OPINION- शाह फैसल ट्वीट: सिविल सेवा अधिकारियों को अपनी सीमाओं का ख्याल रखना चाहिए

आईएएस अधिकारी शाह फैसल

कई बार लगता है कि आपके आप-पास घटनाएं हो रही है लेकिन आप कुछ कर नहीं पा रहे हैं. जिसे हम जैसे लोग महसूस करते हैं. हो सकता है कि उनका ट्वीट केवल एक समाज के गिरते नैतिक मूल्यों पर एक टिप्पणी हो.

  • Share this:
    (आशीष जोशी)

    भारत में सिविल सेवा के अधिकारी दो तरह के कंडक्ट रूल्स (आचरण नियमों) के तहत काम करते हैं. पहला अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण नियम) 1968 और दूसरा केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण नियम) 1964.

    अखिल भारतीय सेवा (आचरण नियम) के पैरा 7 में ये बातें लिखी है...

    7. सरकार की आलोचना: कोई भी सरकारी कमर्चारी किसी रेडियो प्रसारण में या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से या अपने नाम से या गुमनाम, छद्म नाम से या अन्य व्यक्ति के नाम से प्रकाशित किसी लेख में या प्रेस से भेजे गए किसी पत्र में या किसी सार्वजनिक भाषण में कही ऐसे तथ्यों का कथन न करें या अपनी राय के संबंध में ऐसा वक्तव्य न दे जिससे :-(i) केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार की किसी वतर्मान या हाल की नीति या कारर्वाई की प्रतिकूल आलोचना हो
    (ii) जो केन्द्र सरकार या राज्य सरकार के बीच संबंध खराब करने वाली हो या
    (iii) जो केन्द्र सरकार और किसी विदेशी सरकार के बीच संबंध खराब करने वाली हो. लेकिन इस नियम में बताई गई कोई भी बात उन कथनों या व्यक्त किए गए विचारों पर लागू नहीं होगी जो उसने अपनी पदीय हैसियत या की गई ड्यूटी को निबाहने में दिए/किए हों.

    आचरण नियमों का नियम 3

    3 (1) हर सदस्य को हमेशा पूर्ण अखंडता और काम के प्रति समर्पित रहना होगा.

    1 ए) सेवा के हर सदस्य बनाए रखेंगे:
    (i) अखंडता और ईमानदारी
    (ii) राजनीतिक तटस्थता
    (iii)काम करने में योग्यता, निष्पक्षता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को बढ़ावा देना
    (iv)उत्तरदायित्व और पारदर्शिता
    (v) जनता के लिए उत्तरदायित्व, खासकर कमजोर वर्ग के लिए
    (vi) जनता के साथ अच्छा व्यवहार

    (2 बी) सेवा के प्रत्येक सदस्य को: -
    (i) संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की सर्वोच्चता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहें
    (ii) भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक आदेश, सभ्यता और नैतिकता की रक्षा और समर्थन;
    (iii) सार्वजनिक सेवा में अखंडता बनाए रखना
    (iv) पूरी तरह से सार्वजनिक हित में निर्णय लें और सार्वजनिक संसाधनों का प्रभावी ढंग से और प्रभावी रूप से सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग करें; ...

    शाह फैसल पर आरोप लगाया गया है उन्होंने अपने कामों के प्रति पूरी ईमानदारी और अखंडता नहीं बनाए रखी.

    नियम 3 (1) व्यापक है, ये सारी चीजों को कवर करता है. लेकिन छोटे केस पर खास ध्यान देने की जरुरत है. एसआर बिस्वास बनाम सीमा शुल्क कलेक्टर, एआईटी 1964 केस में कलकत्ता हाई कोर्ट ने ये ऑबर्जबेशन किया था.

    "कभी-कभी गलत तर्क दिया जाता है कि आधुनिक प्रशासन की जटिल प्रणाली में अखंडता की बाहरी सीमाओं को निर्धारित करना मुश्किल है. योग्यता के विचार अनियंत्रित हो सकते हैं लेकिन उनकी बुराई केवल जीवन और कार्य के मानकों को मानने या निर्धारित करने के लिए नहीं हैं. अगर एक सरकारी अधिकारी को ईमानदारी बनाए रखने और कर्तव्य के प्रति समर्पित होने की आवश्यकता होती है, तो उसे केवल उस प्रशासनिक सभ्यता की सीमाओं के भीतर रखने के लिए कहा जाता है, जो नागरिक प्रशासन के नाम से जाता है."

    सरकारी कर्मचारी का 'अनुचित' आचरण नियमों को ठीक से समझाया नहीं गया है. वेबस्टर के शब्दकोश के मुताबिक, 'अनावश्यक' शब्द का मतलब 'अनुपयुक्त', 'अनिश्चित', 'अनुचित' है.

    श्रीनिवासन बनाम भारत संघ, 1982, मद्रास हाई कोर्ट में कहा गया है, " एक आचरण जो अश्लील, ग़लत या घृणित है, हालांकि कानूनी चूक नहीं है, सरकारी कर्मचारी का आचरण है''

    गोलाम मोहियुद्दीन बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, एआईटी 1 964 के मामले में, कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि इस नियम में कुछ भी साफ नहीं है, जबकि पी खजा खान बनाम पीपीजी एपी, 1 9 75 (2) एसएलआर 417 में एपी हाई कोर्ट ने कहा था कि नियम अस्पष्ट नहीं है.

    जीबी सिंह, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, नाम की किताब में लिखा है "नियम सावधानी और देखभाल के साथ लागू किया जाना चाहिए".

    आचरण नियमों में कुछ नियमों को स्पष्ट रूप से और काफी हद तक परिभाषित करना जरुरी हो जाता है. सोशल मीडिया को ध्यान में रखते हुए 2016 में नियम में संशोधन के लिए एक समिति का गठन किया गया था. इनके फैसले का अभी भी इंतजार है.

    दरअसल ये समस्या सोशल मीडिया के आने के बाद हुई है. निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच यहां ठीक से पता नहीं चलता है.

    सिविल सेवकों के लिए आचरण नियम सार्वजनिक मंच पर खुद को व्यक्त करने पर प्रतिबंध लगाते हैं. प्रतिबंध मूल रूप से ये सुनिश्चित करने के लिए हैं कि कर्मचारी राजनीति पार्टियों से दूर रहे.

    लेकिन कई बार कर्मचारी ये मानते हैं कि सत्तारूढ़ पार्टी की राजनीतिक विचारधारा से जुड़ना ठीक है. लेकिन सच ये है कि किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ना सरकार की किसी नीति की आलोचना करने जैसा है, जो कि गलत है.

    सिविल सेवाओं के कर्मचारियों का सत्तारूढ़ दल के साथ जुड़ने के कई उधारण हैं. ऐसा राजस्थान में अतिरिक्त मुख्य सचिव और कर्नाटक के एक प्रधान सचिव कर चुके हैं.

    एक सिविल सेवक संविधान के प्रति अपनी शपथ से बंधे हैं और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए.

    सिविल सेवा के कर्मचारी कोई रोबोट नहीं हैं और अलग-अलग मुद्दों पर उनके विचार हैं. लेकिन साथ ही, कोई कर्मचारी सरकार की आलोचना नहीं कर सकता. दोनों के बीच 'नौकर-मालिक' का रिश्ता होता है.

    तो क्या शाह फैसल का ट्वीट सरकार के लिए आलोचनात्मक है?

    उनका ट्वीट असहायता का एक अभिव्यक्ति हो सकता है. कई बार लगता है कि आपके आप-पास घटनाएं हो रही है लेकिन आप कुछ कर नहीं पा रहे हैं. जिसे हम जैसे लोग महसूस करते हैं. हो सकता है कि उनका ट्वीट केवल एक समाज के गिरते नैतिक मूल्यों पर एक टिप्पणी हो. राज्य सरकार द्वारा लगाए गए आरोप का जवाब ही इसे स्पष्ट कर सकता है. क्या फैसल का ट्वीट आचरण नियमों का उल्लंघन है? मैं इसे पाठक के फैसले में छोड़ देता हूं, क्योंकि मैं भी आचरण नियमों से बंधा हूं.

    सोशल मीडिया आज एक व्यक्ति की निजी जगह का विस्तार है. ये व्यक्तिगत नागरिकों के साथ बातचीत के लिए अड्डा है. इसलिए, सोशल मीडिया पर जुड़ाव से संबंधित आचरण नियमों की समीक्षा की जानी चाहिए.

    ये भी पढ़ें:

    अमित शाह-नीतीश कुमार की ‘डिनर डिप्लोमेसी’ से सुलझेगा सीटों का मुद्दा?
    एक्स्ट्रा मैरिटल संबंधों को क्राइम बनाए रखें, इसमें नरमी का असर शादियों पर पड़ेगाः SC में केंद्र

    (लेखक सिविल सेवा अधिकारी है. ये उनकी निजी राय है)

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.