Opinion: गांधी और कांग्रेस के लिए असम और केरल नहीं, बंगाल चुनाव के नतीजे हैं अहम

सोनिया के साथ राहुल गांधी

सोनिया के साथ राहुल गांधी

Assembly Election 2021: बंगाल बेहद अहम है. इसके परिणाम राहुल-सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को प्रभावित करेंगे. अगर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बंगाल में हार जाती है तो फिर, तो कांग्रेस में भी हंगामा होना तय है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 3:31 PM IST
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(राशिद किदवई)

विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2021)  के नतीजे 2 मई को आएंगे. चुनावी नतीजे का कांग्रेस पर क्या असर होगा और किस तरह की राजनीतिक तस्वीर उभर कर सामने आएगी इसको लेकर कई सारी अटकलें लगाई जा चुकी हैं. असंतुष्ट नेताओं के समुह जी-23 की तरफ से बोलने वाले दावा कर रहे हैं कि अगर कांग्रेस को केरल और अमस में जीत मिलती है तो फिर जम कर आतिशबाज़ी होगी. पार्टी के एक हिस्से को लगता है कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद के लिए किसी और नेता की तलाश कर सकते हैं. जैसे कि अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, के.सी. वेणुगोपाल या फिर मुकुल वासनिक. कांग्रेस के कुछ नेताओं का ये भी मानना है कि 2 मई के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा का पार्टी में कद बढ़ सकता है.

जो लोग भी राहुल गांधी के विकल्प के रूप में प्रियंका गांधी को देख रहे हैं उनमें कांग्रेस की बुनियादी समझ का अभाव है. यहां ये समझने की जरूरत है कि राजनीति और कांग्रेस में प्रियंका की मौजूदगी राहुल गांधी की वजह से है. गांधी भाई-बहन एक जोड़ी के रूप में काम कर सकते हैं, भले ही दो मई को कुछ भी हो. इसी तरह, प्रियंका के भविष्य में आगे बढ़ना राहुल के लिए आशीर्वाद होगा.

असम, बंगाल, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के पांच विधानसभा चुनावों के 2 मई के फैसले का कांग्रेस और राष्ट्रीय राजनीति पर काफी ज्यादा असर दिखेगा. लेकिन बड़ी तस्वीर पर बहुत कुछ निर्भर करेगा. उदाहरण के लिए कांग्रेस की नजर इस बात पर है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस चुनाव में कैसा प्रदर्शन करते हैं. असम और पुडुचेरी में बीजेपी की जीत कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व को ज्यादा नहीं खटकेगी. बल्कि बंगाल के चुनावी नतीजे का ज्यादा असर दिख सकता है.
बंगाल बेहद अहम है. इसके परिणाम राहुल-सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को प्रभावित करेंगे. अगर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बंगाल में हार जाती है तो फिर, तो कांग्रेस में भी हंगामा होना तय है. इससे ये तय हो जाएगा कि मोदी-शाह के खिलाफ कुछ भी काम नहीं करता है. गांधू एक मूक दर्शक की तरह चीज़ों को बस देखेंगे.

कांग्रेसियों को लगता है कि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए ममता बनर्जी या फिर किसी और क्षेत्रीय नेता को सामने लाया जाता है तो फिर सोनिया उन्हें अच्छी डील दिला सकती हैं. नेहरू-गांधी परिवार का एक सदस्य 1989 से मंत्री नहीं रहा है. कुछ कांग्रेसी नेता, जिनमें जी -23 समूह शामिल हैं, आशा और अपेक्षा के साथ मराठा के मजबूत नेता शरद पवार की ओर देख रहे हैं. पवार, ममता और स्टालिन के साथ हाथ मिलाकर गांधी परिवार को दरकिनार करने का प्रयास कर सकते हैं. (ये लेखक की निजी विचार हैं-पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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