Home /News /nation /

OPINION: सत्ता को सेवा का साधन बताकर सियासत साधते पीएम मोदी

OPINION: सत्ता को सेवा का साधन बताकर सियासत साधते पीएम मोदी

पिछले साल 5 जुलाई को कोरोना संकट के समय बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते उन्होंने कहा था- हमारा सेवा का महायज्ञ रुकना नहीं चाहिए.

पिछले साल 5 जुलाई को कोरोना संकट के समय बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते उन्होंने कहा था- हमारा सेवा का महायज्ञ रुकना नहीं चाहिए.

पीएम मोदी अपने लोकप्रिय ‘मन की बात’ प्रोग्राम में व्यक्ति विशेष के सकारात्मक प्रयासों, सामूहिक रचनात्मक प्रवृतियों-गतिविधियों, देश की चुनौतियों, पर्व-त्योहारों और राष्ट्र की एकता-अखंडता के निमित्त होने वाले आयोजनों के साथ-साथ अपने निजी अनुभवों को साझा करते रहते हैं. बीते रविवार 28 नवंबर, 2021 को मन की बात का 83वां एपिसोड था. इस दौरान उन्होंने एक ऐसी बात कही, जिसकी खूब चर्चा हो रही है.

अधिक पढ़ें ...

पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहा करते थे- ‘मैं राजनीति के लिए राजनीति में नहीं हूं, वरन मैं राजनीति में संस्कृति का राजदूत हूं.’ यह भाव उनके राजनीतिक जीवन में सदैव परिलक्षित होता रहा. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नया शब्द जोड़ा है, ‘मेरे लिए सत्ता, सेवा का माध्यम है.’ पीएम मोदी के ये कथन उनके अब तक के राजनीतिक जीवन दर्शन, चिंतन और भावी योजना को एक साथ सुस्पष्ट करते हैं.

सत्ता की जगह सेवा को दी प्राथमिकता
पीएम मोदी अपने लोकप्रिय ‘मन की बात’ प्रोग्राम में व्यक्ति विशेष के सकारात्मक प्रयासों, सामूहिक रचनात्मक प्रवृतियों- गतिविधियों, देश की चुनौतियों, पर्व-त्योहारों और राष्ट्र की एकता-अखंडता के निमित्त होने वाले आयोजनों के साथ-साथ अपने निजी अनुभवों को साझा करते रहते हैं. बीते रविवार 28 नवंबर, 2021 को मन की बात का 83वां एपिसोड था. इस दौरान उन्होंने एक ऐसी बात कही, जिसकी खूब चर्चा हो रही है. मोदी ने कहा कि मेरे लिए प्रधानमंत्री का पद सेवा के लिए है, सत्ता के लिए नहीं. मैं सिर्फ सेवा में रहना चाहता हूं. वो आयुष्मान भारत योजना के एक लाभार्थी राजेश कुमार प्रजापति से बात कर रहे थे. पीएम से योजना के फायदे गिनाते हुए उसने अपनी भावना कुछ इस तरह प्रकट की.

प्रजापति ने कहा, ‘मुझे बहुत फायदा हुआ सर, मैं आपको हमेशा सत्ता में देखना चाहता हूं.’ इस पर पीएम मोदी ने कहा कि मुझे सत्ता में जाने का आशीर्वाद मत दीजिए, मैं गरीबों की सेवा के लिए हूं. पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज भी सत्ता में नहीं हूं और भविष्य में भी सत्ता में जाना नहीं चाहता हूं. मैं सिर्फ सेवा में रहना चाहता हूं. मेरे लिए ये पद, सत्ता के लिए है ही नहीं, सेवा के लिए है.

पार्टी कार्यकर्ताओं को पिलाई सेवा की घुट्टी
पीएम मोदी ने सेवा वाली बात कोई पहली बार नहीं कही है. पिछले साल 5 जुलाई को कोरोना संकट के समय बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते उन्होंने कहा था, ‘हमारा सेवा का महायज्ञ रुकना नहीं चाहिए. हम लोगों ने राजनीति में सत्ता को सेवा का माध्यम माना है. हमने कभी भी सत्ता को अपने लाभ का माध्यम नहीं बनाया. दूसरों की सेवा ही हमारा संतोष है. निःस्वार्थ सेवा ही हमारा संकल्प और संस्कार रहा है.’ तब उन्होंने भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता को Seven ‘S’ की शक्ति का सूत्र दिया था. जिसमें सेवाभाव पहले नंबर पर था. संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, सद्भावना और संवाद को क्रमशः सात सूत्री मंत्र में जोड़ा था. उन्होंने सेवा को प्राथमिकता देने और सेवा को ही अपना जीवन मंत्र मानने की अपील की थी. अपने सत्ता मिशन को साफ करते हुए मोदी ने कहा, ‘हमारा संगठन चुनाव जीतने की सिर्फ मशीन नहीं है, हमारे लिए हमारा संगठन का मतलब है ‘सेवा.’

राजनीति में सेवा को तरजीह देते पीएम मोदी
अब 21वीं सदी का तीसरा दशक चल रहा है. देश को नरेंद्र मोदी के रूप में ऐसा नायक मिला है, जो वंशवाद और भ्रष्टाचार को देश की राजनीति का कैंसर मानता है. सत्ता की जगह सेवा को प्राथमिकता देते हुए परंपरागत राजनीति की धारा को मोड़ता नजर आ रहा है. नतीजा यह है कि पहली बार ‘दिल्ली दरबार’ में चापलूसों और दलालों की एंट्री बंद हुई है. लुटियन जोन में रहने वाले मठाधीशों की सत्ता हिल गयी है. समय-समय पर उनकी बेचैनी भी झलकती रहती है. आज की तारीख में कोई नहीं कह सकता है कि उसकी PMO में सीधी पहुंच है और नीतिगत निर्णयों में वो दखल रखता है. आज तो बड़े-बड़े फैसलों की भनक तक लोगों को निर्णय हो जाने के बाद लगती है. मोदी ने अपनी अनूठी कार्यशैली से राजनीति और सत्ता के बारे में प्रचलित पैमाने को बदल दिया है. शायद इसीलिए सत्तापोषित भ्रष्टाचार शब्द Public Discourse से बाहर हो चला है. सत्ता में बैठ मेवा खाने की जगह सेवाभावी शब्द की अनुगूंज सुनाई पड़ रही है.

प्रेरणा जगाते पीएम मोदी के सेवा भाव
मोदी से प्रभावित और सेवाभावना से प्रेरित होकर आज कई लोग राजनीति में उतर रहे हैं. ताजा उदाहरण अरविंद कुमार शर्मा का है. शर्माजी 1988 बैच के गुजरात कैडर के IAS अधिकारी रहे. लंबे समय तक मोदी जी के साथ PMO में काम किया. जब उन्होंने समाजसेवा की इच्छा जताई तो पीएम ने VRS दिलवाकर उनको गृहप्रदेश यूपी भेज दिया. आज वो MLC हैं और प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष भी. एके शर्मा कहते हैं, ‘लौकिक जीवन को सफल बनाने के बाद अब शेष जीवन को सार्थक बनाने के लिए सियासी सफर शुरू किया हूं. मोदी जी के सेवा मंत्र के प्रेरणा लेकर जनता के सुख-दुख में ही अब सच्चे आनंद की अनुभूति कर रहा हूं. भुवनेश्वर से बीजेपी की सांसद अपराजिता सारंगी भी ऊंचे पद और पैसे को लात मारकर मोदी की प्रेरणा से राजनीति में उतरी हैं. आज वो ओडिशा में बीजेपी का लोकप्रिय चेहरा बनी हुईं हैं.’

समाजसेवा पर हावी होता निजी हित
भारत की राजनीति में एक दौर था, जब देश सेवा की प्रबल भावना से ओतप्रोत होकर अपने निजी करियर, घर-परिवार की चिंता छोड़ केवल आजादी के लिए लोग जीवन को दांव पर लगा देते थे. इतिहास में ऐसे वीर सपूतों के बलिदान की कहानियां भरी पड़ी हैं. आजादी के काफी बाद तक वैसे राजनेता सत्ता में रहे, जिनके लिए देशहित सर्वोपरि था. हमारे आसपास कई सारे ऐसे नेता हुए जिन्होंने निजी हितों की कभी परवाह नहीं की. घर-परिवार की सुख-समृद्धि को प्राथमिकता में नहीं रखा. समाजसेवा को ही जीवन का एकमेव लक्ष्य बनाकर काम किया. समाज में समता, आपसी प्रेम और भाईचारे के लिए जीवन को होम कर दिया. राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर डॉ. शंकर शरण कहते हैं, ‘नब्बे के दशक के बाद राजनीति सेवा की जगह करियर और कमाई का जरिया बन गयी. उसी दौर में वंशवाद की अमरबेल ने पांव पसारा और उत्तर से दक्षिण तक की सियासी दरख्त को अपनी आगोश में ले लिया. यह वो पतन का दौर रहा, जिसमें सभी दल समान रूप से शामिल रहे. अपवाद स्वरूप कुछेक नेता जरुर रहे, जिन्होंने अपने दामन को दागदार नहीं होने दिया.’

तिरोहित होती सेवा भावना
समय का चक्र कहिए कि आज अनेक राज्यों में सत्ता की चाभी कुछ ऐसे लोगों के हाथ में है, जिनको राजनीति विरासत में मिली है. अधिकांश क्षेत्रीय दलों का नेतृत्व व्यक्ति केंद्रित है. ऐसे कई राज्य हो गए हैं जहां पहले बाप मुख्यमंत्री रहा और अब बेटा सीएम की कुर्सी पर है. जाहिर है उन दलों और व्यक्तियों के लिए सत्तासुख जीवन का एकमात्र ध्येय है. ऐसे में सेवा भावना का तिरोहित होना अपरिहार्य है. पीएम मोदी इस मामले में भी अपवाद हैं. इनके घर में ना पहले कोई राजनीति में था और ना आज है.

परिवारिक और निजी संपत्ति के मामले में भी मोदी की हैसियत देश के एक अदने पार्षद से भी कम है. यही वजह है कि सत्ता के शीर्ष पर होने के बावजूद मोदी कुर्सी से अलिप्त हैं और सेवा को ही सत्ता का मूल मंत्र बताते नहीं थकते. चुनाव प्रचार के दौरान एक बार कहा था, ‘मेरा क्या है. झोला उठाऊंगा और हिमालय की ओर निकल जाऊंगा.’ मोदी की यही साफगोई, सार्वजनिक जीवन की शुचिता और निजी जीवन की पवित्रता उनको सियासी नेताओं से अलग करती है और आमजन के दिलों में गहरे तक उतार देती है.

Tags: PM Modi, Pm modi latest news, Pm modi news

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर