION: केरल 'लॉबी' का विरोध, महाराष्ट्र के विधायकों का मन- शिवसेना को लेकर पसोपेश में सोनिया गांधी
शिवसेना को समर्थन देने को लेकर सोनिया गांधी ने कांग्रेस वर्किंग कमिटी के साथ मीटिंग की.

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका के बीच कांग्रेस विधायकों (Congress MLAs) को जयपुर में शिफ्ट किया गया है. ये सभी विधायक चाहते हैं कि पार्टी शिवसेना-एनसीपी (Shiv Sena-NCP) की संभावित सरकार को बाहरी समर्थन दे और मंत्रीपद के विभागों पर भी मोल-भाव करे.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 1:35 PM IST
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(राशिद किदवई)

शिवसेना को उसकी आक्रामकता के लिए जाना जाता है. शिवसैनिक दक्षिण भारतीयों, मार्क्सवादियों, मुसलमानों, बिहारियों और उत्तरी भारतीयों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन और उग्र बर्ताव के लिए पहचाने जाते हैं. लेकिन, बदलते राजनीतिक समीकरण के बीच शिवसेना-एनसीपी का संभावित गठबंधन कांग्रेस को महाराष्ट्र में एक मिली-जुली सरकार बनाने की ओर प्रेरित कर रहा है. हालांकि, इस मामले पर अभी बातचीत और बैठकों का दौर चल रहा है. लेकिन, राजनीतिक गलियारों में ऐसी प्रबल चर्चा है कि कांग्रेस शिवसेना-एनसीपी गठबंधन सरकार को समर्थन दे सकती है.

शिवसेना ने साफ कर दिया है कि उसका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जन संघ, हिंदू महासभा और विश्व हिंदू परिषद से कोई रिश्ता नहीं है. इन संगठनों को महाराष्ट्र में कई दंगों के लिए जिम्मेदार माना जाता है. इसमें 1960 के बाद हुआ मुंबई दंगा, 1984 में हुआ भिवांडी दंगा और 1992-93 में हुए मुंबई दंगे शामिल हैं.

शिवसेना अपने कट्टरपंथी उद्देश्यों और कट्टरपंथी हिंदुत्व विचारधारा की हमेशा से पैरोकार रही है. शिवसेना के अतीत के इस पहलू से कांग्रेस के नेतृत्व को भारी असुविधा हो रही है, कांग्रेस में एके एंटनी और के वेणुगोपाल की 'केरल की लॉबी' सोनिया गांधी को इसे लेकर आगाह भी करते आ रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पसोपेश में हैं, क्योंकि पार्टी के विधायक शिवसेना-एनसीपी की संभावित गठबंधन वाली सरकार का हिस्सा बनना चाहते हैं. वहीं, केरल की लॉबी ऐसा नहीं होने देना चाहती.

वहीं, कांग्रेस विधायकों की राय अलग है. हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका के बीच कांग्रेस विधायकों को जयपुर में शिफ्ट किया गया है. ये सभी विधायक चाहते हैं कि पार्टी शिवसेना-एनसीपी की संभावित सरकार को बाहरी समर्थन दे. साथ ही विधानसभा स्पीकर के पद पर दावेदारी पेश करे और मंत्रीपद के विभागों पर भी मोल-भाव करे.

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उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस



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कांग्रेस विधायकों ने पार्टी आलाकमान के सामने अपनी इच्छा रखते हुए महाराष्ट्र में शिवसेना और बाला साहेब ठाकरे के उदय को भी रेखांकित किया है. विधायकों के मुताबिक, ये कहानी उस बारे में है कि कैसे कांग्रेस ने क्षेत्रीय पार्टियों को निपटाने के लिए क्षेत्रीय नेताओं को उकसाया. बाला साहेब ठाकरे और उनकी पार्टी को मोरारजी देसाई, कृष्णा मेनन और अन्य राजनेताओं को 'फिक्स' करने के लिए इस्तेमाल किया.


बाला साहेब ठाकरे की आत्मकथा -हिंदू हृदय सम्राट (Hindu Hriday Samrat: How The Shiv sena Changed Mumbai Forerver) में लेखिका सुजाता आनंद ने विस्तृत रूप से बताया कि शिवसेना को वसंत सेना क्यों कहा जाता था. क्योंकि, कांग्रेस से मुख्यमंत्री रहे वसंतराव नायक और वसंतदादा पाटिल ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में स्थानीय मराठियों को 80 फीसदी रिजर्वेशन देने के शिवसेना के प्रस्ताव को स्वीकार किया था. नायक और पाटिल दोनों ही महाराष्ट्र के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में गुजराती, पारसी, सिंधी, बोहरा और मुस्लिमों के बढ़ते प्रभाव से चिंतित थे.

पंजाब में 1989 के मध्य तक जनरैल सिंह भिंडरांवाले की तरह बाला साहेब ठाकरे भी एक समय में कांग्रेस के 'हिट मैन' रह चुके हैं. 1967 में शिवसेना ने चुनाव के दौरान कांग्रेस की काफी मदद की थी. कांग्रेस के कई पुराने नेता बताते हैं कि कैसे इमरजेंसी के वक्त शिवसेना ने इंदिरा गांधी की मदद की थी. 31 अगस्त 1975 में अपने एक संपादकीय में मार्मिक बताते हैं, 'बाला साहेब ठाकरे ने कहा था कि 1975 में जो हालात थे, उसमें इमरजेंसी लगाने के सिवा और कोई रास्ता नहीं था. इसी तरह 1980 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को ध्यान में रखते हुए अपना एक भी उम्मीदवार नहीं उतारा.

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संजय राउत और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे


जब 17 नंवबर 2012 को बाला साहेब ठाकरे का निधन हुआ, तब कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने राजकीय सम्मान से उन्हें अंतिम विदाई दी थी. वैसे राजकीय तरीके से अंतिम विदाई सिर्फ उन्हें दी जाती है, जो किसी संवैधानिक पद पर रहे हों. लेकिन, महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम पृथ्वीराज चह्वाण ने बाला साहेब के लिए राजकीय रूप से अंतिम विदाई देने का ऐलान किया था. हालांकि, कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया.


हालांकि, अब चह्वाण फिर से महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि अगर शिवसेना को कांग्रेस समर्थन देती है, तो पृथ्वीराज चह्वाण विधानसभा स्पीकर बनने के लिए सबसे योग्य हैं. फिलहाल शिवसेना को समर्थन दिया जाए या नहीं, इसका अंतिम फैसला सोनिया गांधी को ही करना है और वो भी दोहरे दबाव के बीच.

(लेखक ऑब्जर्बर रिसर्च फाउंडेशन के विजिटिंग फेलो हैं. ये उनके निजी विचार हैं.) 

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First published: November 11, 2019, 12:15 PM IST
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