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स्मृति शेष: टीएन शेषन जिन्होंने देश को चुनाव आयोग के सही मायने बताए

RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: November 13, 2019, 4:26 PM IST
स्मृति शेष: टीएन शेषन जिन्होंने देश को चुनाव आयोग के सही मायने बताए
टीएन शेषन की फाइल फोटो

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन (TN Seshan) ने रविवार को चेन्नई (Chennai) स्थित अपने आवास में रात करीब 9:30 बजे अंतिम सांस ली.

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  • Last Updated: November 13, 2019, 4:26 PM IST
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चुनाव आयोग (Election Commission) सही अर्थों में एक शक्तिशाली संवैधानिक संस्था है. इसे देश को समझाने वाला अगर कोई चुनाव आयुक्त (Election Commissioner) था तो वह टीएन शेषन (TN Seshan) थे. उन्होंने देश को बताया कि चुनाव आयोग एक ऐसी संस्था है जिसके हाथों में लोकतंत्र की सुरक्षा की वास्तविक जिम्मेदारी है. इससे पहले यह माना जाता था कि चुनाव आयोग कोई ऐसी संस्था है जो सिर्फ चुनाव के दौरान ही काम करती है. इन सबके अलावा मतदाता पहचान पत्र और चुनाव आचार संहिता लागू करवाने का श्रेय भी शेषन को ही जाता है.

आजादी के बाद बहुत चुनाव आयुक्त हुए लेकिन किसी ने चुनाव आयोग की वह शक्ति नहीं दिखाई थी जो टीएन  शेषन ने दिखाया. टीएन  शेषन दरअसल एक नौकरशाह थे. नौकरशाही या जिसे लालफीताशाही अपने देश में कहा जाता है, उसकी सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठने के बाद भी उन्होंने इस बात को समझा और देश को भी समझाया कि सबसे बड़ी ताकत मतदाताओं की है.

मतदाताओं की इस ताकत की अनदेखी देश में कई तरफ से हो रही थी. उस दौर में जब दक्षिण के इस मेधावी अधिकारी को यह महत्वपूर्ण कुर्सी दी गई तो उन्होंने इस कुर्सी के दायित्व को समझा. ध्यान रखने वाली बात यह है कि उन्होंने इस कुर्सी और आयोग के महत्व को खुद ही नहीं बल्कि इसके जरिए सत्ता तक जाने वाले लगभग सभी दलों को समझाया. यह वह समय था जब राजनीतिक दल अपने आप को इतना महत्वपूर्ण समझ रहे थे. उन्हें चुनाव आयोग किसी सामान्य दफ्तर से ज्यादा नहीं लगता था.

इसे थोड़ी और सहजता से समझने का प्रयास किया जाए तो नेहरू के समय में चुनाव आयोग को उस सक्रियता की आवश्यकता ही महसूस नहीं होती थी जो दरअसल चुनाव आयोग के पास होनी चाहिए थी. बाद के समय की बात की जाए तो संवैधानिक संस्थाओं का पतन ही होता गया. इसका एक सामान्य नतीजा यह हुआ कि लोगों को ध्यान में नहीं रहा कि चुनाव आयोग कितना महत्वपूर्ण है.

चंद्रशेखर सरकार में बने मुख्य चुनाव आयुक्त
कहा जाता है कि टीएन शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर ले जाने वाले लोगों में बहुत अहम योगदान सुब्रमण्यम स्वामी का रहा. सुब्रमण्यम स्वामी वह व्यक्ति थे जो उन्हें अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ा चुके थे. बताया जाता है कि स्वामी ने चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री रहते हुए टीएन सेशन को यह प्रस्ताव दिया था और यह भी सुना जाता है कि टी एन शेषन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले राजीव गांधी से सलाह ली थी.

राजीव गांधी की सरकार में टीएन शेषन बहुत से महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके थे.  शेषन चाहे वन और पर्यावरण मंत्रालय में रहे हों या फिर राजीव गांधी ने जब उन्हें आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय का सचिव बनाया तब भी उन्होंने अपना काम पूरी तरह करके दिखाया.
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अब्दुल कलाम को कुछ इस तरह संबोधित करते थे शेषन
उन्हें याद करते हुए एक बार खुद तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि मुझे सबसे अच्छा लगता है जब मुझे शेषन साहब अबुल पाकिर जैनुद्दीन कलाम कह कर पुकारा करते हैं. कलाम साहब शेषन साहब के लिए सम्मान में यह बात कहा करते थे.

शेषन साहब इसी सम्मान के हकदार भी थे. मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर उन्होंने चुनाव आयोग को जो धार दी वह आज तक कायम है. सिर्फ 21 वर्ष की अवस्था में सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले टीएन  शेषन साहब न सिर्फ आने वाले समय में युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे बल्कि उन अधिकारियों के लिए भी एक दैदीप्यमान ज्योति की भांति चमकते रहेंगे जो इमानदारी की आभा के साथ सरकारी सेवा करना चाहेंगे.

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First published: November 11, 2019, 5:52 AM IST
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