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Opinion: महाराष्ट्र की राजनीति में खत्म हो गया मुंडे-महाजन युग

News18Hindi
Updated: October 7, 2019, 12:18 PM IST
Opinion: महाराष्ट्र की राजनीति में खत्म हो गया मुंडे-महाजन युग
महाराष्ट्र की राजनीति में भले ही प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे की यादें ही बची हों, लेकिन उनके बच्चों ने उनकी विरासत संभालने की कोशिश की है.

महाराष्ट्र की राजनीति में भले ही प्रमोद महाजन (Pramod Mahajan) और गोपीनाथ मुंडे (Gopinath Munde) की यादें ही बची हों, लेकिन उनके बच्चों ने उनकी विरासत संभालने की कोशिश की है.

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  • Last Updated: October 7, 2019, 12:18 PM IST
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कभी महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पहचान समझे जाने वाले प्रमोद महाजन (Pramod Mahajan) और गोपीनाथ मुंडे (Gopinath Munde) का दौर अब खत्म हो गया है. 1995 में सत्ता में आने के बाद ये पहला चुनाव होगा जब गोपीनाथ मुंडे और प्रमोद महाजन दोनों की चर्चा नहीं होगी, क्योंकि उनके करीबी समझे जाने वाले 4 नेताओं का टिकट इस बार बीजेपी ने काट दिया है. हालांकि उनके क्षेत्र और उनके परिवार के लोगों के जरिए उनकी चर्चा होगी, लेकिन सार्वजनिक स्तर पर उनका नाम कम ही आएगा.

2014 के विधानसभा चुनावों से पहले ही 3 जून 2014 को केंद्र सरकार में तत्कालीन मंत्री गोपीनाथ मुंडे की मौत हो गई थी, लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों (Maharashtra Assembly Elections) में उनका नाम छाया रहा था. महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी को खड़ा करने का श्रेय जिन नेताओं को जाता है, उनमें सबसे बड़ा नाम प्रमोद महाजन का था. भले ही प्रमोद महाजन की मौत 22 अप्रैल, 2006 को हो गई थी, लेकिन गोपीनाथ मुंडे और प्रमोद महाजन के समर्थक समझे जाने वाले नेताओं ने अपने जीते जी कभी भी प्रमोद महाजन का नाम राजनीतिक चर्चा से ओझल होने नहीं दिया. प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे दोनों राजनीतिक साथी होने के पहले साथ-साथ पढ़े-लिखे और रिश्ते में एक-दूसरे के साले बहनोई थे. ये भी एक कारण था कि प्रमोद महाजन के न रहने पर भी गोपीनाथ मुंडे ने उनके लोगों का ध्यान रखा.

महाजन समर्थक इन नेताओं के टिकट कटने से गया संदेश
भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata Party) के शीर्ष नेतृत्व ने इस चुनाव में प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे के करीबी समझे जाने वाले विनोद तावड़े, एकनाथ खड़से, प्रकाश मेहता और राजपुरोहित का टिकट काट दिया है. तावड़े और खड़से 1995 के चुनावों के ठीक पहले बीजेपी (BJP) में आए थे और इनको पार्टी में प्रमोद महाजन लेकर आए थे. इन नेताओं को प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे का करीबी माना जाता था. ऐसे में इनका टिकट कटने के बाद ये साफ संदेश गया है कि महाराष्ट्र की राजनीति से प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे का युग खत्म हो गया.

परिवार ने संभाली विरासत लेकिन...
महाराष्ट्र की राजनीति में भले ही प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे की यादें ही बची हों, लेकिन उनके बच्चों ने उनकी विरासत संभालने की कोशिश की है. गोपीनाथ मुंडे की दोनों बेटियां राजनीति में सक्रिय हैं. उनकी बड़ी बेटी पंकजा मुंडे महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं, जबकि उनकी छोटी बेटी प्रीतम मुंडे गोपीनाथ मुंडे की परंपरागत बीड लोकसभा से दूसरी बार सांसद हैं. प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन भी राजनीति में सक्रिय हैं. पूनम ने 2014 के लोकसभा चुनाव में फिल्म अभिनेता और राजनेता सुनील दत्त की बेटी और दो बार की सांसद प्रिया दत्त को हराया था. पूनम वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की युवा ब्रिगेड भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. भले ही दोनों परिवारों की अगली पीढ़ी को लोकसभा और विधानसभा में जगह मिल गई हो, लेकिन इनमें से कोई भी महाराष्ट्र की राजनीति का चेहरा नहीं बन पाया है. शायद यही वो कारण है जिसके नाते दो दशकों से ज्यादा समय तक परिवार के वफादार रहे नेताओं का टिकट ये नेता नहीं बचा पाए.

(नोट- लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं)

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First published: October 7, 2019, 11:57 AM IST
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