OPINION: इंदौर की मस्जिद पहुंचकर पीएम मोदी ने अल्पसंख्यक ही नहीं बहुसंख्यकों को भी साधा

प्रधानमंत्री ने इंदौर में हज़रत इमाम हुसैन (एसए) की शहादत की याद में ‘अशरा मुबारका’ में शिरकत की. इमाम हुसैन की शहादत इस्लाम के इतिहास में एक दर्दनाक लेकिन महत्वपूर्ण घटना है.

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Updated: September 15, 2018, 5:12 PM IST
OPINION: इंदौर की मस्जिद पहुंचकर पीएम मोदी ने अल्पसंख्यक ही नहीं बहुसंख्यकों को भी साधा
इंदौर में कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो-PTI
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Updated: September 15, 2018, 5:12 PM IST
राशिद किदवई

इंदौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्जिद में मौजूदगी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्व रखती है. ऐसे समय में जब मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के विधानसभा चुनाव बमुश्किल 75 दिन दूर हों और साल 2019 के लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी हो ऐसे में सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के प्रति मोदी का सत्कार, धार्मिक भजनों में शामिल होना और शॉल स्वीकार करना एक बड़ा राजनीतिक संकेत है.

अगले साल का आम चुनाव मोदी के व्यक्तित्व, नीतिगत पहल, मजबूत अर्थव्यवस्था, बेहतर कानून व्यवस्था, स्वच्छता, प्रशासनिक सुधार, महिला सशक्तिकरण, ट्रिपल तलाक और निकाह-ए-हलाला, ऋण, गरीबों के लिए आवास, उज्जवला योजना इत्यादि पर लड़ा जाएगा. संक्षेप में, इन मुद्दों को लेकर जनता को काफी उम्मीदें हैं.

इंदौर से सिर्फ पीएम मोदी ने मुस्लिम मतदाताओं को लेकर नहीं बल्कि बहुसंख्यक समुदाय  के मतदाताओं को आकर्षित करने के व्यापक संकेत दिये हैं. यह मोदी की दूरदर्शिता का अभिन्न हिस्सा है. मुस्लिम नेतृत्व का एक वर्ग दावे कर सकता है कि मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, उज्जैन और बुरहानपुर जिलों (जहां 2.5 लाख दाऊदी बोहरा की आबादी रहती है) वहां मॉब लिंचिंग, गोरक्षा से जुड़े मामलों समेत हेट क्राइम के मामले सामने आते रहे हैं.

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हालांकि प्रधानमंत्री एक बड़े तबके को यह संदेश देना चाहेंगे कि उन्होंने समाज के हर वर्ग तक पहुंचने की कोशिश की. कैसे 2.52 करोड़ से अधिक अल्पसंख्यक छात्रों (जिनमें आधी लड़कियां हैं) उन्हें सरकार ने तीन छात्रवृत्ति योजनाएं प्रदान कीं, और कैसे सिविल और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में चयनित होने वाले मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रतिशत बढ़ा है.

प्रधानमंत्री ने इंदौर के प्रसिद्ध सैफी मस्जिद में 'अशरा मुबारक' कार्यक्रम में शिरकत की. यह कार्यक्रम करबला की जंग में हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में आयोजित किया जाता है. इमाम हुसैन की शहादत इस्लाम के इतिहास में एक दर्दनाक लेकिन महत्वपूर्ण घटना है. जब यदीज इब्न मुआयाह को खलीफा नियुक्त किया गया तब हुसैन इस्लामी खलीफा के राजवंशी के दृष्टिकोण से परेशान हो गए. हुसैन ने यजीद के नेतृत्व और तरीकों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, और इसकी बजाय लोकतांत्रिक सिद्धांतों और मूल्यों को बनाए रखने के लिए अपने जीवन को त्यागना चुना.
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जब मोदी 53वें सैयदना और दाऊदी बोहरा समाज के धर्मगुरु से आशीर्वाद ले रहे थे तो सीएम शिवराज सिंह चौहान इसे बड़े करीब से देख रहे थे. संभव है कि सैयदना के धर्म समागम में मोदी को आमंत्रित करने का विचार, चौहान का ही रही हो. शिवराज बीते 13 साल से राज्य के सीएम हैं,अब वह अल्पसंख्यकों की ओर झुकाव प्रकट करते हुए नजर आ रहे हैं. स्कूलों में गीता, सूर्य नमस्कार, भोजन मंत्र, वंदे मातरम के गायन पर जब भी विरोध होता है, मुख्यमंत्री मुस्लिम छात्रों और सरकारी कर्मचारियों को इसमें शामिल होने से छूट दे देते हैं

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चौहान सरकार ने मध्य प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2013 पारित किया है, जिसमें धर्म परिवर्तन के मामले में पहले अनुमति लेने की बात कही गई है और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. दोनों, हिन्दू और मुस्लिम समुदाय ने इस बिल का विरोध किया लेकिन इसके दुरुपयोग पर शिकायत दर्ज नहीं कराई.

गो वध को रोकने के लिए मध्य प्रदेश गो-वंश वध प्रतिशेध (संधोधन) विधेयक नाम का एक अन्य बिल लागू किया गया है. बिल के कुछ प्रावधानों को 'बेरहम' बताया गया. उदाहरण के लिए गो हत्या के दोषी पाए गए व्यक्ति को 7 साल की जेल होगी. हालांकि इस कानून के दुरुपयोग की कोई बड़ी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई.

सामाजिक मोर्चे पर, चौहान द्वारा शुरू की गई अधिकांश योजनाओं को मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है. उदाहरण के लिए, वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य-प्रायोजित तीर्थयात्रा की योजना में अजमेर दरगाह, तमिलनाडु के नागपट्टिनम में वेलनकन्नी चर्च, अमृतसर में स्वर्ण मंदिर, बोध गया, पारसनाथ (झारखंड) के साथ रामेश्वरम, पुरी, केदारनाथ, बद्रीनाथ, हरिद्वार आदि धार्मिक स्थानों को शामिल किया गया है. इस योजना के तहत हजारों मुस्लिम, ईसाई, जैन और अन्य ने तीर्थयात्रा की सुविधा ली.

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वहीं 'कन्यादान’ योजना के तहत 2 लाख मुस्लिम जोड़ों समेत 10 लाख से अधिक नवविवाहित जोड़ों को आर्थिक सहायता दी गई है.

चौहान की धर्मनिरपेक्ष और विकास से जुड़ी योजनाएं प्रदेश में बीजेपी के लिए कारगर साबित रही हैं. शिवराज हर ईद पर भोपाल ईदगाह जरूर पहुंचते हैं. साल 2014 के बाद सिर्फ एक बदलाव हुआ है कि उन्होंने टोपी पहनना छोड़ दिया है. हालांकि इस साल कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ भी ईदगाह में बिना पारंपरिक मुस्लिम टोपी के दिखे.

यूपीए सरकार के दौरान साल 2006 में मध्य प्रदेश को सांप्रदायिक दंगे रोकने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए इंदिरा गांधी अवॉर्ड भी मिल चुका है. यह अवार्ड तब मिला जब धार में संभावित दंगे को सफल तरीके से रोक दिया गया था. वीएचपी, बजरंग दल और आरएसएस के कड़े विरोध के बावजूद सरकार 16वीं सदी के स्मारक में नमाज कराने में सफल रही थी. साल 2013 और साल 2016 में जब धार के भोजशाला में कुछ लोगों ने नमाज रोकने की कोशिश की थी तो चौहान ने दंगे होने से रोक लिए थे.

आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या चौहान खुद को मोदी मॉडल में तब्दील करेंगे या फिर पीएम मोदी शिवराज की गुडबुक से कुछ सीखेंगे. दोनों स्थितियों में विपक्ष के लिए चिंता की बात है.

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(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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